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Monday, September 20, 2010

अग्निवेश! क्या स्वामी होकर झूठ बोलते समय शर्म नही आई?

अग्निवेश! क्या स्वामी होकर झूठ बोलते समय शर्म नही आई?क्या कभी ये नही सोचा था कि झूठ ज्यादा दिनो तक छुपता नही है?क्या ये नही जानते थे कि सच सामने आ ही जाता है?क्या ये नही पता था आपको कि झूठ बोलना पाप है? खैर आप ठहरे महान समाजसेवी? स्वामी? और ना जाने क्या-क्या?खैर आपको क्या फर्क पडता है.आपने तो मस्त दिल्ली मे खुले आम छ्त्तीसगढ के पत्रकारो को बिकाऊ कहकर जिन्हे खुश करना था कर दिया और जमकर सुर्खियाँ भी बटोर ली.अब लडते रहे छत्तीसगढ के पत्रकार अपनी विश्वसनीयता पर उठे सवालो को लेकर.सिलते रहे तार-तार हो चुकी अपनी इज़्ज़त.


वो तो भला हो देशबन्धु पत्र समूह के प्रधान सँपादक ललित सुरजन जी और रमेश नैयर जी का जो खुलकर  सामने आये और दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया.हँस मे छपे स्वामी अग्निवेश के छत्तीसगढ के मीडिया पर बिकाऊ होने के  कथन पर सबसे पहले आपत्ति जताई आदरणीय ललित सुरजन ने.उन्होने एक लेख लिखा और स्वामी अग्निवेश के कथन पर रमेश नैयर से जवाब भी माँग लिया.


दरअसल स्वामी अग्निवेश की दुकान अब लगभग बँद सी पडी है सो उन्होने   छत्तीसगढ की नक्सल समस्या की जमी-जमाई दुकान  पर कब्ज़ा करने की ठानी.और वे छत्तीसगढ आये भी लेकिन छत्तीसगढ के लोग शायद अब ढपोर शँखोँ को पहचान चुके हैँ.सो उन्हे वो रिस्पाँस नही मिला जैसा वे चाह्ते थे.उल्टे उन्हे छत्तीसगढ मे विरोध का सामना भी करना पडा.उसकी खीज़ उन्होने दिल्ली मे मौका मिलते ही  उतार दी.उन्होने हँस के कार्यक्रम मे बोलने का मिलते ही छत्तीसगढ के मीडिया को बिकाऊ कह दिया और अपने इस सफेद झूठ को सच साबित करने के लिए सहारा लिया  छत्तीसगढ के जाने-माने पत्रकार रमेश नैयर  के नाम और साख का.
शायद स्वामी जी ने सोचा भी नही होगा कि उनका झूठ इतनी जल्दी पकडा जायेगा.वो तो भला हो ललित सुरजन जी का जिन्होने उस लेख का विरोध तत्काल अपने अखबार देशबन्धु मे लेख लिख कर किया.उन्होने उस लेख मे रमेश नैयर से स्वामी अग्निवेश से उनकी कथित बातचीत पर सवाल किये थे.उन्होने रमेश नैयर से जवाब माँगा और रमेश नैयर जी ने जवाब दिया भी.उन्होने एक लेख लिखा जिसे ललित जी ने देशबन्धु मे प्र्काशित किया,लेख मे रमेश नैयर जी ने साफ-साफ कहा की उन्होने ऐसी कोई बात नही कही और स्वामी जी को बेनकाब कर दिया.


स्वामी जी का झूठ इतनी ज़ल्दी खुल् जायेगा ये शायद स्वामी जी ने सोचा भी नही था.बहरहाल स्वामी जी के इस मामले ने एक बात तो साबित कर दी है की झूठ ज्यादा दिन चल नही सकता.पता नही वे भगवा कपडॆ क्योँ पहनते हैँ?मुझे तो लगता है स्वामी होने के लिये भगवा कपडे पहनने से ज्यादा ज़रूरी है सच बोलना या झूठ नही बोलना.अब स्वामियोँ की बात स्वामी जाने,हमे तो बस इस बात की खुशी है कि छत्तीसगढ की पत्रकारिता पर बिकाऊ होने का लेबल लगाने की नापाक साजिश फिर नाकाम हुई है.


ललित सुरजन ने इस बारे मे क्या लिखा था पढिये यहां


स्वामी जी के बारे मे रमेश नैयर ने क्या कहा पढिये यहां

23 comments:

डॉ महेश सिन्हा said...

ये असली स्वामी तो हैं नहीं । इनके साथ रहकर चिदम्बरम को भगवा आतंक दिखने लगा ( नक्सलियों का साथी भगवाधारी)

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

खामखाह हर जगह टांग फ़साने की आदत है इन्हे . यह आंतक का मानवीय मुखौटा है

ali said...

चलिये पटाक्षेप हुआ !

महेन्द्र मिश्र said...

यार अनिल जी ये बाबा लोग एसई होते हैं .... इनके दोहरे मुखेटे होते हैं ...

Suresh Chiplunkar said...

भाऊ साहेब, ऐसा कानून नहीं बना है कि कोई स्वामीजी झूठ ना बोले… :) :) :) इसलिये बोल दिया…

Anonymous said...

साधू जी
साधु जी साधुवाद की बात कर साधुओं के जैसे रहो
नहीं सभी कहेंगे साधु है या शैतान

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

यही तो दुर्भाग्य हैं देश के....
सत्ता के लिए .. कुछ भी करेगा....

shikha varshney said...

कौन सी नई बात है ..सब बाबाओं का यही हाल है.

अजित वडनेरकर said...

बढ़िया पोस्ट

PRADEEP KUMAR said...

mai koi patrkarita jagat se nahi hu par....engg graduate hone ke nate jab tak koi chiz ko acche se samajh nahi lu man manta nahi...ANIL Sir ko is post ke liye khoob khoob sadhuwad....comments padh kar dukh hua ki ...kisi ne ek patthar uchal apne taraf to usse bachane wale ko itna dhanywaad aur jara sochiye ...sab baba aise hi hote hai....ye kya hai ye bhi wohi hai jo swami agnivesh ne kiya hai ...Indian media corrupted hai ye batane ki jarurat nahi maine aise kitne hi news ko abnte dekha hai jinka koi astitwa hi nahi hai par paisa sab karwa leta hai ....iska ye matlab nahi ki sabhi media wale corrrupted hai .....last 8 month se meri chair anil sir se 1 ft ki duri par rahi hai (during office hours)aur unki sachhai aur bewaki ka mai kayal hu...isi tarahh agnivesh ke sahare sabhi swamiyo ko kuch bhi kahna shobha nahi deta ....

PRADEEP KUMAR said...

mai koi patrkarita jagat se nahi hu par....engg graduate hone ke nate jab tak koi chiz ko acche se samajh nahi lu man manta nahi...ANIL Sir ko is post ke liye khoob khoob sadhuwad....comments padh kar dukh hua ki ...kisi ne ek patthar uchal apne taraf to usse bachane wale ko itna dhanywaad aur jara sochiye ...sab baba aise hi hote hai....ye kya hai ye bhi wohi hai jo swami agnivesh ne kiya hai ...Indian media corrupted hai ye batane ki jarurat nahi maine aise kitne hi news ko abnte dekha hai jinka koi astitwa hi nahi hai par paisa sab karwa leta hai ....iska ye matlab nahi ki sabhi media wale corrrupted hai .....last 8 month se meri chair anil sir se 1 ft ki duri par rahi hai (during office hours)aur unki sachhai aur bewaki ka mai kayal hu...khoon pasina bhakar patrkarita karne walo ke khilaf jab koi jhootha aarop lagaye hume pasand nahi aaya chahe wo agnivesh(swami kahna mai uchit nahi samjhta) ho yaa koi aur isi tarahh agnivesh ke sahare sabhi swamiyo ko kuch bhi kahna shobha nahi deta ....buddhijivi log apne buddhi ki jagrukta ka parichay de....aarzi humari marzi aapki...jai hind jai 36garh

Arvind Mishra said...

ये छद्मभेषी भी हैं,विवेकानंद के पासंग भर नहीं मगर दिखने की पूरी कोशिश विवेकानंद की रहती है !
क्यों कुछ गलत कह दिया क्या ?
दरअसल मैं इनके विषय में ज्यादा नहीं जनता ,बस इतना ही के ये भी मीडिया के उत्पाद हैं और आज अपनी माँ को ही झूठा करार कर दे रहे हैं !

Ratan Singh Shekhawat said...

भगवा की आड़ में दुकानदारी चलाने वाले काहे के स्वामी !!

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
मराठी कविता के सशक्त हस्ताक्षर कुसुमाग्रज से एक परिचय, राजभाषा हिन्दी पर अरुण राय की प्रस्तुति, पधारें

हेमन्‍त वैष्‍णव said...

******* नाति बबा के गोठ *******

नाति :- बबा वहादे उप्‍पर म बाबा रामदेव के फोटू ए का
बबा :- नोहे रे बाबू बाबा रामदेव के एक ठन आंखी छोटे हे एक बाबा के दूनो आंखी बरोबर हे तभो ले छत्‍तीसगढ़ ल बने नई देख समझ पाय
रीहीस कुछ दिन पहिली ए बाबा छत्‍तीसगढ़ म उतरे रीहीस
नाति :- पांव पर लव का
बबा :- पूरा बात ल सुन रे बाबू जईसे जात धरम के नाम म नेता मन मनखे ल लड़वाथे न
नाति :- हव
बबा :- वईसने ए बाबा ह इहां के लिखईया पढ़र्इया पत्रकार मन ल लड़वाय के उदिम कर दे रीहीस।
नाति :- लउकी के जूस पी के पांव परना ठीक नईये
बबा :- वो त बने होगे इहां के सियान मन सुमत म अपन अपन बात ल रखिस अउ दूध के दूध पानी के पानी करिस ।
नाति :- त ए बाबा के इहां उतरने से क्‍या शिक्षा मिलता है ।
बबा :- ए बाबा के इहां उतरने से ये शिक्षा मिलता है कि दूनो डाहर के बात ल पूरा बात समझे बिना जादा टीका टिप्‍पणी नई करना चाही
अउ दूसर के कहे गोठ बात ल बिना देखे सुने बिसवास नई करना चाही
नाति :- ओ के बबा
मने
हर गरवा पहिनईया गरवा कस सीधा नहीं होता है
मउका पाके बईला बन के सोज्‍जे हुमेल देता है

Ashok Pandey said...

पत्रकारों की कलम से ही ऐसे लोग सुर्खियां बटोरते हैं और खुद को इतना बड़ा समझने लगते हैं कि इन्‍हें पत्रकारिता ही तुच्‍छ नजर आने लगती है। आज राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में दोहरे चरित्रवाले ऐसे ही सुविधाभोगी पाखंडियों की भरमार है।

ये पत्रकार ही हैं कि खुद भूखा रहकर भी दूसरों को रोटी दिलाने के लिए लड़ते हैं। चंदा पर चमकते फिरनेवालों को संघर्ष का यह जीवन जीना पड़े तो नानी याद आ जाए।

Rahul Singh said...

स्थिति स्‍पष्‍ट करने के लिए आपका प्रयास सराहनीय रहा.

महफूज़ अली said...

यही तो दुर्भाग्य हैं देश के....

Shiv said...

मैं धीरू सिंह जी से सहमत हूँ. यह आतंक का मानवीय मुखौटा है.

वन्दे ईश्वरम vande ishwaram said...

वंदे ईश्वरम् ! पत्रिका का नया अंक मंगाने के अपना पता vandeishwaram@gmail.com पर email करें ।

DR. ANWER JAMAL said...

स्वामी जी झूठे नहीं हैं कई पत्रकार ब्लैकमेलिंग करके धन उगाही के चक्कर में "बड़ी हवेली" आये दिन जाते रहते हैं . अलबत्ता उन्हें सभी के लिए ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए थी .

AlbelaKhatri.com said...

बहुत सही और करारा आलेख...........

अच्छा लगा

cmpershad said...

ये तो बेंगलूरू में तोडफोड़ करते गिरफ़्तार भी हो चुके हैं... ऐसे स्वामियों को दूर से नमन :)