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Wednesday, July 25, 2012

गलती किसकी?बच्चे की?बाईक की?लाड-प्यार की?ज़िद की?भगवान की?तकदीर की?देखादेखी की?फैशन की?या फिर मां-बाप की?

गलती किसकी?बच्चे की?बाईक की?लाड-प्यार की?ज़िद की?भगवान की?तकदीर की?देखादेखी की?फैशन की?या फिर मां-बाप की?
ये सवाल अटपटा जरुर है मगर है बेहद जरुरी.खासकर उन परिजनो के लिये जिनके बच्चे बाईक चलाने की ज़िद करते है,उम्र ना होने पर भी,और जिनकी ज़िद पुरी हो जाती है,मां बाप के लाड प्यार के कारण.ऎसी ही ज़िद यंहा मामा मामी के घर रह कर पढने आये स्कूली छात्र अपूर्व ने.कक्षा 12 का छात्र था वो.अंबिकापुर का रहने वाला था उसे मां बाप ने बडी उम्मीद से अच्छी पढाई के लिये राजधानी भेजा था.वो ज़िद कर रहा था बाईक की और उसके पिता ने 15 दिन पहले 1 लाख 60 हज़ार रूपये मूल्य की शानदार बाईक खरीद के दी थी.पिता को क्या मालूम था ये उनका बच्चे को खुश करने के लिये दिया जाने वाला उपहार खुद उन्हे ज़िंदगी का भर का गम दे जायेगा.अभी पिछ्ले दिनो एक शाम अपूर्व बाइक पर सवार होकर निकला तो सही पर कभी न वापस आने के लिये.उसने सुरक्षा के लिये हेल्मेट भी नही पहन रखा था और उपर से ईयर फोन लगा कर बाईक चला रहा था.अचानक एक और बाईक से वो जा टकराया और सिर पर चोट आने के कारण असमय ही काल के गाल में समा गया.पिछे छोड गया वो बाईक और टूटे फुटे सपने जो उसे लेकर उसके मां बाप ने बुने थे.अब बताईये भला रोते बिलखते परिजनो की क्या गलती है?गलती किसकी है मेरी तो समझ से परे है.शायद इसिलिए मैने ये सवाल यंहा खडा किया है.आखिर बच्चे की हर ज़िद जो जायज ना हो पूरी करना जरूरी तो नही?आखिर उमर होने से पहले बाईक चलाना कोई बहादुरी तो नही?कभी कभी दिल कडा करके बच्चे को मना करना उसके पल दो पल के रोने धोने का कारण हो सकता है पर शायद वो ज़िंदगी भर के रोने धोने से ज्यादा बेहतर रहेगा.मेरे खयाल से बच्चो को उनकी उमर और सेहत के हिसाब से गाडियां देनी चाहिये,ना कि उनकी इच्छा और फैशन के मुताबिक.और सबसे बडी बात तो ये है कि यदि जरूरी ना हो तो उन्हे बाईक देनी ही नही चाहिये.अब इसके बाद भी ममता हिलोरे मारे,लाड प्यार उफान मारे तो क्या किया जा सकता है.आखिर मऱज़ी है आपकी क्योंकी बच्चा भी है आपका.

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

काश दिल कड़ा कर के मना कर दिया होता।

शोभा said...

ऐसी ही घटना है पुरानी है पर अभी भी सामयिक है. मेरे पति को एक bike वाले ने टक्कर मारी और गिर गया. मेरे पति बेहोश हो गए तो ये सोच कर वो bike उठा कर भागा. पर पैरो की हड्डी टूटने से वो थोड़े ही आगे जा कर फिर गिर गया परिणाम, पैर काटना पड़ा. बाद में पता चला कि वो लड़का एक primary teacher का बेटा है जिसने बहुत जिद करके ये bike खरीदवाई थी.

आशा जोगळेकर said...

दुखद ।