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Tuesday, August 23, 2011

नक्सलवादियों से आतंकवादियों से,अलगाववादियों से,अलग कश्मीर मांगने वालों से और तो और पाकिस्तान से भी बात कर सकती है सरकार बस अन्ना को छोड कर?क्यों?

जिस तरीके से सरकार अन्ना के अनशन की अनदेखी कर समय टाल रही है उससे लगता है कि वो भ्रष्टाचार खतम करे या ना करे अन्ना को तो खतम करके ही रहेगी।ना रहेगा अन्ना और ना रहेगा फ़िर किसी अनशन-फ़नशन का टेनशन।बस समय काटो बयानबाज़ी में और तबियत खराब से और ज्यादा खराब करो को अन्ना की,और कुछ गड़बड़ हुई तो सारा दोष डाल दो उनकी टीम और मीडिया पर।सब मंज़ूर है बस भ्रष्टाचार के खिलाफ़ कोई आवाज़ तक़ नही।