Showing posts with label बस्तर नक्सली हमला मौत आंदोलन. Show all posts
Showing posts with label बस्तर नक्सली हमला मौत आंदोलन. Show all posts
Monday, June 3, 2013
बस्तर में हमले के समय कांग्रेस के 4 नेता थे नक्सलियों के सम्पर्क में
बस्तर के नक्सली हमले में कांग्रेस के चार नेता थे नक्सलियों के सम्पर्क में.सारी जानकारियां दे रहे थे,रूट बदलने की भी जानकारी दी गई थी.ये मैं नही कह रहा हूं मीडिया कह रहा है कि एनआईए को प्रारंभिक जांच में ऎसा पता चला है.हे भगवान प्रारंभिक जांच का ये हाल है तो अंतिम रिपोर्ट क्या दिन दिखायेगी?सरकारी सूचनातंत्र कि खामियां गिनाने वाले भाई लोग अब नक्सलियों के इस नये सूचना तंत्र के बारे में कुछ कह पायेंगे या फिर हम बोलेगा तो बोलोगे के बोलता है.
Friday, June 10, 2011
सरकार और नक्सलियों के बीच पिसता पत्रकार!ना इधर जा सकता है और ना उधर!यानी मरना तय है!
छत्तीसगढ में अब पत्रकारों की स्थिति अब दो पाटन के बीच जैसी हो गई है,खासकर नक्सल क्षेत्र में रहने वालों की।एक नई मुसीबत आन खड़ी हुई है पत्रकारों के सामने।नक्सली कहते हैं हमारा वर्शन छापो और पुलिस कहती है उन्हे जगह मत दो।ऐसी स्थिति में पत्रकार बुरी तरह परेशान है।अगर वो नक्सलियों के फ़रमान छापता है तो पुलिस उसे नक्सलियों का हमदर्द मान कर तंग करती है और अगर नही छापता तो नक्सली उसे पुलिस का मुखबिर समझती है।दोनो ही स्थिति उसके लिये अच्छी नही है।सरकार से भी बहुत ज्यादा मदद मिलना संभव नही है क्योंकि पत्रकारों की संख्या भी काफ़ी है।दुविधा में फ़ंसे पत्रकारों मे से जिसने दोनो का पक्ष छाप कर बीच का रास्ता अपनाना चाहा तो उन्हे भी एक तरफ़ ही रहने की चेतावनी मिल गई है।ऐसी स्थिति में पत्रकारिता अब बहुत ही कठीन होती जा रही है। जान जोखिम में डाल कर खबर लिखने वाले पत्रकारों को अब दोनो तरफ़ से खतरा हो गया है।और उनके सामने कोई चारा भी नही है,जान है तो जहान है सोच कर पत्रकारिता छोड़ भी देते है तो रोज़ी-रोटी का संकट भी जान निकालने वाला ही है।कुल मिला कर देखा जाये तो मरना ही पत्रकारो कों चाहे इसके हाथों या फ़िर उसके।
Subscribe to:
Posts (Atom)