एक बहुत छोटी सी पोस्ट समय के बदलते मिजाज़ पर।बात बहुत छोटी सी है मगर इसके मायने बहुत बड़े है।ये इस बात का सबूत भी है कि हमने समय के साथ तरक्की तो बहुत कर ली मगर उसके साथ ही बहुत कुछ पीछे छूटता चला गया है।
सदियों पहले इंसान के पास घड़ी नही थी मगर उसके पास समय भरपूर था और आज लगभग हर इंसान के पास घड़ी है मगर समय्……………?समय शायद किसी के पास नही है।शायद मेरे पास भी नही।जभी तो मैं भी चंद लाईनो मे इस पोस्ट को निपटा रहा हूं।ये बात मुझसे कही मेरे छोटे भाई जैसे भतीजे,यंहा के होटल और प्रापर्टी मार्केट के दिग्गज़ कमलजीत सिंह होरा ने।उम्र बहुत ज्यादा नही मगर अनुभव बहुत ज्यादा जभी तो महसूस कर लिया कि कितना बदल गया है सब कुछ, समय के साथ-साथ।और मुझे तो लगता है कि खुद समय भी बदल गया है शायद!आपको क्या लगता है बताईगा ज़रूर।इस भागती-दौड़ती दुनिया मे सब भागते चले जा रहे मिल भी रहे हैं तो चलते-चलते,किसी के पास समय नही हैं आखिर क्यों?