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Thursday, December 22, 2011

क्यों अवैध ढंग स रह रहे बांग्लादेशियों को वापस नही भेजा जाता?जब वे रह सकते है तो फिर पकिस्तान से आये हिंदू क्यों नही?

पाकिस्तान से तीर्थयात्रा पर भारत आये लगभग सवा सौ हिंदू वापस नही जाना चाहते है़.सरकार उन्हे वापस भेजने पर तुली हुई है.सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण फिलहाल उनकी वापसी टल गई है.अब सवाल ये उठता है कि उस देश में जंहा लाखो बांग्ला देशी अवैध रुप से रह रहे हैं वंहा सौ पाकिस्तानी हिंदूओ के रहने पर क्या आपत्ती है?जिस देश में मुसलमानो के लिये बिल लाया जाना धर्मनिरपेक्षता है,उस देश में फिर हिंदूओं के हक़ में कोई बात करना साम्प्रदायिकता क्यों कहलाती है?क्यो सौ पाकिस्तान से यंहा आये सौ हिंदू बोझ लग रहे हैं सरकार को और जो कश्मीर में लाखो पाकिस्तानी घुसपैठिये रह रहे हैं उन्हे क्यों ढूंध कर वापस नही भेजा जाता?क्यों अवैध ढंग स रह रहे बांग्लादेशियों को वापस नही भेजा जाता?जब वे रह सकते है तो फिर पकिस्तान से आये हिंदू क्यों नही?

Friday, May 27, 2011

वोट मांगते हो,जात पर न पात पर,मुहर लगेगी हाथ पर,तो जातिगत जनगणना क्यों करवाते हो?

एक छोटी सी पोस्ट।बस एक छोटा सा सवाल ही है जो एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी है।कांग्रेस का चुनावी नारा है जात पर न पात पर,मुहर लगेगी हाथ पर।इस नारे को मैं सालों से सुनता आ रहा हूं और सभी सुन रहे हैं।जनता भी इस नारे के मोहपाश में बंधकर कई बार कांग्रेस को सत्ता की मलाई चटा चुकी है।अब जब आप बात करते हो जात-पात से परे होने की ,बात करते हो आप धर्मनिरपेक्ष होने की,गालियां देते हो आप अपने विरोधी दल को सामप्रादायिक होने की,फ़िर आप करा क्या रहे हो?जातिगत जनगणना।क्यों ?किस लिये?क्या ऐसा करने से जात-पात का फ़र्क़ मिट जायेगा?क्या इससे धर्मों के बीच खुदी खाई पट जायेगी?आखिर ऐसी कौन सी ज़रूरत आन पड़ी है कि जातिगत जनगणना कराना ज़रुरी हो गया है।बेहद अफ़सोस की बात है कि आज़ादी के इतने सालों बाद भी हम अपने देश में रहने वाले को राष्ट्रीयता की एक ही माला मे नही पिरो पाये हैं।विभाजन का दर्द कभी भी हम लोगों को दंश दे देता है।चाहे लाख भाईचारे का दावा करे,शक़ का क्वेश्चन मार्क हमेशा उसके साथ चिपका रहता है।देश के विभाजन के बाद और जाने कितने विभाजन हो चुके हैं इस देश में।हिंदु -मुसलमान का,अल्पसंख्यकों के सिक्खों को अलग बताया गया,जैन को अलग किया गया,स्वर्ण और पिछड़ों के बीच आरक्षण की खाई खोद दी गई और से अगड़ों और पिछड़ों के नाम पर और गहरा किया गया,फ़िर उसमे अति पिछड़ेपन के कांटे भी बोये गये और अब जात-पात का ज़हर घोला जा रहा है।इतने सालों मे हम सब  अपने आपको हिंदुस्तानी या भारतीय कहना नही सीख पाये हैं और ना इस बारे में कभी कोई पहल की गई है।बस वोटों की खातिर देश के दो टुकड़े होने के बाद टुकड़े-टुकड़े कर दिया।गुजराती-मराठी-पंजाबी-बंगाली का हिस्सा बंटवारा पहले ही कर चुके अब ब्राह्मण,बनिया,हलवाई-नाई,लोहार-…………। पता नही और कितने टुकड़ों में बाटेंगे इस देश को।बताओ भला नारे लगाते है,जात पर ना पात पर,मुहर लगेगी हाथ पर और करवा क्या रहे हैं जातिगत जनगणना।बापू इस देश की रक्षा करना,क्या यही सोच के देश को आज़ाद कराया था।