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Wednesday, September 23, 2009
क्यों सिर्फ़ इफ़्तार पार्टी ही दोगे?क्या फ़लाहार पार्टी देने से पाप लगेगा?
एक माइक्रो पोस्ट प्रस्तुत कर रहा हूं जो बहुत से सवाल खडे करती है।शारदेय नवरात्रि शुरू हो गई और मै ये सोच रहा था कि जिस रफ़्तार से रमजान मे इफ़्तार पार्टियां दी गई उसी रफ़्तार से नवरात्रि के उपवासियों को भी फ़लाहार पार्टियां दी जायेंगी।आखिर मैया के भक़्त भी तो कठिन व्रत रखते हैं।मगर मेरा सोचना अभी तक़ गलत ही निकला है।अभी तक़ किसी भी माई के लाल ने मैया के लालों को फ़लाहार के लिए नही बुलाया है।यंहा छत्तीसगढ मे रायपुर और दूर-दूर से एक सौ दस किमी से ज्यादा पैदल चल कर भक़्त डोंगरगढ स्थित मां बम्लेशवरी और रतनपुर स्थित महामाया के दर्शन करते हैं।रमजान के पवित्र माह की तरह यंहा नवरात्रि मे लोग नौ दिन उपवास रखते हैं।इनका भी भक़्ति भाव किसी से कम नही होता,मगर इन्हे कोई क्यों नही बुलाता फ़लाहार के लिये?मेरा सवाल ये है कि क्या इस देश मे हिंदूओं का बहुसंख्यक़ होना पाप है?क्या उन्हे फ़लाहार के लिये पार्टी देने से राजनेताओं को साम्प्रदायिक मान लिया जा सकता है?और अगर उपवसियों को फ़लाहार पार्टी देना गलत है तो रोज़दारो को क्यों इफ़्तार पार्टी दी जाती है? मै न हिंदू समर्थक हूं और ना इस्लाम विरोधी। मेरा तो बस एक ही कहना है कि सारे नियम सब के लिये एक समान होने चाहिये।अगर आप इफ़्तार पार्टी देते हैं तो फ़िर आप फ़लाहार पार्टी भी दिजिये।वर्ना लोग तो सवाल करेंगे ही क्यों सिर्फ़ इफ़्तार पार्टी ही दोगे?क्या फ़लाहार पार्टी देने से पाप लगेगा?
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