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Thursday, August 20, 2015

हो गये ना गुरुजी बर्खास्त,और सुधारो सरकारी स्कूलों की हालत

सरकारी से लडने चले थे.सिस्टम को सुधारने चले थे.नेता/अफसरों के बच्चों को गरीब बच्चों के साथ एक स्कूल में पढने पर मज़बूर करने चले थे.हो गया कलेजा शांत.निकल गई सारी हेकडी़.हो गये बर्खास्त.और सुधारो सरकारी स्कूल की हालत.नेता और अफसर दोनो को एक साथ सुधारने का दंभ वो भी एक मामूली से मास्टर का.भला सरकार कैसे बर्दाश्त करती?अफसर कैसे बर्दाश्त करते?निपटा दिया मच्छर मास्टर को.और बता भी दिया ज़माने को कोई भी सरकार/अफसर गठजोड से पंगा न ले.उनसे टक्कर न ले.उन्हे सुधारने की कोशिश न करे.उनसे बरबरी की कोशिश तो हरगिज़ न करे.यानी सरकार जो करे सही,अफसर जो करे सही,जनता जाये भाड में.