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Friday, August 28, 2015
वो आईएसआईएस के झण्डे दिखा रहे है और हम ...........
वो आईएसआईएस के झण्डे दिखा रहे है और हम देख रहे है और टीवी वाले उसे सारे देश को दिखा रहे है.ये बेबसी और मज़बूरी हमारी और वो बेशर्मी और गद्दारी उनकी.आखिर कब तक वे हमारी छाती पर झण्डे गाडते रहेंगे.वे गोलियां चला रहे है,मोर्टार से गोले दाग रहे हैं,और हम कबाड चुन रहे हैं.वे ज़ख्म दे रहे है और हम मरहम लगाये जा रहे हैं.वे उंगली कर रहे है और हम है कि बर्दाश्त किये जा रहे हैं.आखिर कब तक चलेगा ये सांप छूछूंदर का खेल.कब तक सहेंगे हम.कब तक मुआवज़े के मरहम से ज़ख्मो तो कुरेदते रहेंगे हम.कब तक रटे रटाये जवाबों से खुद का दिल बहलाते रहेंगे हम.हर मर्ज़ का इलाज होता है कुत्ते की टेढी दुम का भी होगा.सीधी नहो तो बिन दुम के भी देखें है हमने.एक बार और कुत्ते की दम का आपरेशन हो जाना चाहिये.ये रोज़ रोज़ की किटकिट,रोज़ रोज़ की चिक चिक से सब तंग आ गये है.आखिर और कब तक सहेंगे,पाक के पाप का नापाक घडा भरा ही नही ओव्हर फ्लो हो चला है.एक बार चोट जरुरी है.
Friday, August 21, 2015
हुर्रियत से सरकारे बात करे तो गलत और टीवी वाले करें तो......?
हुर्रियत को पाक ने बातचीत का न्योता क्या दिया सारे टीवी चैनलों में हंगामा मच गया.देश में और कंही इतनी चर्चा नही हुई जितनी टीवी पर हो रही है.हुर्रियत को सरकार क्यों नही रोक रही है?रोक रही है तो ऎसे में बातचीत कैसे होगी?हुर्रियत से सरकार को बात नही होनी चाहिये?हुर्रियत के बुलावा पर कोई इंची टेप निकाल लाया और लग गया प्रधानमंत्री का सीना नापने तो कोई पुराने गडे मुर्दे उखाड लाया तो कोई इस मसले पर चर्चा के लिये पाकिस्तान से बात करने वाला ढूंढ लाया.जिस हुर्रियत को टीवी वाले खुद कह रहे है कि उनकी दुकान बंद हो गई है,उनको खुद ही बुला कर टीवी पर दिखा रहे है.हुर्रियत से किसी को बात नही करनी चाहिये पर टीवी वाले कर सकते.बात ऎसे कर रहे है कि वे ही फैसला ले लेंगे पाकिस्तान समस्या पर.वैसे ही पाकिस्तान के लोग बात करते है जैसे वे पाक सरकार के अधिकृ्त प्रवक्ता हो.समझ में नही आता जिस हुर्रियत से पाक के बातचीत के न्योते पर बवाल हो रहा है उसी हुर्रियत के नेताओ से टीवी वाले बात कर रहे हैं.यानी सरकारे बात करे तो गलत और टीवी वाले करे तो सही.हैरान कर देने वाला रवैया है.ऎसा लगता है कि विदेश नीति भी यही तय करेंगे.सरकार को चाहिये कि इन्ही लोगों को सौंप देना चाहिये ज़िम्मेदारी.वैसे भी जिस तरीके से बात करते है उससे तो लगता है कि उनसे ज्यादा कोई और जानता ही नही.धन्य हो टीवी वाले देश के नये ठेकेदारों की.
Thursday, December 18, 2014
आखिर धर्मनिरपेक्षता के नाम पर तमाशा कब तक़?
पाकिस्तान में मुम्बई हमले के आरोपी को जमानत मिल गई.शायद ऎसे ही कडे कदम उठायेगा पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ.हम उसके लिये रोते रहेंगे और वो हमें रुलाने वालों का पालता/पोसता रहेगा.कुत्ते की दुम है सुधर ही नही सकता,ये तो हमारे यंहा के कथित धर्मनिर्पेक्ष और छद्म मानवतावादी है जो जबरन उसके लिये रोते है.और तो और उसके यंहा से हम धमकी मिल रही है और हम है कि मोमबत्तियां ही जला रहे है और वो है कि हमारा चमन जलाने पे तुला है,झुठी तारीफ के लिये ये धर्मनिरपेक्षता के तमाशे कब तक चलेंगे?
Saturday, May 18, 2013
धन्य है पाकिस्तान और उसकी मानवीयता!
अपने बँटवारे वाले भाई पाकिस्तान की भलमनसाहत देखिये.आहाहअहाहा दिल जीत लिया.भाई हो तो ऎसा,पडोसी हो तो ऎसा.तक़दीर वालो को नसीब होते है ऎसे भाई या पडोसी.वो मानवीयता की बात भी करने लगा है और कमाल देखिये कि उसने मानवीयता के आधार पर भूल से सीमा पार कर गये उन 51 भारतीय मछुआरो को रिहा करने का फैसला किया है जो अपनी सज़ा कैद में पूरी कर चुके है.है ना कमाल की मानवीयता.अरे भाई मेरे सज़ा पूरी होने के बाद भी उनको नही छोडकर कौन सी मानवीयता दिखाई थी?और अब सज़ा काट चुके लोगो को छोडकर कौन सी मानवीयता दिखा रहे हो?और उसके बदले में जिनकी सज़ा भी पूरी नही हुई है उन्हे रिहा करने की डिमाण्ड करके कौन सी मानवीयता का सबूत दे रहे हो?धन्य भाग्य हमारे जो हमसे बंटवारा लेकर अलग होने वाला हमारा भाई,हमारा पडोसी है और इउसके अंदर मानवीयता इतनी कूट कूट कर भरी हुई है.उससे कुछ नही तो कम से कम मानवीयता तो सीखना ही चाहिये हमारे देश के ठेकेदारो को.जय हो ऎसी मानवीयता की.
Wednesday, September 9, 2009
पाक का झंडा फ़हराते न दिखाना हो तो मत दिखाओ,मगर पाक मे छपे लाखो रूपये के नकली पकड़ाने की खबर तो दिखाओ देश के असली ठेकेदारों
कोल्हापुर के मिरज़ मे पाकिस्तान का झंड़ा फ़हराने की खबरो को मीड़िया ने दबा दिया।कोई बात नही हो सकता है कि इससे उनके हिसाब से तनाव फ़ैल जाता मगर छत्तीसगढ मे पाक मे छपे दो लाख के नकली नोट पकडाने की खबर किस लिये नही दिखाई जा रही है समझ के परे है।
पाक सीमा के आसपास नही देश के हृदयस्थल छतीसगढ तक़ पाक मे छपे नकली नोटो का पंहुच जाना इस बात का सबूत है कि उन लोगो की पकड़ कितनी गहरी है।नकली नोट यंहा सालो से चलाये जा रहे हैं।हाल मे पकड़ाये नकली नोट स्कैन किये हुये मिले मगर इस बार पकड़ाये नोट छापे हुये हैं।ये बात चिंताजनक है और तारीफ़ करनी होगी पुलिस की बंगाल के माल्दा इलाके से आये मात्र उन्नीस साल के एक युवक शेख बोरजंहा को उसने कुछ ही घण्टो मे पकड लिया।उसका एक साथी फ़रार होने मे सफ़ल हो गया है।एस पी अमित कुमार और उनकी टीम इस मामले की जांच मे भीड़ी हुई है।
अब सवाल ये उठता है कि क्या ये खबर बड़ी नही है।एक न्यूज़ चैनल कल से दहाड़ मार-मार कर रो रहा है कि गुजरात मे हुआ एनकाऊंटर फ़र्ज़ी था।उसका रोना जारी है और अब उसने एक नया राग आलापना शुरू कर दिया है।उसका कहना है कि मामले का सच साम्ने आना आधा न्याय है ,पूरा न्याय तब कहलायेगा जब आरोपियों को सज़ा मिलेगी।उन्होने बाक़ायदा सवाल भी पूछने शुरू कर दिये हैं।ठीक है सही कर रहे है दोषियों को सज़ा मिलनी ही चाहिये लेकिन क्या ये नियम सिर्फ़ गुजरात के लिये लागू है?क्या महाराष्ट्र के कोल्हापुर मे गणेश जी की मुर्तियों को तोड़ने की घटना को नही दिखया गया?क्या सिर्फ़ इस्लिये कि इससे दंगे भड़क सकते थे?क्यो वंहा पुलिस की जीप पर चढ कर पाकिस्तान का झंड़ा लहराने की घट्ना को नही दिखाया गया?क्या इससे हिंदू भड़क़ जाते?क्या इस देश मे पाकिस्तान का झंडा ,वो भी दंगा करके,पुलिस की जीप पर चढ कर लहराने की एक वर्ग विशेष को छूट दे दी गई है?और भी बहुत से सवाल है,जो इस देश मे मीडिया की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।
लाखो रूपये के नकली नोट पकड़ा रहे है,वो दिखाने का टाईम नही है।और किसी के भी बेडरूम तक़ मे घूसे जा रहे है भाई लोग्।एक भाजपा नेत्री को अश्लील एम एम एस मे घसीट दिया पता नही किसका था,बस अनुमान लगाया और कर दिया खड़ा बखेड़ा।एक अफ़सर की अपनी पत्नी के साथ अतरंग क्षणो की फ़िल्म मिली,तड़ से दिखा दिया,न तो उसकी बीबी ने शिकायत की थी और न ही उसके परिवार मे किसी ने।बस कुछ ठेकेदारो ने भुगतान रोकने वाले अफ़सर को ब्लैकमेल करना चाहा और सफ़ल नही होने पर मिडिया को फ़िल्म मुहैया करा दी और मामला समाज-सुधार का हो गया,ब्लैकमेलिंग का नही।
ऐसे एक नही सैकडो उदाहरण है मगर क्या करें,मीडिया को तो पिलीया हो चुका हैउसे तो पीला ही नज़र आयेगा।आज सुबह से मै नेशनल न्यूज़ चैनलो पर नकली नोटो की खबर ढूंढ रहा हुं,जंहा से शेख नकली नोत लेकर आया है उस जगह माल्दा की खबर आ गई मगर रायपुर की नही।गुस्सा तो था ही सुरेश चिपलुणकर की पोस्ट पढ कर गुस्सा और बढ गया तो मै भी लिख बैठा।मुझे लिंक देना आता नही इसलिये क्षमा चाहता हूं,मगर आपसे अनुरोध ज़रूर करूंगा कि सुरेश जी के ब्लाग पर ज़रूर जाकर उनकी पोस्ट को पढे।
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