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Thursday, February 12, 2009

गुरुदेव आप तो निकल लो,उसका भाई अपने दोस्तो के साथ किसी को ढूंढ रहा है?बहुत गुस्से मे है

ठहाको के दौर मे साईंस कालेज कब आया पता ही नही चला। सब उतरकर अंदर जाने लगे तो देखा सामने वो भी चली जा रही थी।सारा ग्रुप खुश हो गया।सभी बोले शायद यहीं एड्मिशन लेगी।तभी बल्लू ने कहा पीजी मे होना चाहिये?बाकी बोले क्यों?वो बोला तो फ़िर उसी सब्जेक़्ट मे एड्मिशन लेना पडेगा।चुन्नू भी कहां चुप रहने वाला था। वो बोला अबे फ़र्स्ट इयर मे होनी चाहिये।पप्पू बोला क्यों बे फ़र्स्ट इयर मे होने से तेरे को क्या फ़ायदा।चुन्नू अपनी स्टाईल मे बोला मामा फ़र्स्ट ईयर मे होगी तो खपा सकते है,पीजी मे होगी तो समझदार होगी। उसे पटाना थोड़ा मुश्किल होगा।साले बोल तो ऐसे रहा है जैसे छोटी सी बात फ़िल्म मे अशोक कुमार अमोल पालेकर को सिखाता है।सब आपस मे भीड़ गये थे हमेशा की तरह ।





कालेज मे वो आगे -आगे चल रही थी और पिछे-पिछे हमारा ग्रुप्। पुराने साथी धड़ाधड़ लग भग चिल्लाते हुए उसे सुनाकर नमस्ते ठोक रहे थे। हमारी भी लिफ़ाफ़ा छाप छाती फ़ुलकर गामा पहलवान को चुनौती देने लायक हो रही थी। चारो ओर से नमस्ते-नमस्ते सुनकर उसे भी समझ मे आ गया था कि ये लोग कम-से-कम आर्डिनरी तो नही है।उसके साथ एक कंडिल भी थी।कंडिल यानि चश्मिश्। वो कुछ ज्यादा ही खड़ूस थी।वो उसे लगभग घसीटते हुए गर्ल्स कामन रूम की ओर बढने लगी। जैसे ही उन्होने गर्ल्स कामन रूम क्रास किया। आधे फ़ौर्न बोले अच्छा हुआ यार्।मैं बोला क्या अच्छा हुआ।सब बोले गर्ल्स कामन रूम के सामने न तो खुद खड़े होते हम्को खड़े होने देते। अब इसे अच्छा नही कहे तो क्या कहे?मै बोला अच्छा लगता है क्या वहां खड़ा रहना? इससे पहले कोई कुछ कहता बल्लू फ़ट पड़ा ये साला चुनाव का चक्कर बंद कराना पड़ेगा।



इससे पहले आपस मे सब हमेशा की तरह उलझ पड़ते ,वो मुड गई थी। चुन्नू बोला गुरुदेव गड़बड़ लग रही है।क्या गड़बड़ है बे सब उसपर चिल्लाए। वो बोला अबे जिधर जा रही है ना उधर अपने को एड्मिशन नही मिलने वाला। बात मे दम था। उधर बाटनी और ज़ूलाजी डिपार्ट्मेंट ही थे। साला लफ़ड़ा हो गया यार बल्लू बोला।इतने सालो मे पहली बार कोई लड़की पसंद आई और उसकी बात बीच मे ही काट कर चुन्नू बोला साले इस बार मै कोई कोंप्रो नही करने वाला।सबसे पहले उसे मैने देखा था।तभी पप्पू बोला पहले देखने से कुछ नही होता। फ़िर एक बार सब उलझ गए थे।हल्ला सुनकर वो मुड़कर देखने लगी।सब फ़िर शांत हो गए,जैसे कुछ हुआ ही नही।अब मै भड़का साले वो पलटी नही कि सब खामोश हो गये?क्या लगती है बे?सब करीब-करीब एक साथ चिल्लाए तेरी भाभी।





फ़िर से एक बार भाभी सुनकर वो पलटी। सब कमिने फ़िर से शरीफ़ दिखने की कोशिश करने लगे।पता नही क्या हुआ,वो मुस्कुरा दी।बस फ़िर क्या था सभी को लगा कि वो मुस्कुराहट सिर्फ़ और सिर्फ़ उसके लिए है।सब फ़िर मारपीट पर उतर आए थे।वो बाटनी डिपार्टमेंट का नोटिस बोर्ड पढने लगी। अब कन्फ़र्म हो गया था वो बाट्नी वाली है। अब हम मे से कोई भी बाटनी वाला नही था जो नोटिस बोर्ड पढने जाता।इस बीच वो अंदर रूम मे चली गई। और तब शुरु हुई उसकी सुन्दरता पर वाद-विवाद्। सबसे पहले बोला बल्लू बोला ,मिस कालेज है। इससे खूबसूरत लडकी मैने आज तक़ नही देखी,चुन्नू ने भी उसकी हां मे हां मिलाई तो शकील बोला चुप बे अंधे साले दिखता है नही और ब्यूटी कांटेस्ट का जज बन रहा है।बल्लू बोला थोड़ी बठवी(नाटी) है।इतना सुनना था कि पप्पू भड़क गया तू तो ऐसे बोल रहा है,जैसे अमिताभ से भी लम्बा है।बल्लू फ़िर बोला थोड़ी पतली है। अब चुन्नू भड़का साले क्या भैंस खरीदने निकला है,जो मोटी-पतली देख रहा है। सभी उसकी सुंदरता की तारीफ़ मे लग गए थे।

मैने कहा चले या शाम तक़ यहीं खड़े रहना है। सब बोले थोड़ी देर रूकते हैं। अब शकील बोला भाई तू कुछ नही बोला यार ।मैने कहा किस बारे मे? उसने कहा अरे यार इतनी सुंदर लड़की है।मैने कहा इस माम्ले मे मुझे दूर ही रखो।उसने कहा कि भाई वैसे वो लड़की दिख कैसे रही है ?इतना तो बता दे।मैने कहा है तो सुंदर्। सब चिल्लाए क्या बोला? अबे क्या बोला क्या बोला ?तुम लोगो ने पूछा तो मैने कहा सुंदर है।इतना सुनते ही चुन्नू बोला यार मै तो अपना एप्लिकेशन वापस लेता हूं।बाकी भी बोले हम भी। अब शकील बोला पहली बार भाई किसी को सुंदर बोला है इसलिए आज से वो हम सब की भाभीऽआज से नही अभी से,सब चिल्लाए। मै बोला ये क्या बक़वास है।सब बोले हम सब देख लेंगे।यहां तक़ सब ठीक था।एक दिन कालेज पहूंचते ही किसी ने मुझसे कहा गुरुदेव आप तो निकल लो,उसका भाई अपने दोस्तो के साथ किसी को ढूंढ रहा है?बहुत गुस्से मे है। और फ़िर क्या हुआ बताऊंगा कल्।

16 comments:

PD said...

आप तो बस जमाये रहिये जी.. हम जमे ही हुये हैं..

अनिल कान्त : said...

सही किस्सा सुनाया .....तो भाई किस को ढूढ़ रहा था .....जल्दी बताना ..

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

ab inconvenienti said...

लेकिन हाय री किस्मत! वो ब्यूटी क्वीन तो नई लेक्चरार निकली

(हमारे साथ भी स्कूल में ऐसा हो चुका है)

Arvind Mishra said...

हूँ ,तो सुकुमार फंतासियों और कमसिन तमन्नाओं का दौर याद किया जा रहा है पर ऐसे मोड़ पर लाकर तो कहानी मत खत्म किया कीजिये !

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

वाह भाई वाह रोचक , भइया की एंट्री कहानी गुल खिलाएगी .

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आनंद ले रहे हैं जी। लगता है 70 के दशक की किसी फिल्म का सीन चल रहा है।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

ज़रूर उसके भाई की सहायता की होगी, ढूँढने में, और कूटने में. ऑफ़ कोर्स, आप लोग निकले चलता फिरता हमदर्द दवाखाना. अगली कड़ी में देखेंगे... हम लोग!

Sanjeet Tripathi said...

दिनेशराय जी से सहमत हूं, वाकई ऐसा लग रहा जैसे कोई पुरानी फिल्म का सीन हो।

मजे ले रहा हूं।


रट भी रहा हूं सारा किस्सा प्रेस क्लब मे सब को बताना है न ;)

COMMON MAN said...

वाह सर, क्या खूब आनंद आ रहा है.

अभिषेक ओझा said...

वाह ! कल तक इंतज़ार क्यों करवा रहे हैं. आज ही एक और पोस्ट लिख डालिए.

Udan Tashtari said...

गुरुदेव आप तो निकल लो,उसका भाई अपने दोस्तो के साथ किसी को ढूंढ रहा है?बहुत गुस्से मे है। और फ़िर क्या हुआ बताऊंगा कल्।

--मस्त हो गई तबीयत-कल का इन्तजार भारी पड़ रहा है, महाराज!!

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

वाह! अनिल जी, बहुत बढिया किस्सा सुनाया.
अब जाकर थोडा सुकून मिला, वर्ना तो पिछले 2 दिनों जिधर देखो बस चड्डी बनियान की फालतू बहस के जरिए लोग लगे हुए हैं अपने आप को बुद्धिजीवी सिद्ध करने.

राज भाटिय़ा said...

हड्डी पसलिया तो जरुर बच गई, वरना इतने सालो बाद यह पोस्ट केसे लिखते, लेकिन फ़ंसी भी नही, वरना अब तक दस बारह बच्चे होते, ओर जो पोस्ट लिखने का समय ही ना देते...
चलिये देखे अब गव्वर सिंह किस कॊ पकडता है,
लेकिन मजा आ गया हमे , ओर आप सब को आने वाला है.
धन्यवाद

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

मजा आ गया

समयचक्र: चिठ्ठी चर्चा : वेलेंटाइन, पिंक चडडी, खतरनाक एनीमिया, गीत, गजल, व्यंग्य ,लंगोटान्दोलन आदि का भरपूर समावेश

अनूप शुक्ल said...

इंतजार में हैं हम तो!

बी एस पाबला said...

फिर क्या हुया?