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Friday, August 28, 2015

वो आईएसआईएस के झण्डे दिखा रहे है और हम ...........

वो आईएसआईएस के झण्डे दिखा रहे है और हम देख रहे है और टीवी वाले उसे सारे देश को दिखा रहे है.ये बेबसी और मज़बूरी हमारी और वो बेशर्मी और गद्दारी उनकी.आखिर कब तक वे हमारी छाती पर झण्डे गाडते रहेंगे.वे गोलियां चला रहे है,मोर्टार से गोले दाग रहे हैं,और हम कबाड चुन रहे हैं.वे ज़ख्म दे रहे है और हम मरहम लगाये जा रहे हैं.वे उंगली कर रहे है और हम है कि बर्दाश्त किये जा रहे हैं.आखिर कब तक चलेगा ये सांप छूछूंदर का खेल.कब तक सहेंगे हम.कब तक मुआवज़े के मरहम से ज़ख्मो तो कुरेदते रहेंगे हम.कब तक रटे रटाये जवाबों से खुद का दिल बहलाते रहेंगे हम.हर मर्ज़ का इलाज होता है कुत्ते की टेढी दुम का भी होगा.सीधी नहो तो बिन दुम के भी देखें है हमने.एक बार और कुत्ते की दम का आपरेशन हो जाना चाहिये.ये रोज़ रोज़ की किटकिट,रोज़ रोज़ की चिक चिक से सब तंग आ गये है.आखिर और कब तक सहेंगे,पाक के पाप का नापाक घडा भरा ही नही ओव्हर फ्लो हो चला है.एक बार चोट जरुरी है.