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Saturday, March 19, 2011

मैँ शादी करने जा रहा हूँ.

जो कम मैँ सालों से नही कर पाया इस साल वो करने की ख़बर शहर मेँ फैली.सुबह-सुबह मुझे फोन आया और सीधे सवाल किया गया कँहा है बे.मैंने कहा घर पर तो उधार से जवाब आया कि तो न्यूज चैनल मेँ क्या दिखा रहे हैँ कि दिखा रहे हैँ कि तू भाग गया है.क्यों भागूँगा मैँ?मैंने सवाल किया तो उधार से जवाब आया साले न्यूज देख तो पता चल जायेगा.और जब मैंने न्यूज देखी तो मेरा सर चकरा गया.मुझे तब पता चला कि मैँ शादी कर रहा हूँ.आप भी देखिये और उठाईये मज़ा इस होली न्यूज का.

Sunday, February 27, 2011

बारात में बैण्ड वाले धुन बज़ाते है शादी बन गई है उमर कैद की सज़ा,शादी के मण्डप से तू खूद को भगा!कमाल है!

बारात मे अगर बैण्ड बाज़ा ना हो तो फ़िर बारात का मज़ा ही क्या!और जब हो तो जम कर डांस और हंगामा!एक से एक फ़िल्मी धुने।कभी बैण्ड वाले बारात की शान हुआ करते थे और उनकी बज़ाई खास धुनों की फ़रमाईश भी होती थी।यंहा रायपुर के मशहूर सिदीक बैण्ड वाले क्लारनेट पर जब बहारों फ़ूल बरसाओ मेरा मेहबूब आया है बजाते तो घरों मे बैठे लोग समझ जाते थे कि बारात मण्डप तक पंहुच गई है।ये देश है वीर जवानो का अलबेलों का,इस धुन के बजते ही बड़े-बुज़ुर्ग समझ जाते थे दुल्हे की मित्र मण्डली अब जोश(बीयर-शीयर)से लबरेज़ होकर आ गई है।बारात निकलने से लेकर बारात मंडप तक पंहुचने तक़ की धुने चुनी हुई होती थी।                                                और अब!अब तो हैरान हो जाते है जब बैण्ड वाले साथ मे चल रही गाड़ी पर लदे हुये स्पीकर बाक्सेस के दम पर अनाप-शनाप धुन बज़ाते हैं वो भी सिंथेसाईज़र के भरोसे।अभी हाल ही में एक बारात मे गया था और उसमे बैण्ड वाले घुन बज़ा रहे थे ज़ोर का ज़टका हाय ज़ोरो से लगा,शादी बन गई है उमर कैद की सज़ा,मत करना शादी,ये है बरबादी और एक और लाईन इसी गाने की जो है वो और खतरनाक है,शादी के मण्डप से तू खुद को भगा।पूरा का पूरा गाना शादी विरोधी और बैण्ड वाले बज़ा रहे थे उसे शादी में।बताओ है ना कमाल!एक और गाना बड़ी धूमधाम से बज़ रहा है आज कल शीला,शीला की जवानी अब  इससे ज्यादा इस गाने और इसकी धुन की तारीफ़ करने के लिये मेरे पास शब्द ही नही है।                                                                                                                 वैसे मैंने जब इस बात पर आपत्ति की तो साथ मे चल रहे दोस्तों ने कहा अगर अच्छा लग रहा है तो सुनो,बहुत अच्छा लग रहा है तो डांस करो नही तो चलो आगे चल कर पी-पुआकर आयेंगे तब पता ही नही चलेगा क्या बज़ रहा है क्या नही?उनका ये  भी कहना था कि जब बारातियों को और घरातियों को कोई आपत्ति नही तो तुम को उधर ध्यान देन की ज़रूरत नही है?                                                                                                                 मुझे उन लोगों की बाते जमी मगर पूरी बारात में बार-बार बज़ती शादी के मण्डप से तू खुद को भगा,ये धुन मुझे खलती रही।आप भी अगर अबकी बारात जायें तो ध्यान से सुनियेगा इस गाने की धुन को और क्या लगता है मुझे बताईगा ज़रुर्।