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Wednesday, September 21, 2011

गरीबी तो कम नही कर पा रहे हैं,गरीबों की संख्या कम करने चले हैं,ज़रा जीकर दिखाये 32 और 26 रूपये रोज़ में शहर या गांव में?

योजना आयोग की विद्वान और मूर्धन्य टीम का कहना है कि शहर में रहने वाला वो शख्स जो 32 रूपये रोज़ और गांव मे रहने वाला वो शख्स जो छब्बीस रूपये रोज़ खर्च करता है वो गरीब नही हो सकता।मेरा सवाल तो ये है क्या इतने कम रूपये में कोई जी भी सकता है?गरीबों की संख्या कम बताने वाले आंकडो के इन जादुगरो को कम से कम एक साल तक़ उतने ही रूपये मे जीकर अपनी बात को सच साबित करने का मौका दिया जाना चाहिये।ये गरीबी की बजाये गरीब कम करने का खेल-तमाशा अब बंद होना चाहिये।