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Sunday, June 7, 2009

प्लाईवुड बेचने वाले मज़ाक उड़ा रहे है न्यायपालिका का?

पेश है एक और माईक्रोपोस्ट्। प्लाईवुड बेचने वाली एक कंपनी अपने विज्ञापन मे खुले आम अदालती प्रक्रिया के लम्बे होने का मज़ाक उड़ा रही है।ये विज्ञापन काफ़ी समय से दिखाया जा रहा है और इसमे हमारी न्यायपलिका को अपना प्लाईवुड बेचने के लिये बतौर माडल इस्तेमाल किया गया है।इसमे कोई शक़ नही कि हमारी अदालतो में जजों,कर्मियों और अदालतों की कमी के कारण फ़ैसला होने मे देर तो होती है।मगर क्या इस्का मतलब ये समझा जाय कि हर मामले मे ज्वान बूढा हो जायेगा मगर,वकील बुढे हो जायेंगे,मगर प्लाईवुड वैसा का वैसा ही रहेगा।मेरी तो इस मामले मे ज्यादा समझ है नही आदरणीय द्विवेदी जी से इस मामले मे प्रकाश डालने का अनुरोध ज़रूर करूंगा और यदि इस पर रोक लगाने का कोई उपाय हो तो वो भी जानना चाहूंगा।