दो दिनो पहले रायपुर रेल्वे स्टेशन मे चल रहे गोरखधंधे का जब खुलासा हुआ तो लगा लालच ने इंसान और शैतान के बीच का फ़र्क़ लगभग खतम कर दिया है।मिनरल वाटर की बिक्री जमकर हो सके इसलिये प्लेटफ़ाएम के सारे वाटरकूलर बंद कर दिये जाते थे।44-45 डिग्री से की भीषण गर्मी मे उबलता पानी छोड यात्री मज़बूर हो कर मिनरल वाटर खरीदने लगे थे। ये गोरखधंधा खूब फ़ल-फ़ूल रहा था मगर बुरा हो दैनिक भास्कर के युवा रिपोर्टर सुदीप त्रिपाठी का जिसने पूरे खेल का भंडाफ़ोड दिया।
काफ़ी दिनो बाद अख़्बारो मे आमजनता के हितों से जुड़ी कोई खबर देखी। हाल के चुनावी मौसम मे विज्ञापनो के आधार पर सिवाय राजनैतिक कूड़ा-करकट के कुछ और नज़र नही आ रहा था अख़बारो मे। ऐसे मे दैनिक भास्कर मे छपी खबर ने ध्यान खींचा।खबर क्या थी भौतिकवाद की गर्त मे डूब रही इंसानियत की जीती-जागती तस्वीर थी।युवा सुदीप त्रिपाठी काफ़ी समय बीमार रहे,नौबत अस्पताल मे भर्ती करने की भी आई और जब वो ठीक होकर वापस काम पर लौटे तो उन्होने लालच मे डूबे लोगो के प्यास के धंधे का खुलासा कर दिया।
सहसा विश्वास नही हुआ कि आदमी इतना भी गिर सकता है।लोग पीने के लिये मिनरल वाटर की बोतल खरीदे इस्लिये प्लेटफ़ार्म के एक नही सभी वाटरकूलरों को योजनाबद्ध ढंग से बंद कर दिया जाता था।ये सिलसिला पता नही कितने दिनो से चल रहा था और कितने दिनो तक़ चलता,अगर सुदीप की नज़र उस पर नही पड़ती।
लोग शायद इसे तकनीकी खराबी मान रहे थे और भीषण गर्मी मे प्यास से व्याकुल यात्री जब प्लेटफ़ार्म आने पर डिब्बो से उतर कर कूलर तक़ पहूंचते तो उबलता-खौलता पानी उनकी बेचैनी और बढा कर उन्हे बोतल मे बंद पानी खरीदने पर मज़बूर कर देता।शायद नही निश्चित ही लालच मे डूबे मे प्यास के इस बेरहम धंदे मे रेलवे के लोग भी शामिल होंगे। अगर ऐसा नही होता तो सुदीप की रिपोर्ट छपने के बाद दूसरे दिन रेल्वे प्रशासन बेशर्मी से सारे वाटरकूलर गलती से बंद रह जाने की बात नही कहता।इतना ही नही सिर्फ़ गलती हो गई कह कर रेल्वे प्रशासन ने इस पूरे मामले को बिना जांच किये ठण्डे बस्ते मे भी डाल दिया जो इस बात का सबूत है कि यदी जांच होती तो शायद कोई न कोई फ़ंसता और रेलवे के चेहरे पर कालिख मल देता।
खैर जो भी हो सुदीप की मेहनत रंग लाई और अब रायपुर रेलवे प्लेटफ़ार्म के सारे के सारे वाटरकूलर चालू हो गये है।यात्रियों को शीतल पेयजल मिल रहा है और अब जिसे बोतलबंद पानी खरीदना है वही खरीद रहा है,मज़बूरी मे कोई नही खरीद रहा है।हो सकता है सुदीप ने रायपुर के जिस गोरखधंदे पर से पर्दा हटाया है वो गंदा धंदा दूसरे स्टेशनो पर भी चल रहा हो।अगर कही कूलर बंद मिले तो समझ लिजिये लालची लोग चंद सिक्कों के लालच मे प्यास तक़ बेच रहे हैं!