साहित्यकार और छत्तीसगढ की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पह्चान बनाने वाले गजानन माधव मुक्तिबोध की पत्नी देवलोक सिधार गईं।वे लम्बे समय से बीमार थी और उनका ये संघर्ष कल रात खत्म हो गया।वे 88 वर्ष की थी और मुक्तिबोध की मृत्यु के बाद उन्होने सारी ज़िम्मेदारी बखुबी निभाई।बच्चों के लालन-पालन से लेकर शिक्षा-दिक्षा किसी मे उन्होने कोई कसर नही छोड़ी थी।मुक्तिबोध के संघर्ष के दिनों मे उन्होने हर पल साथ दिया और इस बात का ज़िक्र आदरणीय परसाई जी,नेमीचंद जैन और अशोक बाजपेई ने अपने संस्मरणों मे किया है।सुबह उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।ईश्वर उनके चारों पुत्रो,जाने माने पत्रकार दिवाकर,रमेश,दिलीप और गिरीश को इस दुःख को सहने की शक्ति दे।उस महान आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि।
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Saturday, July 10, 2010
मुक्तिबोध के संघर्ष के दिनो की साथी नही रहीं
कालजयी
साहित्यकार और छत्तीसगढ की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पह्चान बनाने वाले गजानन माधव मुक्तिबोध की पत्नी देवलोक सिधार गईं।वे लम्बे समय से बीमार थी और उनका ये संघर्ष कल रात खत्म हो गया।वे 88 वर्ष की थी और मुक्तिबोध की मृत्यु के बाद उन्होने सारी ज़िम्मेदारी बखुबी निभाई।बच्चों के लालन-पालन से लेकर शिक्षा-दिक्षा किसी मे उन्होने कोई कसर नही छोड़ी थी।मुक्तिबोध के संघर्ष के दिनों मे उन्होने हर पल साथ दिया और इस बात का ज़िक्र आदरणीय परसाई जी,नेमीचंद जैन और अशोक बाजपेई ने अपने संस्मरणों मे किया है।सुबह उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।ईश्वर उनके चारों पुत्रो,जाने माने पत्रकार दिवाकर,रमेश,दिलीप और गिरीश को इस दुःख को सहने की शक्ति दे।उस महान आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि।
साहित्यकार और छत्तीसगढ की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पह्चान बनाने वाले गजानन माधव मुक्तिबोध की पत्नी देवलोक सिधार गईं।वे लम्बे समय से बीमार थी और उनका ये संघर्ष कल रात खत्म हो गया।वे 88 वर्ष की थी और मुक्तिबोध की मृत्यु के बाद उन्होने सारी ज़िम्मेदारी बखुबी निभाई।बच्चों के लालन-पालन से लेकर शिक्षा-दिक्षा किसी मे उन्होने कोई कसर नही छोड़ी थी।मुक्तिबोध के संघर्ष के दिनों मे उन्होने हर पल साथ दिया और इस बात का ज़िक्र आदरणीय परसाई जी,नेमीचंद जैन और अशोक बाजपेई ने अपने संस्मरणों मे किया है।सुबह उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।ईश्वर उनके चारों पुत्रो,जाने माने पत्रकार दिवाकर,रमेश,दिलीप और गिरीश को इस दुःख को सहने की शक्ति दे।उस महान आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि।
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