दोपहर प्रेस क्लब पहुंचा तो वंहा सूखी होली खेलो,जल बचाओ अभियान पर गर्मागर्म बहस चल रही थी।मेरी पोस्ट के अलावा एक और अख़बार मे सूखी होली के खिलाफ़ छपी रिपोर्ट भी चर्चा मे थी।मैने वंहा पहुंचते ही अपने प्रिय साथी से पूछा तेरा क्या होगा बे शिशुपाल?सूखी होली मे बिना पानी कैसे होली मनायेगा?इतना सुनते ही बाकी लोग बोले भैया इस साल प्रेस क्लब मे भी सूखी होली की घोषणा कर दो।
इस प्रस्ताव के सामने आते ही शिशुपाल के साथ-साथ दुर्योधन और दुश्शासन भी एकदम से उखड़ गये।तीनो एक सुर मे चिल्लाये कोई सूखी-वूखी नही,होली तो जैसे मनती थी वैसे ही मनेगी।मैने शिशुपाल से कहा,भाई तेरा अखबार ही तो अभियान चला रहा है कि पानी बचाओ।मेरे इतना कहते ही सारे बोले सही है भैया,पानी तो बचाना होगा!शिशुपाल की तिकड़ी जमकर भड़की और बोली पानी बचाने का मतलब हम भी समझते है।ये वो पानी बचाना है,वो पानी नही?
सब का हंसते-हंसते बुरा हाल हो रहा था।ये पानी नही,वो पानी?मै बोला ये क्या बक़ रहा है बे।पानी-पानी मे भी कोई फ़र्क़ होता है क्या?अबकी दुर्योधन बोला क्या इसिलिये जिताये थे आपको?मै बोला मतलब क्या है तेरा?वो बोला भैया इस बार तो होली मे ज्यादा चलनी चाहिये,और आप उल्टी बात कर रहे हो।मैने कहा क्या उल्टी बात।तीनो एक साथ बोले हम समझ रहे है आपका पानी बचाने से मतलब्।मै बोला क्या मतलब है तुम्ही लोग बतला दो। अबकी दुर्योधन यानी प्रभुदीन बोला,पानी बचाना यनी बिना पानी मिलाये दारू पीना।
उसके इतना कहते ही ज़ोर का ठहाका गूंजा,और मैने कहा बाकी तो बिना पानी के भी नीट मार लेंगे तेरा क्या होगा?इतना सुनते ही वो बोला गुरूजी तबियत खराब रहती है इसिलिये तो इतनी बात किया,वर्ना मै भी नीट नही मार लेता। अबकी मै भड़का! साले तबियत खराब है,इस्लिये रिक़्वेस्ट कर रहा है,वर्ना नीट मार लेता।इसी हरक़त के कारण तो तबियत खराब होती है?वो तत्काल बोला आप लोगो और डाक्टर की साजिश मै समझ गया हूं।मैने आपके डाक्टर की रिपोर्ट दूसरे डाक्टर को दिखा कर पता लगा लिया,मेरा प्रोब्लम लिवर का नही पथरी का है।मै बोला साले डाक्टर बदल सकता है,दारू नही छोड़ सकता।वो बोला छोड़ दूंगा गुरूजी लेकिन होली के दिन तो छूट मिलनी चाहिये।साल भर तो आप हम लोगो को बक़ते हो एक दिन तो हम को बक़ने के लिये मिलता है,उस दिन भी बिना पिये बकेंगे तो मज़ा नही आयेगा।
मैने सब लोगों से पूछा क्या बोलती है पंचायत?सबने कहा गुरूदेव जिसको जो अभियान चलाना है चलाये।प्रेस क्लब मे होली जैसे धूम्धाम से मनाई जाती थी,वैसे ही मनाई जानी चाहिये।मैने कहा ठीक है,इस बार भी भंग की तरंग के साथ-साथ दारू का करंट भी चलेगा।मेरी इस घोषणा के होते ही शिशुपाल एण्ड कंपनी ने फ़र्माईश कर दी की दारू डबल आनी चाहिये और नये लडको को जिनको मेम्बर्शीप नही मिली है,उनको भी परमीट किया जाना चाहिये।सारी बातो पर मैने सहमती जताते हुए कहा होली,प्रेस क्लब मे सूखी नही गीली ही रहेगी
होलियाना हुड़दंग के साथ-साथ मेरी पोस्टो की डबल सेंचुरी पूरी।इस दौरान आप सभी लोगो से भरपूर प्यार मिला,उसी प्यार के लगातार ज़ारी रहने की उम्मीद के साथ ब्लोग परिवार का सदस्य होने का गर्व मुझे सदा रहेगा।इस नई दुनिया मे जब आया तो अटपटा सा लगा था,मगर अब ऐसा लगता है इससे अच्छा संसार और कोई हो ही नही सकता। आप सभी के प्रेम,स्नेह आशीर्वाद और सहयोग की कामना के साथ,आप सभी को अभी से होली की बधाई।