गुरू का सम्मान हो औ

र चेला उस कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथी हो,चेले के लिये इससे बढिया बात और क्या हो सकती है।मगर कहते है ना हर किसी की तक़दीर मे गुरू को सम्मानित करना लिखा नही होता और शायद इस मामले मे मैं भी दुर्भाग्यशाली ही रहा।मैं बात कर रहा हूं अपने ब्लाग गुरू संजीत त्रिपाठी के सम्मान समारोह की।जी हां सम्मान हुआ मेरी ही अध्यक्षता वाले प्रेस क्लब मे और उस समारोह का एक विशिष्ठ अतिथी मैं भी था।पर बुरा हो पापी पेट का जो मैं चाह कर भी उस कार्यक्रम मे जा नही पाया।इस बात का अफ़सोस मुझे हमेशा रहेगा।
संजीत मेरे लिये छोटे भाई जैसा और जब मैने उसे जनसत्ता मे अपने सहकर्मी के रूप मे देखा तो मुझे लगा इसमे बहुत

कुछ धधक रहा है।वो मेरा जुनियर था और पत्रकारिता मे उसकी वो शुरूआत ही थी।अम्बरीष कुमार,अनिल सिन्हा और अनिल यानी मैं तीन इक्के उसके गुरू थे।उसने पत्रकारिता मे बढिया काम किया और एक दिन वो मुझे पकड कर अपने घर ले गया और उसने मुझे ब्लाग के बारे मे बताया।उसके बाद न केवल उसने मेरा ब्लाग बनाया बल्कि वो सब काम छोड़ कर मेरे आर्टिकल भी पोस्ट करता था।उसने मुझे ज़ोर देकर टाईप करना सिखाया और आज अगर मैं बिना किसी के मदद के पोस्ट करता हूं तो उसका श्रेय सिर्फ़ और सिर्फ़ संजीत को ही जाता है।पता नही मैं पत्रकारिता में कुछ सीखा पाया या नही मगर उसने यकीनन मुझे ब्लाग लिखना सिखाया।मैं उसका गुरू हूं या नही ये कन्फ़र्म नही मगर वो मेरा गुरू है ये कन्फ़र्म है।
आज मैं बहुत दुःखी भी हुं और उतना ही खुश भी।दुःखी इसलिये कि उसे सम्मानित करने वाले पल का मैं साक्षी नही बन सका और खुश इसलिये हूं कि चलो मैं ना सही बड़े-बड़े लोगों के हाथो वो सम्मानित तो हुआ।संजीत का सम्मान हुआ है हिंदी ब्लागिंग के लिये और उसे सम्मानित किया है ब्लाग को प्रोत्साहित करने वाले साहित्यकार जयप्रकाश मानस के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ के पहले वेब पोर्टल सृजन गाथा डाट काम ने।इसी सम्मान से संजीव तिवारी और खुद मैं भी सम्मानित हो चुका हूं इसलिये मुझे और अच्छा लग रहा है।अच्छा है संजीत खूब तरक्की करे ब्लाग जगत मे अपना और छत्तीसगढ का डंका बजाते रहे यही शुभाषिश है।ख्यातनाम लेखक विनोद कुमार शुक्ल,लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार श्रीप्रकाश मिश्र,जाने माने पत्रकार रमेश नैयर,गोविंदलाल वोरा,अनिल विभाकर,रवि भोई जयप्रकाश मानस के हाथों संजीत का सम्मानित होना अपने आप मे उपलब्धी है और मुझे तो ऐसा लग रहा है जिसे वो नही खुद मैं सम्मानित हुआ हूं,संजीत को बहुत बहुत बधाई।उसकी बेबाक कलम चलती रही हमेशा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।