इस ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया, कृपया कमेण्ट्स कर मुझे मेरी गलतियां सुधारने का मौका दें

Monday, July 27, 2015

मानवाधिकार के नाम पर आतंकी को फांसी न देने की अपील करने वालों देखो एक एसपी शहीद हो गया

गुरुदासपुर के एसपी आतंकी हमले में शहीद हो गये.अब इस बात पर दुनिय भर की राजनीति भी गई और तर्क कुतर्क भी.इन सब के बीच शहीद एसपी का परिवार ज़िंदगी भर न भुलाये जाने वाले गम को सहने पर मज़बूर हो जायेगा.फिर एक आतंकी की फांसी पर इंसानियत का मुलम्मा चढाने वाले मानवाधिकार के ठेकेदार और फांसी न देने की अपील के बहाने आतंकियों को अप्रत्यक्ष रुप से सपोर्ट करने वालों को शायद एक एसपी शहादत नज़र नही आयेगी?उन्हे शहीद के परिवार के मान्वाधिकार नज़र नही आयेंगे?उनकी इंसानियत कंही कोने में दुबक जायेगी?उनकी मुखरता कंही किसी कोने में मुंह छिपा लेगी.हद है बेशर्मी की.मानवाधिकार के नाम पर आतंकी की फांसी पर पुनरविचार करने वालों को भेजना चाहिये ऎसे समय पर आतंकियों से मुक़ाबला करने.हद है बेशर्मी की और इंसानियत के बहाने आतंकियों की पैरवी करने की.

Saturday, July 25, 2015

"हिम्मत ए मर्दा,मदद ए खुदा" का जो भी मतलब जो भी शादीशुदा अपनी बीबी के सामने मर्द बनने की कोशिश करेगा उसकी तो फ़िर खुदा ही मदद कर सकता है

एक शादीशुदा मित्र ने बताया कि "हिम्मत ए मर्दा,मदद ए खुदा" का जो भी मतलब आज तक बताया गया है सब बकवास है।उसका असली मतलब है जो भी शादीशुदा अपनी बीबी के सामने मर्द बनने की कोशिश करेगा उसकी तो फ़िर खुदा ही मदद कर सकता है,और कोई नही।गलत हो सही हो ये तो वही जाने,इस मामले में अपना कोई खास एक्सपीरींयस नही है।

Wednesday, July 22, 2015

दिल्ली वालो के बडे दिल की तो तारीफ करना ही पडेगा भाई

आप अपनी कार के लिये ड्राईवर कितना ठोक बज़ा कर रकह्ते हैं.एक बार गलती की तो वार्निंग,दूसरी/तिसरी बार में कडी फटकार,बार बार करने पर गालियां और हर बार वही गलती करने पर...... बर्दाश्त नही करते ना.पर सरकार के मामले में हम कितना भी ठोक बज़ा कर फैसला करे,चलाने वाला खुद को मालिक ही समझ लेता है और फिर दे दनादन,ठोक ठोक कर कार सारी सरकार का कबाड बना देता है और हम सिर्फ तमाशाई बने देखते रह जाते है.हमारे पास बर्दाश्त करने के अलावा और कोई चारा नही रहता.फिर बर्दाश्त की भी हद होती है,खासकर दिल्ली वालो के बडे दिल की तो तारीफ करना ही पडेगा भाई.

Tuesday, July 21, 2015

नेता लोगों को न जवाब देना है और ना सुनना है,इसलिये मिलकर शोर मचा रहे

जिस तरह से संसद और विधानसभाओं मे सत्र चलने नही दिया जा रहा है या यूं कहे कि दो पार्टियों के गुत्थमगुत्था में स्थगित हो रहा ह,उससे तो अपने स्कूल कालेज के दिन याद आ रहे है।कालेज में हारने वाला क्लास रेप्रेज़ेंटेटिव्ह कभी जनरल गोल करा देता था कभी जीतने वाला और कभी कभी दोनो मिलकर।यानी कुल मिलाकर क्लास नही लगती थी।पढैया या पढाकू या इमानदार छात्रों का नुकसान हो जाता था,यानी जनता का और नेता लोग मज़े करते थे।ऐसा ही कुछ कुछ दिल्ली/भोपाल/रायपुर मे हो रहा हैं।नेता लोगों को न जवाब देना है और ना सुनना है,इसलिये मिलकर शोर मचा रहे और जिस दिन हीन जनता को जवाब चाहिये उसे रोज़ निराश होना पड रहा है क्योंकि क्लास ही नही लग रही है।सो जय बोलो जनरल गोल की।धन्य हो राजनिती,धन्य हो लोकतंत्र,धन्य हो लोक लाज और धन्य हो जनता की सहनशक़्ति की।जय जनता जनार्दन ,जिस दिन जागेगी,उस दिन किसी को भी भागने के लिये तक रास्ता नही मिलेगा,तब तक़ इतरालो,मिलकर हंगामा मचा लो,शोर मचा लो।

Saturday, July 11, 2015

वन्दे मातरम और सूर्य नमस्कार पर बवाल,बजरंगी को भाईजान बनाने पर कोई प्रतिक्रिया नही?

वन्दे मातरम और सूर्य नमस्कार पर अल्पसंख्यक देश भर में बवाल मचा देते है पर बहुसंख्यकों के इष्ट बजरंगी को भाईजान बनाने पर कोई प्रतिक्रिया नही?कमाल की धर्मनिरपेक्षता है भाई.

Sunday, June 21, 2015

ओवर पब्लिसिटी से नाराज़ कुक्कुटाईन ने नही लगया कुक्कुटासन

योग के अचानक अंतरराष्ट्रीय हो जाने से और जब उसकी ब्रांडिंग बडे बडे लोग करने लगे तो चौतरफ़ा योग ही योग नज़र आने लगा।सारी दुनिया तो नही देश तो योग मय नज़र आने लगा।सिर्फ़ नज़र आने लगा ना,योग मय हुआ नही है,वर्ना शांत योगियों से भरे देश में थोडी बहुत तो शांति भी नज़र आती।खैर योग दिवस और उसकी जबर्दस्त पब्लिसिटी का किस किस पर असर हुआ ये तो योगीराज ही जाने,पर रोज़ सुबह घर से बाहर निकलते ही तत्काल एक से एक आसन दिखाने वाली हमारी कुक्कुटाईन उससे जरुर अप्रभावित नज़र आई।अप्रभावित क्या खासी नाराज़ नज़र आई।कंहा तोम रोज़ घर से बाहर निकलते ही पडोसी को घर के बाहर खडा देख तत्काल कुक्कुटासन लगाने को तत्पर हो जाती और उसके आसान को देख नमस्ते भैया का झटका देकर ये जताने की कोशिश करते पडोसी ये बताते कि कुक्कुटाईन को आगे ले जाईये ये आसन का उचित स्थान नही है।खैर आज वैसे भी रोज़ की भांति देर से हुई थी और थोडा ज्यादा ही देर से हुई थी,सो सारे पडोसी और दूर दूर तक हमारी कुक्कूटाईन के प्रातःभ्रमण और कुक्कुटासन से सुबह सुबह सन्न रह जाने वाले भी जाग गये थे और सजग थे।मुझे लगा कि आज नमस्ते कुच ज्यादा ही होंगे और कुक्कुटाईन कुछ ज्यादा है परीक्षा लेगी।पर हैरानी की बात देखिये की जब सारी दुनिया योग के एक दिवसीय प्रदर्शन के लिये हाय तौबा मचा रही साल भर सुबह सुबह कुक्कुटासन में मास्टर हमारी कुक्कूटाईन मुंह फ़ुलाई इधर उधर भटकती रही और हमारे साथ साथ अपनी बाल्कनी पर खडे लोगों के धैर्य की परीक्षा लेती रही।मुझे समझ में आ गया कि योग के चौतरफ़ प्रदर्शन से हमारी कुक्कुटाईन कुक्कुटासन नही लगा कर सांकेतिक विरोध कर रही है,फ़िर लगा कि कंही ये किसी पालिटीकल लीडर के स्टेटमेंट से तो प्रभावित नही हो गई है।खैर जाने दिजीये उसके चक्कर में आज मेरा प्रातःभ्रमण जरुरत से ज्यादा हो गया और मुझे आसन लगाने की जरुरत आन पडी।आप सभी प्रदर्शनप्रिय भाई/बहनो को इंटरनेशनल योग दिवस की बधाई

Sunday, January 4, 2015

किन्नर का जीतना,राजनितिक पुरुषार्थ के मुंह पर करारा तमाचा!

भाजपा का गढ बन चुके छत्तीसगढ में नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों ने सरकार को चेतावनी दे दी है,तीन बार सरकार जरुर बनवा दी पर अगर परफारमेंस ठीक नही रहा तो मान लेना कि वे सत्त्ता पर किसी को भी बिठा सकते है.रायगढ में एक किन्नर का निर्दलीय जीतना इस बात का ही स्पष्ट संकेत है कि जनता सब जानती है और क्या करना है वो तो और अच्छी तरह से जानती है.एक किन्नर पर विश्वास जता कर जनता ने राजनितिक पुरुषार्थ के मुंह पर करारा तमाचा जद दिया है.कांग्रेस को भी जनता ने संदेश दिया कि अच्छा काम किजीये तो दिल्ली दूर नही पर अगर लडते झगडते रहे तो इतने अच्छे मौके पर भी भाजपा का सफाया नही कर पाने का गम हमेशा सालता रहेगा.बहरहाल पब्लिक ने कांग्रेस/भाजपा दोनो के संकेत दे दिये है,अब देखना है कौन समझदारी से काम लेता है.