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Friday, June 5, 2009

लगाओ पौधे,काटो पेड़,वाह रे सरकार,तेरा पर्यावरण का खेल

एक माईक्रो पोस्ट पेश है। आल विश्व भर मे पर्यावरण पर लिखा-बोला-सोचा जा रहा है।यंहा छत्तीसगढ मे भी इसे औपचारिक रूप से लाखों पौधे लगा कर मनाया जा रहा है।मेरा सवाल ये है कि हर साल लगाये जाने वाले पौधे हैं कहां? और फ़िर ये कहां की अकलमंदी है कि बाप-दादाओं द्वारा लगाये गये पेड़ काटो और बेटे पोते-नातियों के लिये पौधे लगायो!क्या पौधे लगाने से ज्यादा ज़रूरी नही पेड़ो को कटने से बचाना?सारी दुनिया मे आज दिन भर रटे-रटाये भाषण होंगे,विचार-गोष्ठियां,होंगी,लोग शपथ लेंगे और शाम को आसमान पर नज़र ड़ालेंगे तो अड़ोस-पड़ोस के कारखाने काला धुआं उगल कर सूरज को निगलने को आतुर नज़र आयेंगे,ठीक वैसे ही जैसा मैने कल की पोस्ट मे लिखा था।