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Sunday, February 14, 2010

सर कुछ मरे हैं और थोड़े से घायल हुये हैं!कोई खास बात नही है सर!वैसे हमने खान का एक पोस्टर तक़ नही फ़ाड़ने दिया है!मैं अपनी कुर्सी पक्की समझू न सर!थैं

पुणे बम धमाके के बाद जैसे ही मीडिया ने सुर बदला तो नेताजी सकते मे आ गये।उन्हे लगा कि कंही फ़िर ये धमाका कुर्सी न हिला दे।फ़ोन करने की हिम्मत नही हुई सो उन्होने एक चिट्ठी लिख मारी देश के सबसे बड़े नेता जी और उन्हे नचाने वाली मैम को भी उसी मे सफ़ाई दे दी।ये चिटठी उनके विरोधियों ने देश के सारे चैनलों को लीक की मगर उन्होने इसेन इम्पोर्टेंस नही दिया सो मैं उसे ब्रेक कर रहा हूं एक्स्क्लूसिवली आप लोगों के लिये।

सर जी,आप को पता ही होगा कि थोड़ा गड़बड़ हो गई है।अब इसमे सर पूरा दोष स्टेट का तो नही हैं ना।मरने वालों का फ़िगर डबल मे भी नही है सर और घायलों मे भी कोई बहुत ज्यादा सीरियस नही है।सर ये मीडिया वाले तो पता है ना कैसे तिल का ताड़ बनाते हैं।सर वे इसमे आपको और मैम को भी खींच रहे थे लेकिन मैंने आप लोगों को इससे अलग ही रखने के लिये सब मैनेज कर लिया।

सर जी ये मीड़िया वालों का कुछ करना होगा!पहले तो खान के बहाने मुझे टारगेट कर रहे थे और इस मामले को उन्होने मुम्बई से दिल्ली तक़ फ़ैला दिया था और आप लोगों को लपेट लिया था।सर आप विश्वास किजिये मैम की नाराजगी से बचने के लिये मैंने क्या-क्या नही किया।आप जैसे ठण्डे नेता को गरम बताने के लिये पूरे प्रदेश मे धरपकड़ अभियान चला दिया था।इतना बड़ा अभियान तो सर मैने कुर्सी देने वाले 26/11 धमाके के बाद भी नही चलाया था।

अब देखिये न सर जी।मीड़िया वाले उन्ही से पहले बात कर रहे थे जिन्हे मुम्बई बम धमाकों के बाद वे लोग गैरज़िम्मेदार ठहरा रहे थे।जिनको बम धमाके ने हिला कर मुम्बई से दिल्ली पहुंचा दिया उनसे वे रियेक्शन ले रहे थे।मुझे थोड़ा डाऊट हो रहा है सर जी!उधर कोई गड़बड़ तो नही है ना!मैने तो सर अपने बेटे और फ़िल्मवालों को अभी तक़ दूर ही रखा है।ऊपर से आप लोगों की इच्छा के अनुसार फ़िल्मी खान की सेवा करके पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री को सेट कर लिया है!सर वो पिछ्ले वाले को अपने से पहले टीवी पर देख कर दिल थोड़ा तेजी से धड़क रहा है।

सर जी पिछली बार ऐसे ही एक बम धमाके ने मेरी तक़दीर का छींका फ़ोड़ा था और मैं कंहा से कंहा और वो मुम्बई से दिल्ली पहुंच गया था।अब कंही वो वापस आया तो मैं तो मुम्बई जाने लायक लायल भी नही हूं।सर जी मेरा खयाल रखियेगा मैने तो मैम तो मैम राहुल बाबा की भी सेवा मे कोई कसर नही छोड़ी थी सर!पूरी मुम्बई को छवनी बना दिया था।और तो और सर जी मेरे एक मंत्री ने तो उनकी चप्पले तक़ सीने से चिपका रखी थी!मुझे डाऊट था सर वो भोगी-विलासी कंही राहुल बाबा की चप्पले गायब करके मुझे लापरवाह न साबित कर दे।सर देखिये ना राहुल बाबा सिक्यूरिटी छोड़ कर लोकल मे सफ़र करते रहे उन्हे कुछ हुआ क्या?वे अपनी चप्पले तक़ छोड़ गये मैने उनकी तक़ सुरक्षा मे कोई कसर नही छोड़ी।अब अगर कोई बदमाश धमाका कर दे तो मैं क्या कर सकता हूं सर!सर देखिये ना मैने राहुल बाबा की चप्पलों तक़ की सुरक्षा की कठीन परीक्षा सफ़लता पूर्वक पास की है अब ऐसे मे थोड़ी बहुत तो गड़बड़ हो ही जाती है!

और मुझे तो लगता है सर इसमे आपको बदनाम करने के लिये महंगाई बढाने वालों का भी हाथ हो सकता है।सर जी आप को तो छोटी-छोटी बात याद नही रहती लेकिन मैं आपको याद दिलाता हूं अभी भी गृह मंत्रालय पर उन्ही के लोगों का कब्ज़ा है और वही बुटका कमान संभाल रहा है जिसने पिछ्ली बार आप सब को गलत बयानी करके फ़ंसाने की कोशिश की थी।उसी ने कहा था कि बड़े-बड़े शहरों मे छोटे-छोटे हादसे होते रहते हैं।सर चाहो तो उसे एक बार फ़िर से हटा सकते हैं।अपनी इमेज भी बच जायेगी और वो हकला-टकला भी निपट जायेगा।सर इसी मे उस की जान है।

सर मैंने तो कंही से कोई कमी नही की सर आप लोगों को खुश रखने के लिये।इसी चक्कर मे मैं अपने मराठी मानुसों से भी भीड़ गया।राजनिती का कोई भरोसा नही सर अगर मैं किसी मामले मे निपटा तो ये लोग बहुत खतरनाक है सर,सच मे मुझे वाचमैन के कपड़े पहना कर खानसाब के घर के बाहर खड़ा करके शलाम साब कहने पर मज़बूर कर देंगे।सर जी मैने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था सर जी लेकिन खान लोगों को इतनी जल्दी तो ये सब नही करना था।सर पूछियेगा सर उस साले खान से जिसकी पिच्चर दिखाने के चक्कर मे मैने मुम्बई समेत पूरे महाराष्ट्र को छावनी बना दिया था।उसके पोस्टर तक़ नही फ़टने दिये थे।और उसके बदले मुझे क्या मिला बम धमाका।सर आप लोगो का क्या है बड़े लोग हैं।जब मूड़ हुआ मेरी बलि चढा दोगे।

सर ये खान बहुत एहसान फ़रामोश निकला सर्।मैंने आऊट आफ़ वे सिर्फ़ आप लोगों के चक्कर मे उसकी मदद की और उसने?सर वो तो पाकिस्तान टीम तक़ के लिये रोता है!मैने सुना है कि वो यंहा से ज्यादा बाहर के देशों मे ज्यादा पाप्यूलर है।सर वो उन लोगो से बात करके टाईमिंग तो बदल सकता था।सर चार-पांच महिने बाद होता तो लोग ये फ़िल्म-विल्म का लफ़्ड़ा भूल जाते।ये अपने देश के लोगों की भूलने की आदत ही तो अपुन लोगों को सरकार मे बनाये रखे हैं।अब ये मीड़िया वालों को देखों दिन रात भौंक-भौंक सारी चीख-चीख कर जिस भोगी और विलासी की कुर्सी खिसका कर मुझे बिठाया था,उसी से बात कर रहे हैं,वो भी मुझसे पहले।सर मज़बूरी मे मुझे प्रेस कान्फ़्रेंस लेना पड़ा।ये सब सर उस खान की वजह से है।क्या वो अपने पाकिस्तान के सोर्स से बात करके धमाके का टाईमिंग आगे नही बढा सकता था?ना सही !टाईमिंग आगे ना बढाता तो कम से कम सेंटर ही बदल देता।सर गुजरात मे होता तो अपने को उस दढियल के खिलाफ़ हल्ला मचाने का मौका भी मिल जाता।सर याद है ना दिल्ली मे कैसा हल्ला कर रहा था महंगाई के मामले में।जैसे गरीबों कि चिंता सिर्फ़ उसे है आपको नही।सर देखियेगा सर जी।खयाल रखियेगा!मैं आपकी सेवा करता आया हूं और करता रहूंगा।

आपका चरण सेवक

फ़िल्हाल तो किसी प्रकार के शोक मे नही हूं,
लेकिन आपने हटाया तो शोक ही शोक ही बचेगा।

Wednesday, May 27, 2009

तब विलास राव को सीएम पद से हटाना मीडिया की जीत थी तो अब उन्हे केन्द्र मे मंत्री बनाना क्या है?मीडिया की हार?

महाराष्ट्र के एक्स सीएम विलास राव को केन्द्रीय मंत्री बनाने की घोषणा हो गई है।ये वही विलास राव है जिन्हे मुम्बई कांड के समय फ़िल्मकारो के साथ ताज होटल जाने पर मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था।तब मीडिया ने उन्हे गैरजिम्मेदार ठहराने मे कोई कसर नही छोडी थी और जब तक़ उन्हे सीएम की कुर्सी से उतार नही दिया गया मीडिया शोर मचाता रहा।उन्हे कुर्सी से हटाने को मीडिया ने अपनी जीत करार दे दिया था।अब उन्हे केन्द्र मे मंत्री बनाया जा रहा है और मीडिया खामोश है।क्या ये मीडिया की हार नही है?

आखिर इन कुछ महिनो मे विलासराव ने ऐसा क्या कर दिया जो वे एक गैर ज़िम्मेदार मुख्यमंत्री से ज़िम्मेदार केन्द्रीय मंत्री हो गये हैं।ऐसा उन्होने कुछ नही किया बल्कि उनकी पार्टी ने मीडिया को ये बताने की कोशिश ज़रूर की है लो आपके दोषी को हमने मंत्री बना कर आप लोगो को आपकी औकात बता दी है।

वैसे इस मामले मीडिया का खामोश रहना भी अनेक प्रकार के संदेहों को जन्म देता है।ज़रा सी बात मे फ़ाईल शाटस के भरोसे बडी-बडी टेबल स्टोरी डेवलप करने वाले मीडिया ने लाईब्रेरी की ओर नज़र तक़ नही डाली जो हैरान करने वाली बात है।आंतकवादी हमले के बाद उनके अपने पुत्र रितेश और डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा के साथ ताज होटल के दौरे के फ़ुटेज़ तो हर न्यूज़ चैनल के पास होंगे ही।मगर एक भी चैनल वाले जागरूक लोगो को मुम्बई हमले की याद न आना और विलासराव का अगला पिछला हिसाब नही दिखाना उसकी ओरिजिनल भूमिका पर सवाल खड़े कर देता है।

हैरान कर देने वाली बात है जिस विलास राव को सारे देश के मीडिया ने जिस तरह से निशाने पर लिया था और उन्हे गैर ज़िम्मेदार ठहरा कर कुर्सी से उतार कर दम लिया था उसे देख कर लगा था कि हां देश मे मीडिया अपनी भूमिका सही ढंग से निभा रहा है।मगर अब विलास राव को केंद्र मे मंत्री बनाया जा रहा है तो उसकी खामोशी खलने वाली लग रही है।