आपको फ़िल्म दीवार मे शशिकपूर का वो हिट डायलाग तो याद है ना जिस पर अमिताभ खामोश रह जाते हैं,जी हां वही ………………मेरे पास मां है।इस का जवाब ढूंढते-ढूंढते लगभग तीस साल बीत चुके हैं और अब जाकर कंही अमिताभ को शशिकपूर के टक्कर का डायलाग मिला है।भले ही तीस साल लग गये हों मगर फ़िल्म इंडस्ट्री के उस हिट सवाल का जवाब आखिर ढूंढ ही लिया अमिताभ ने।
तेरे पास मां है,तो मेरे पास पा है।
कैसा लगा जवाब बताईयेगा ज़रूर्।
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Thursday, December 17, 2009
Saturday, November 29, 2008
बच्चन साब यू पी चले जाओ,क्योंकि जुर्म वहां कम है
बचपन से जिस हिरो को अकेले जुर्म और जुल्म से लड़ते देखा था,जिस विजय को हमेशा अन्याय पर विजय पाते देखा था,जिस विजय की फ़िल्में स्कूल और कालेज से भाग-भाग कर देखा करते थे,जिस विजय को लाखो-करोडो लोग दिवानो की तरह चाहते हो,उस विजय का अचानक डर जाना अच्छा नही लगा।वो भी ऐसे समय मे जब सारा देश मुम्बई मे आतंकवाद से लड़ रहे जांबाजो की सफ़लता की कामना कर रहे थे,तब बच्चन साब का डर जाना और किले की तरह सुरक्षित अपने बंगले मे तक़िये के नीचे रिवाल्वर लेकर सोना और सारी दुनिया को अपना डर बताना कुछ अच्छा नही लगा।ये समय सही नही था डर के इज़हार का। सारे देश के महानायक को अगर वाकई मे डर लग रहा है तो उन्हे यू पी चले जाना चाहिये,क्योंकि जुर्म वहां कम है।मगर अब तो वहां भी नही जा सकते क्योंकी वहां उन्हे सुरक्षा की गारंटी देने वाले मुलायम की सरकार भी नही है,और उनके गारंटर अमर सिंह का भी कोई सुरक्षित ठिकाना भी नही नज़र आ रहा। अपने हिरो को इस तरह डरते देखना अच्छा नही लगा। हो सकता है मेरी बात उन्हे अपना हिरो मानने वाले कुछ लोगो को बुरी भी लगे मगर मुझे जैसा लगा मैने आपके सामने रखना ज़रुरी समझा।
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