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Tuesday, June 16, 2009

प्रभू अपन अपना एक चैनल शूरू कर देते है और एक अख़बार भी!

क्यों बे अपने दुश्मनो से निपटने का कोई आईडिया आया तेरे खुराफ़ाती दिमाग मे?आया है महाराज,एकदम धांसू आईडिया आया है।सुनकर आप भी वो लम्बू के लड़के की तरह पांव हिलायेंगे।अबे कुछ बतायेगा भी या…बताता हूं महाराज।अपन अपना खुद का एक न्यूज़ चैनल डाल लेते है और एक अख़बार भी शुरू कर देते हैं।उससे क्या फ़ायदा होगा बे।मैने कहा महाराज चौबीस घण्टे सातो दिन सबसे अलग और सबसे पहले अपन अपने बारे मे ही ठेलेंगे और दुश्मनो को भकाभक पेलेंगे।चल बे,साले मै देवता हूं कोई टटपूंजिया नही।


जिसे मै धांसू आईडिया समझ रहा था उसे भ्रष्टराष्ट्र ने एक झटके मे रिजेक्ट कर दिया।मेरा दिमाग खराब हो गया,मै बोला क्या खराबी है इसमे।इस पर करिया हंसा और बोला इतने सालों से जिस धंदे मे है उसके बारे मे मुझसे पूछ रहा है।मैने कहा ये मनमोहन स्टाईल मे टरकाओ मत्।साफ़ साफ़ बताओ क्या प्राब्लम है।करिया बोला,पहला प्राब्लम तो तू है बे।मै क्यों?क्यों अख़बार और चैनल चालू होंगे तो उनको तू ही देखेगा ना।ये भी कोई पूछने की बात है महाराज।यही तो मै नही चाहता। तेरे अंदर का कीड़ा फ़िर से जाग गया तो मेरे ही चमचो को पेल देगा। अरे नही महाराज।मै तेरे चक्कर मे आने वाला नही बे।तुम पत्रकारो का कोई भरोसा है क्या?ये तो फ़ाल्तू की बात कर रहे हो महाराज्।फ़ाल्तू नही बे,मै तो पूरे मीडिया कि विश्वसनीयता की बात कर रहा हूं।याद है सेलून मे जब तू बाल कटवा रहा था तब बगल की कुर्सी पर बाल कटवा रहे झिंगुर से बच्चे ने क्या कहा था।माल नही मिला होगा तो दिखा रहे है साले।कहा था ना।मैने कहा बाद मे उसने मुझसे माफ़ी भी तो मांगी थी।माफ़ी तो तुम लोगो के कर्फ़्यू मे हाथ-पैर तोड़ने के बाद नेता लोग भी मांग लेते है,लेकिन हाथ पैर तो टूट ही जाते है ना।

मैने कंझा कर कहा कि महाराज ये ईधर-उधर की बाते छोड़ो और बताओ कि मेरे आईडिया मे क्या… मै सच कह रहा हूं बे।तुम लोगो की विश्वसनीयता कम हुई है।अपने चैनल और अख़बार मे चाहे जितना दिखा ले,पब्लिक सयानी हो गई है। बिरयानी के साथ मिनरल वाटर मांगती है।समझा।अबे साऊथ वाली अम्मा का चैनल चीख-चीख कर कहता रहा कि अम्मा की पार्टी जीत रही है।क्या हुआ जीती।सारे एक्ज़िट पोल ली ऐसी की तैसी कर देती है, पब्लिक।एक से एक आंकड़ेबाज,फ़ंडेबाज,लफ़्फ़ाज़ और जाने क्या क्या लोग चिल्लाते है बाज़ार मे ये होगा,वो होगा,क्या होता है।तेरे ही शहर का था ना बे, हर्षद।हां महाराज और उसका छोटा भाई हितेश मेरे साथ ही पढता था।साले एक झटका दिया था उसने आजतक़ उथ्ल-पुथल ज़ारी है।ये चैनल और अख़बार पढ कर लोग बाज़ार मे रूपया तो क्या उनकी सलाह पर घर से छाता लेकर भी नही निकलते बे।तू भी तो लिखता था ना मौसम का हाल्।तो उसमे मेरा क्या दोष है महाराज।जैसा मौसम विभाग वाले बताते थे वैसा लिखता था।अबे वो सब छोड़ कितनी बार पानी गिरा है जब तूने लिखा। छोड़ो ना महाराज,आप भी। अबे सुन छोड़ो छोड़ो क्या कर रहा है।साले तुम लोग लिखते हो बारिश होगी तो धूप निकलती है।मानसून तक़ तुम लोगो के हिसाब से नही आता।जब लिखते हो अच्छी फ़सल होगी तो अकाल पड़ जाता है।जिस पार्टी को तुम लोग सपोर्ट करते हो उसका लाल लाईट जल जाता है।इस चुनाव मे थर्ड फ़्रंट के बाद फ़ोर्थ फ़्रंट भी बना दिया था तुम लोगो ने।क्या हुआ थर्ड फ़्रंट तो ले देकर थर्ड डिवीजन पास भी हो गया और फ़ोर्थ फ़्रंट का तो बाजा बज गया तुम लोगो की पब्लीसिटी से।


महाराज अब आये ना सही लाईन पर अपन अपना चैनल और अख़बार अपनी पब्लिसिटी के लिये चलायेंगे।अबे ज्यादा श्याना मत बन।ऐसे अख़बार रेल्वे स्टेशन,बस स्टैण्ड मे एमरजेंसी मे बच्चों की पोट्टी पोछने के ही काम आते हैं।महाराज।चिल्ला मत बे।मै सरकार और दूसरे भगवानो की तरह बहरा और अंधा नही हूं समझा।महाराज इससे…सुन तू ये आईडिया तो ड्राप ही कर दे।सारी दुनिया मे माऊथ पब्लिसिटी मे अपना नम्बर वन है बे।बिना किसी को अद्धी पौव्वा पिलाये अपने लोगो की खबर फ़्रंट पेज पर छा जाती है।देखा नही था क्या बे किडनी चोर डाक्टर को।साले इतने दिन तो सोनिया गांधी का विदेशी मुल का मुद्दा नही चला था।और टाईटल देखा था किडनी किंग,जैसे कोई राजा महाराजा हो।महाराज आप तो जबरन मामले को तोड़-मरोड़ रहे हो।अबे मै क्या साले तुम लोगो की जात वाला हूं जो ऐसी गंदी हरक़त करूंगा।मै सच कह रहा हूं,सच, शत-प्रतिशत्।इसको किसी चैनल की पंच लाईन मत समझ लेना।

मेरा कहना था महाराज,मैने लास्ट ट्राई मारते हुये थोड़ा टोन चेंज़ किया।क्या कहना है बे तेरा।महाराज आप की चल तो रही है मगर लोग ये तो नही जान्ते ना कि आप ही असली सरकार हो।क्या मतलब बे।मेरा मतलब ये है काम सब आपका कर रहे है मगर नाम दूसरो का हो रहा है ना। अब बताईये जब आप मेरे पास आये थे तब मै भी नही पहचानता था आपको। आपके बारे मे ब्लाग पर लिखा तो सभी लोग आपके बारे मे जानना चाहते थे। अबे चुप साले वो सब स्याने है सब जानते है और शरीफ़ बनने के चक्कर मे अंजान बन रहे है। और सुन ब्लाग जगत के सभी खांटी लोग मेरे फ़ालोअर है।फ़िर भी महाराज आपकी अपनी भी तो पहचान होना चाहिये ना।कल को आप का मोम का पुतला बनाना होगा तो क्या जानी लिवर का फ़ोटो देख कर बनायेंगे।करिया थोड़ा सा सिरियस लगा।मैने लोहा गरम देखकर शोले के ठूठ्वे ठाकुर के डायलाग को याद किया और मार दिया हथौड़ा।मैने कहा न कोई आपकी मूरत है और न कोई सूरत देखा हैं।न कोई मंदिर है और ना ही कोई आश्रम-वाश्रम्।लोकल बाबा लोगो तक़ का फ़ाईव स्टार आश्रम रहता है फ़िर आप तो सुपर-डुपर हिट भगवान हो।ऐसा लगा कि भ्रष्टराष्ह्ट्र रो पड़ेंगे।उन्होने कहा बस मुझे मालूम था तू ही मेरे बारे मे कुछ करेगा।कुछ कर,कुछ सोच्।क्या सोचा और क्या किया इसके लिये आपको भी करना पड़ेगा कल तक़ का इंतज़ार्।

19 comments:

woyaadein said...

ये भी खूब रही......

साभार
हमसफ़र यादों का.......

Udan Tashtari said...

जल्दी बताओ भई क्या किया और क्या सोचा..रुका नहीं जा रहा है.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

जब कोई लगातार मिथ्या प्रचार करेगा अथवा अनर्गल प्रलाप करेगा तो विश्वसनीयता खो देगा।
यही हाल मीडिया और प्रेस का हुआ है।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब तरीके से चल रही है आपकी ये कथा. बहुत ही शान्दरा, वैसे कल ताऊबाबाश्री के आश्रम मे भी आपकी पेशी है.:)

रामराम.

राजकुमार ग्वालानी said...

करिया महाराज ठीक कहते हैं कि अब न तो मीडिया पर कोई विश्वास करता है और न ही कोई उसकी सलाह मानता है। सब जानते हैं कि अखबार में जो छपता है वो कैसे और क्यों छपता है। फिर अखबार और चैनल चालू करने का फार्मूला क्यों कर मानने लगे करिया महाराज।

अजय कुमार झा said...

हाँ भैया बहुत बेरोजगारी chal रही है ..ई चैनलवा में नौकरी मिलेगा....अनिल जी ई आपकी अमीर धरती बहुत देर से खुलती है .....अब हम गरीब लोग का करेंगे....

Science Bloggers Association said...

ताकि वहॉं पर ब्‍लॉग चर्चा हो सके।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अनिल कान्त : said...

waah bahut sahi likh rahein hain aap ye series...majedar...achchha kataaksh kiya ja raha hai :)

अल्पना वर्मा said...

धारदार व्यंग्य!
कभी सोचा है आप ने 'अम्मा 'के चेनल वालों ने पढ़ लिया तो??

वैसे 'खांटी 'का अर्थ क्या है?

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा जनाब,............कोण विशवास करता है मीडिया, पेपर............शायद अपने आप पर भी विशवास नहीं होता आज कल........... लाजवाब लिखा है......... आपकी व्यंगात्मक शैली लाजवाब है

Anil Pusadkar said...

खांटी यानी दिग्गज,धाकड़।

Nitish Raj said...

अनिल जी मजा आगया, बढ़िया लिखा है। बहुत दिन से सोच रहा था कि जॉब चेंज कर ही लूं नौकरी मिलेगी भ्रष्ट्राचार चैनल में। हो सके तो आउटपुट हेड मुझे बना दीजिएगा ऐसा भ्रष्ट्राचार फैलाऊंगा शाइनी को एंकरिंग के लिए साइन करूंगा। पर रिपोर्ट महाराज को नहीं करूंगा, महाराज गाली बहुत देता है। कभी अपने अंदर का जमीर जाग गया तो केला हो जाएगा।
वाह क्या लिखा है----
.....साले तुम लोग लिखते हो बारिश होगी तो धूप निकलती है।मानसून तक़ तुम लोगो के हिसाब से नही आता।जब लिखते हो अच्छी फ़सल होगी तो अकाल पड़ जाता है।जिस पार्टी को तुम लोग सपोर्ट करते हो उसका लाल लाईट जल जाता है।इस चुनाव मे थर्ड फ़्रंट के बाद फ़ोर्थ फ़्रंट भी बना दिया था तुम लोगो ने।क्या हुआ थर्ड फ़्रंट तो ले देकर थर्ड डिवीजन पास भी हो गया और फ़ोर्थ फ़्रंट का तो बाजा बज गया तुम लोगो की पब्लीसिटी से.....।
अटल सत्य है।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सही बात है, गरीब लोग ब्लॉग बनाते हैं.
औ अमीर लोग चैनल-अख़बार चलाते हैं.
फिर, सब अपनी अपनी ढपली बजाते हैं
औ अपना अपना राग ऊंचे से ऊंचे गाते हैं.
:-))

ARVI'nd said...

aaidiya bahut badhiya hai.....lage raho....

indian-sanskriti said...

अब तो प्रतियोगिता रखवा दो महाराज के सवाल को जो सही जवाब देगा उसे इनाम मिलेगा :)

बी एस पाबला said...

कथा बढ़िया चल रही। कभी कभी तो टिप्पणी करना भूल जाते हैं खो कर!

अगली कड़ी की प्रतीक्षा

राज भाटिय़ा said...

करिया बाबा की जय हो, सही चल रहे है, बहुत मजे दार लॆख, अब तो अम्मा भी सुना है हिन्दी पढने ओर बोलने लगी है, उसे यह सत्य कथा बहुत भायेगी.

अनूप शुक्ल said...

अब नारियल फ़ोड़ ही दो भैया!

कार्टूनिस्ट अजय सक्सेना said...

अगली कड़ी का बेसब्री से इन्तजार है