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Thursday, March 10, 2011

डिंगडिंग, डिंगडिंग,डिंग,निंज्जा टेक्निक और पैर मे प्लास्टर!

डिंगडिंग, डिंगडिंग,डिंग,निंज्जा टेक्निक और पैर मे प्लास्टर!आप सोच रहे होगे ये क्या होगा?कल तक़ तो ठीक ही था।अचानक निन्जा टेक्निक और डिंगडिंग डिंगडिंग डिंग ये माजरा क्या है?वैसे तो सभी के घरो में ये बचकाना संगीत घूम मचाता ही होगा।अधिकांश घरों मे बच्चे डिंग डिंग डिंग करते नज़र आते होंगे और निन्जा टेक्निक भी दिखाते होंगे।मेरे घर में भी ये डिंग डिंग म्यूज़िक एल्बम की धूम मची हुई है और निन्जा टेक्निक!उफ़!उसने तो तहलका मचाया हुआ है।इस टेक्निक मे मास्टरी हासिल कर चूके मेरे भतीजे ओम को इसी टेक्निक के कारण आये दिन अपनी आई से डांट खानी पड़ती थी मगर वो भी है अपनी धुन का पक्का,अपने पापा,काका और बाबा यानी मुझ पर गया है।लाख मना करने के बावज़ूद वो निन्जा टेकनिक का सीढियों से उतरते समय और दौड़ते समय डेमो देत ही था।इ
सी डेमो के दौरान उसके टखने में ज़बरदस्त मोच आ गई और खून वंहा ज़ोड़ मे जम गया।दर्द से बेहाल ओम का बुरा हाल था।अस्पताल जाने के नाम पर वैसे भी उसकी हवा निकल जाती है सो ये काम मैने अपने ज़िम्मे लिया और अपने दोस्त डा अजय सक्सेना के अनुज डा पूर्णेंदू सक्सेना के अस्पताल ले गया।वंहा उसे प्लास्टर चढाया ग़या और तब से लेकर अब तक़ वो सिवाय प्लास्टर काटने के और कोई बात ही नही कर रहा है।वैसे उससे निन्जा टेक्निक के बारे मे पूछो तो फ़िल्हाल सिर्फ़ मुस्कुराता है और डिंगडिंग,डिंग़डिंग,डिंग तो बिल्कुल बंद है।प्लास्टर चढाकर जब भतीजे को लेकर मैं वंही अस्पताल  के बाजू प्रेस क्लब पंहुचा तो फ़ोटोग्राफ़रो ने कार ए उतरते ही हम दोनो की तस्वीर कैमरे में कैद कर ली।दर्द से बेहाल ओम ने वंहा भी अपना दिमाग दौडाया और मुझ्से सवाल किया कि ये कैसा प्रेस क्लब है यंहा तो कोई भी कपड़े प्रेस नही कर रहा है?अब इस सवाल का जवाब तो मेरे पास नही है,आप लोगों के पास हो तो बताईयेगा ज़रुर्।

9 comments:

दीपक 'मशाल' said...

ohhhh, I wish ki jaldi plastar utre bachche ka..

नीरज जाट जी said...

अच्छा, पहले टांग टूटी, अब प्लस्तर भी टूटेगा।
घबराने की कोई बात नहीं है, सब ठीक हो जायेगा।

अनूप शुक्ल said...

ये कैसा प्रेस क्लब है यंहा तो कोई भी कपड़े प्रेस नही कर रहा है?
सवाल तो मौजूं है।

बच्चा जल्दी से फ़िर डेमो करने लायक हो जाये। :)

प्रवीण पाण्डेय said...

अपने बच्चों को यह पढ़वा देते हैं, आभार।

DABBU MISHRA said...

यदि ये ना हो तो लोगों को अपना बचपना कैसे याद रहेगा ... हाहाहाहा इस ब्लॉग को संभाग कर रखियेगा और 10 साल बाद भतीजे को गिफ्ट में दिजियेगा ... उस समय भतीजे के लिये इससे बडा गिफ्ट दुकरा कोई हो ही नही सकता ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

सही कहा जैसे मच्छरदानी में आदमी क्यों...

बी एस पाबला said...

भतीजे को बताईएगा
कि
पहले तो (बंदे की) धुलाई वुलाई की जाती है
फिर सब जने मिल कर प्रेस (वार्ता) करते हैं
और फिर वह हम (प्रेस) क्लब वालों को हमेशा हमेशा याद रखता है

Udan Tashtari said...

अच्छा हुआ पता चल गया...हम तो खुद भी प्रेस करवाने आने वाले थे बैग लेकर. :)

शरद कोकास said...

कोई भरोसा नही कल वह एक नया डांस करता मिले " निंजा डिंग डिंग विद प्लास्टर "