कल भी सुबह-सुबह दोनो भाईयों को एक एक करके अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते देखा था।ये ड्यूटी उन लोगो की नही है मगर मैने सोचा शायद पेरेण्ट्स मीट वैगेरह कुछ हो सकता है मगर आज फ़िर दोनो को जाते देखा तो अरहर की दाल उडद की दाल नज़र आई।इससे पहले मुझे डाऊट का कीड़ा परेशान करता दोनो के कमरे से आवाज़ बाहर आने लगी।ऐसा कभी होता नही था।फ़िर मैने सोचा की आई के ठाणे प्रवास पर होने के कारण घर मे आज़ादी का जश्न मनाया जा रहा हो।थोडी देर बाद किचन से भी खड-खड,खुड-खुड की आवाज़े तेज़ होने लगी।
तब तक़ चाय का इंतज़ार करते-करते थक़ चुका एक भाई उठा और थोडी देर बाद सबके लिये चाय लेकर आया।मैने उससे पुछा कुछ गड़बड़ है क्या?वो बोला जानो दो भैया आपको समझ नही आयेगा।मेरा दिमाग सरक गया।जिसे देखो वही कह देता है जाने दो भैया आपकी समझ मे नही आयेगा,आपके काम की चीज़ नही है।मैने उससे कड़क कर कहा कि क्या तुम लोग ही समझदार हो?अरे भैया आप बेमतलब नाराज़ हो रहे हैं,घरेलू प्राब्लम है?तो ?क्या मैं जंगल मे रहता हूं?घर से मेरा कोई लेना-देना नही है?
आप भी ना भैया बस्।क्या बस?अरे दोनो काम कर रही हैं इस्लिये चाय बनाने मे टाईम लगता सो मै खुद बना कर ले आया।मै तो अक्सर चाय बनाता हूं।आप तो जानते ही है खाना बनाने का भी शौक है मुझे।मुझे क्या तुम लोग मूर्ख समझते हो।अरे यार तू समझा। मामला छोटे पर टाल कर मंझला चाय पीने मे व्यस्त हो गया। अब छोटे ने अपना नम्बर आते देखा तो सीधे मुद्दे की बात पर आ गया।वो बोला आप घर पर ज्यादा समय रहते नही हो इसलिये………………मैने बात को काटते हुये कहा लम्बा मत खींच, समझे।बता तो रहा हूं।अपने यंहा की दोनो कामवालियां काम पर नही आ रही …तो?मैने बात कर कहा!उसने कहा यही तो मुसीबत की जड़ है।आई है नही सुबह झाड़ू पोछा से लकर रात के बरतन दोनो को साफ़ करना पड़ रहा है।फ़िर गणपति भी बैठे हैं।उनके लिये नैवेद्य भी बनाना पड़ रहा है और उसीके साथ सब्की चाय और नाश्ता,उसीके साथ -साथ बच्चों को तैयार करके स्कूल छोडना………मैने फ़िर उसे टोका,तो?क्या दुसरो के घर मे ये सब नही होता।वो बोला होता है लेकिन सब काम की टाईमिंग एक हो जाने के कारण गड़बड़ हो गई है।
मैने कहा तो इसमे चीड़-चीड़ करने की क्या बात है।वो बोला शादी कर लो फ़िर सब समझ मे आ जायेगा।मै बोला अब तू सीखायेगा?वो बोला सिखा नही रहा भैया,आप समझना ही नही चाह रहे हैं।काम करने की वजह से नही चीडचीडा रही है दोनो,सब काम सुबह एक साथ करना पर रहा है इसलिये टाईम मैनेजमेण्ट का प्राब्लम आ रहा है।बच्चो को ही देखो हम लोग छोड़ने जा रहे हैं।उनका रिक्शेवाला भी त्योहार मना रहा है।मैने उससे कहा कि तू तो ऐसे बता रहा कि सिर्फ़ अपने ही घर मे काम है?वो बोला सभी घरों मे ये हालत है आपसे इस टापिक कोई बात नही करता होगा इसलिये आपको पता नही ।मै बोला क्यों बात नही करेगा कोई?शादी कर लो फ़िर सब बात्…………मै बोला चल निकल तू।
वो शायद इसी डायलाग का इंतज़ार कर रहा था।पलक झपकते ही वो वंहा से खिसक लिया।दोनो बहयें तब तक़ दोनो भाईयों को सुना रही थी एक तो आई घर पर नही है ऊपर से काम वालियां पता नही कंहा मर गई है और आप लोगों को भी पूछने की फ़ुर्सत नही की किसी काम मे हाथ बटा दूं।मैने इस घरेलू समस्या के सर्वव्यापक होने की पुष्टि करने केलिये फ़ोन खड़खड़ाना शुरू किया।एक के बाद एक सभी ने कहा हमारे घर मे भी यही हाल है।सबका कहना वही था जो मेरे भाईयों ने कहा ,हे भगवान सबको छुट्टी देना मगर घर की कामवालियों को नही।