होली इस बार भी रंगीन रही।जमकर हंगामा हुआ और जिसके मुंह मे जो आया वो बिना सेंसर हुये निकल कर माहौल को रंगीन करता रहा।गुलाल और फ़ाग की मस्ती के बीच हर साल की तरह नानसेंस टाईम्स का विमोचन भी किया गया।रिश्वत्खोर आईएएस अफ़सर के बहाने प्रदेश की बदहाली को होली के रंगीले अंदाज़ मे पेश किया गया और साथ ही प्रदेश मे पत्रकारों के लिये बीमा और पेंशन की मांग भी की गई।मुख्यमंत्री तो नानाजी देश्मुख की अंत्येष्ठी में शामिल होने दिल्ली जाने की वजह से प्रेस क्लब की
होली मे शामिल नही हो पाये मगर विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक शामिल हुये।प्रदेश के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल,पूर्व विद्याचरण शुक्ल,हरियाणे के कवि और ब्लागर योगेन्द्र मौद्गिल समेत विधायक और अन्य गणमान्य नागरिकों समेत पत्रकार शामिल हुये।खुलकर खेलो और खुलकर बोलो प्रेस क्लब की होली का मूलमंत्र है और बिना किसी परहेज और लागलपेट के प्रेस क्लब मे होली खेली जाती है।हर साल की तरह यंहा अतिथियों का स्वागत टोपी पहना कर और गोभी,ककडी,मिर्च,भींडी और अन्य
सब्ज़ियां देकर किया गया।होली मस्त रही और विधानसभा अध्यक्ष के सामने मैंने प्रदेश का हाल एक आईएएस अफ़सर बाबूलाल अग्रवाल के बहाने बयां कर दिया।बाबूलाल के यंहा हाल ही पड़े छापे में 500 करोड़ रूपये से ज्यादा संपत्ति बरामद हुई थी।मैने कवि प्रदीप के गीत देख तेरे संसार की हालत की तर्ज़ पर कहा,देख तेरे प्रदेश की हालत,
क्या हो गई धरमलाल,
सुकालू न बदला,
डेरहू न बदला,
न बदला रे मेहतरलाल,
कितने सारे हो गये बाबूलाल!
कितने सारे हो गये बाबूलाल!
डेरहू,सुकालू और मेहतरलाल यंहा के गांव के कामन नाम थे जो आजकल सुनने को नही मिलते।
लिखने को बहुत कुछ है मगर बहुत कुछ ऐसा भी है जो चाह कर भी नही लिख सकता,समझ गये ना आप लोग होली है,होली है।।
