एक छोटी सी पोस्ट जो बहुत बड़े सवाल खड़े करती है।सुबह-सुबह यानी थोड़ी देर पहले एक एस एम एस मिला।छोटा सा एस एम एस जिसने मुझे सोचने पर मज़बूर कर दिया।मैने पाया कि वो सच्चाई के एकदम करीब है।अजय काळे ने एस एम एस मे कहा था कि अगर आपसे सभी खुश हैं,तो इसका मतलब आपने ज़िंदगी मे बहुत ज्यादा समझौते कियें हैं।
पहले-पहल तो मुझे लगा कि रोज़ का काम ही है एस एम एस भेजना,मगर दोबारा पढने पर लगा कि ये तो ज़िंदगी की बहुत ही कड़ुवी सच्चाई है।मैने गौर किया कि शायद समझौते करता तो हो सकता है बहुत से लोग मेरे दुश्मन नही होते।समझौते करता तो,हो सकता है सभी मुझसे भी खुश रहते।समझौता नही करने का मुझे कोई बहुत ज्यादा दुःख नही है लेकिन कभी-कभी इस बात को लेकर परेशानी ज़रूर महसूस करता हुं कि ज़रा सी बात पर अड़ जाने से कुछ बहुत अच्छे संबंध खराब हो गये।अजय मेरा दोस्त भी है और भाई जैसा ही है,पता नही उसने मुझे ये एस एम एस क्यों किया?वो मेरा मिजाज़ जानता है और लड़ाई-झगड़ो से भी वाकिफ़ है।फ़िर उसने ये सब मुझसे क्यों कहा ये सवाल मुझे परेशान कर रहा है।क्या वो मुझे ये बताना चाहता था कि समझौता नही करने कि वजह से बहुत से लोग मुझसे खुश नही है?या दुश्मन हो गये हैं?या फ़िर वो ये कहना चाहता है कि समझौता करना शुरू कर दो सब खुश रहेंगे?पता नही वो क्या कहना चाहता है,लेकिन मै समझ नही पा रहा हूं कि समझौता करना शुरू कर दुं या चलता रहा अपनी ही एक टांग वाली चाल से,बिना कोई समझौता किये।चाहे कोई खुश रहे या…………………।मै दरअसल थोड़ा क्न्फ़्यूज़्ड हूं इस्लिये आप लोगो से इस बारे मे सलाह मांग रहा हूं।आखिर ये सवाल तो आप लोगो के जीवन मे भी उतना ही महत्व रखता है?और फ़िर जब अपनी बुद्धी साथ न दे तो दूसरो की सलाह पर चलना चाहिये।तो मै इंतज़ार करूंगा आप सब की सलाह का।