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Monday, February 9, 2009

के खुदा के बाद्…………अबे पागल समझ रखा है ?खुदा के पहले लिख,खुदा के पहले,

चुन्नू की चिट्ठी पकड़ाने के बाद का किस्सा तो आप सब सुन चुके हैं,अब मुसीबत की जड़ उस चिट्ठी यानी लव लैटर का किस्सा भी सुन लिजिये।चुनाव प्रचार मे सभी क्लास मे जाना हो रहा था और लड़को के लिये स्वर्ग से भी कई गुना इंट्रेस्टिंग गर्ल्स कामन रूम के भी दर्शन दिन मे कई-कई बार हो रहे थे।जो लड़किया देखते ही मुंह बिद्का लेती थी वो भी मज़बूरी मे मुस्कुरा कर कहती थी ठीक है आप ही को वोट देंगे।भले ही मन ही मन हज़ारो लाखों गालिया देकर कह्ती होंगी कमीने कितने शरीफ़ बन रहे हैं,इंकार करेंगे तो यहीं से छेड़खानी शुरू कर देंगे।

हमेशा से सूखाग्रस्त रहे साईंस कालेज के छात्रो पर उस साल शायद भगवान प्रसन्न थे।उस साल ढेरो लड़कियो ने कालेज मे एड्मिशन लिया था।कालेज मे अब बहार नज़र आने लगी थी।सालो से सूखे से पीड़ीत छात्रों को अंखिया तर करने बगल से लगे यूनिवर्सिटी कैम्पस जाना नही पड़ रहा था।माहौल खुशनुमा था और ऐसा मे संभावना काफ़ी बढ गई थी।

तो मैं बात कर रहा था चुन्नू की चिट्ठी की।सारे दोस्त एक साथ निकलते थे प्रचार के लिये।हमने एक दम नया केंडीडेट खड़ा किया था।होस्टल से साईंस कालेज के इतिहास मे पहली बार कोई लड़का अध्यक्ष पद के लिये चुनाव लड़ रहा था।आनंद भल्ला सुस्त और अलाल टाईप का था(आज कल सरकारी विभाग मे भूजल वैज्ञानिक है)।आनंद के प्रचार मे हमारा पूरा ग्रुप पूरी ताक़त से जुटा हुआ था।

एक दिन प्रचार के दौरान ही अचानक चुन्नू उखड़ गया।वो बोला ये प्रचार वचार तो चलता रहेगा मेरा क्या होगा पहले तय हो जाय?सब बोले ये क्या बात है,कोई कुछ नही बोल रहा है और तू लफ़ड़ा कर रहा है?वो अड़ गया था उस दिन।बोला पहले मेरा डिसाईड करो फ़िर आगे की बात होगी?हार कर मैने पूछा कि ये क्या बात है?तू चाहता क्या है?वो बोला गुरुदेव आप तो दूर ही रहो।खुद बजरंगबली के भक्त हो गये हो इसका मतलब ये नही सब लाल लंगोट कस ले?मै भड़का,अबे इसमे बजरंगबली को क्यो घसीट रहा है।वो बोला आज डिसाईड करो मुझे क्या मिलेगा?वरना मै चला दूसरी पार्टी में।अब तक़ सब गरम हो गए थे बोले साले फ़िर लात खाने की तैयारी कर रहा है तू।वो बोला मै डरने वाला नही हूं?

सब समझ गये थे कि घोड़ा अड़ गया है।कालेज के पिछवाड़े बने होस्टल मे सब वापस लौटे,और वहां मैने गुस्से से उससे पूछा ये क्या हरकत है?वो बोला गुरूदेव एक तो मुझसे प्यार से बात होनी चाहिये और?और क्या बे?मैं भड़का।तो फ़िर वो बोला देख यार बल्लू।मै बोला बल्लू,बल्लू क्या कर रहा है सीधे-सीधे बता।वो बोला गुरुदेव आप नही समझोगे?अब तक़ मेरी खोपड़ी खसक गई थी,मैं बोला बताऊ तेरे को।वो फ़िर बोला इसिलिए तो अपन हारते हैं,प्यार से तो बात करते नही हो किसी से।मै उससे बोला मेरा भाई चुन्नू तू ये बता दे कि तू चाहता क्या है?वो बोला पहले सब प्रामिस करो कि मेरा काम करोगे।सब बोले प्रामिस्।वो फ़िर बोला कि कोई बात को पोकेगा(लीक नही करेगा)नही।सब बोले ठीक है।अब बता?तो वो बोला सब को चुनाव जीतने के बाद कोई न कोई पोस्ट मिल जायेगी?सब बोले फ़िर।वो बोला मुझे पोस्ट वोस्ट नही चाहिए।तो।मुझे एक गर्ल फ़्रेंड चाहिए।क्या?मै भड़का,बताता हूं बेटा घर में।वो बोला गुरुदेव प्रामिस कर चुके हो पोकोगे नही।आप को गर्ल फ़्रेंड नही चाहिए मत लो लेकिन दूसरो को मत मना करो।मै बोला गर्ल फ़्रेंड़ क्या दुकान मे मिलती है।वो बोला चुनाव लड़ रहे है,बहुत सी लड़किया नई आई है।उनको अपने बारे मे पता चले इससे से पहले एकाध सेट हो जाए तो क्या बुरा है।कौन सेट करेगा।वो बोला शकील की इमेज अच्छी है दो बार चुनाव हार चुका है।लड़किया उससे बात भी करती है।

अब शकील भड़क गया।वो बोला देख बे चुन्नू मै तेरे लफ़डे मे आने वाला नही।इससे पहले दोनो उलझते मैनें बीच-बचाव किया और बोला आखिर इस माम्ले का हल क्या है।चुन्नू तपाक से बोला गर्ल फ़्रेंड्।मैने उसी से पूछा,तू ही बता किससे दोस्ती करना चाहेगा तू?वो बोला किसी से भी।अबे कोई तो होगी वो बोला कोई भी चलेगी।फ़िर लड़कियों के नाम गिनाने शुरू हुए।वो बोला अपनी कोई च्वाईस नही है,बैगर्स आर नाट द चूसर्स्।जो तैयार हो उससे बात कर लो।जो तैयार हो मतलब?अरे यार गुरुदेव ये प्यार की बात आप नही समझोगे।अब थोड़ा माहौल सुधर गया था।मै बोला चुन्नू ये बता किसी भी लड़की को बोलना तो पड़ेगा ना कि चुन्नू तुम्हे पसंद करता है।वो बोला हां।तो फ़िर किसी भी लड़की को बोल दे बाकी हम लोग देख लेंगे।

चुन्नू बोला गुरुदेव अगर मै बोल सकता तो आप लोगो के पीछे थोड़े ही घूमता।मै बोला अबे बोलना तो पड़ेगा ना।तभी बल्लू(बलबीर) बोला एक काम कर चून्नू तू लैटर लिख कर दे दे।वो खुश हो गया,बोला बात तो तू दिमाग की कर रहा है,मगर मुझे लैटर लिखना नही आता।बल्लू ने फ़ौरन अपनी सेवा देने की पेशकश की।इस पर चुन्नू ने इंकार कर दिया।वो बोला तुम साले ट्रक ड्राईवर टाईप लैटर लिखोगे और मेरी इमेज निपट जायेगी।तो।वो बोला शकील लैटर लिखेगा।शकील बोला मै क्यो लिखूंगा बे।वो बोला सोच ले बेटा उस दिन जो तू बता रहा था मै वो अभी सब को बता दूंगा।शकील इतना सुनते ही फ़ट से तैयार हो गया।वो बोला मैं घर से लिख कर कल ला दूंगा।

चुन्नू बोला कल वल नही अभी लिख्।सबने लिख यार झंझट खतम कर्।शकील बोला किस के नाम लिखूं।चुन्नू बोला नाम छोड़,नाम बाद मे डिसाईद कर लेंगे।तू लैटर लिख लैटर। अब शकील मियां लैटर लिखने लगे।उसने लैटर को रोमेंटिक ट्च देने के लिये एक शेर लिखा।
दिल की महफ़िलो में वो मुकाम है तुम्हारा,
के खुदा के पहले लब पे नाम है तुम्हारा।

शेर सुनते ही पूरी। टीम वाह-वाह करने लगी,मगर चुन्नू खामोश था।सब बोले क्या बे इतना बढिया शेर है तेरे को अच्छा नही लगा क्या?वो बोला इस साले शकील पे मुझे पहले ही डाऊट था।ये चाहता ही नही है कोई लड़की मुझसे पट।शकील बोला भाई इतना बढिया शेर लिख रहा हूं और तू………………उसकी बात बीच मे ही काट कर चुन्नू बोला। अबे उर्दू नही आती तो क्या?थोड़ा बहुत मै भी समझता हूं।क्या लिखा है तुन्रे खुदा के बाद लब पर नाम है तुम्हारा।अब ये बता कौन सी लड़की किसी के बाद नाम लेने से खुश होगी?एकदम ही पैदल समझ लिया है क्या बे?शकील बोला भाई वो तो शेर है यार जैसा शायर ने लिखा।उसकी बात काट कर चुन्नू बोला तू लिख कि खुदा के पहले लब पर नाम है तुम्हारा।शकील बोला अबे शेर मे करेक्शन करवा रहा है।वो बोला जो मै बोल रहा हूं वो फ़ायनल।सब बोले ठीक है कर दे न बे शकील शेर मे करेक्शन।और करेकशन के बाद चुन्नू लैटर घर ले गया ।सुबह तक़ सोच कर उसमे नाम लिखने के लिये।सुबह उसके उठने के पहले अम्माजी ने कमीज धोने के लिये डाली तो उसकी जेब से लैटर निकल आया।कमीज तो बाद मे धुली पहले चुन्नू की धुलाई हो गई।शेर मै भूल गया था शकील को फ़ोन कर के पूछा और ये पोस्ट लिख रहा हूं।कैसा लगा पढ कर बताईगा ज़रूर्।

15 comments:

PD said...

गुरूदेव, कहां हैं आपके चरण?
हम तो अभी अभी कालेज से निकल कर आयें हैं, ये सब हमारे लिये हाल फिलहाल की घटनायें होती थी.. किसी का प्रेम पत्र कोई और लिखे..
पिछली बार फीड पकड़ कर आये थे, इस बार ब्लौगवाणी पकड़ कर आयें हैं.. मेरी तरफ से एक पसंद स्वीकार करें.. :)

राज भाटिय़ा said...

यह लो इतनी रोमांटिक स्टोरी चल रही थी, कि यह एक दम से मार धाड का सीन बीच मे कहा से आगया, बेचारा चुन्नु, एक हमारा कुन्नु भी है इस ब्लंग जगत मै उस के काम भी इस चुन्नु की तरह से ही है,
अब थोडी इस मार पिटाई का सीन, फ़िर बाप के गुस्से का सीन भी इन चुन्नु जी से पुछ कर जरुर लिखे.
धन्यवाद

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

वाह! क्या बात है? बैगर्स आर नॉट दी चूजर्स।

Arvind Mishra said...

तो स्मृति के गलियारे में मन को टहलाया जा रहा है

Udan Tashtari said...

अम्मा जी ने कमीज में लैटर पकड़ लिया..:) क्या क्या याद दिला दिया भाई..

बेहतरीन कथाकारी!!

दिल की महफ़िलो में वो मुकाम है तुम्हारा,
के खुदा के पहले लब पे नाम है तुम्हारा।

वाह!! काश, ये शेर उस वक्त मालूम होता.

ताऊ रामपुरिया said...

लाजवाब...यादें बहुत शुकुन देती हैं..शुभकामनाएं.

रामराम.

Tarun said...

ये साईंस वाला विभाग सभी जगह सूखा ग्रस्त रहता था, हम समझे थे हमारे यहाँ ही ऐसा था ;)

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

पता नहीं किसका है, बस याद आ गया, आपकी दास्ताँ पढ़कर:
खुदा करे के मुहब्बत में वो मुकाम आए,
खुदा का नाम लूँ लैब पे तुम्हारा नाम आए!

seema gupta said...

दिल की महफ़िलो में वो मुकाम है तुम्हारा,
के खुदा के पहले लब पे नाम है तुम्हारा।
" sher mey dam hai..."

Regards

Science Bloggers Association of India said...

अरे वाह, क्‍या बात है।

ऐसी यादों को कोई क्‍योंकर न याद करना चाहे।

परमजीत बाली said...

पुरानी यादों को दोहराना बहुत सुखद लगता है।

कुश said...

वाह-वाह वाह-वाह वाह-वाह वाह-वाह वाह-वाह

हम भी यही कर रहे है..

COMMON MAN said...

लग रहा है कि सारे विद्यार्थी (वो जो विद्या की अर्थी निकालते हैं) एक ही जैसे होते हैं.

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

फिल्म बनाने जोग कथा!

विष्णु बैरागी said...

पढते-पढते लग रहा है, सुन रहा हूं। बिलकुल नानी की कहानी जैसी रसदार कहन।
वाह, वाह। कहते रहिए। चुप मत रहिए।