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Tuesday, September 2, 2008

सलाम साठ साल के बुजुर्ग समयलाल को







छत्तीसगढ़ के रायगढ़ ज़िले के प्राथमिक स्कूल के बच्चों को उसी गाँव का बुजुर्ग समय लाल पढ़ा रहा है। इस काम में उसकी मदद करता है कक्षा छठवीं का एक छात्र। स्कूल में पदस्थ शिक्षक कभी-कभार आता है, लेकिन छात्र भी उसे अपना शिक्षक नहीं मानते वे समय लाल को ही अपना गुरूजी मानते हैं।

ग्राम पासीद के स्कूल में पिछले 2 सालों मात्र 1 शिक्षक पदस्थ है। उसका भी होना नहीं होना एक समान है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पासीद का स्कूल बिना मास्टर के चल रहा है। शिक्षकों की कमी से बच्चों के भविष्य की चिंता न सरकार को हुई न प्रतिनिधियों को। हाँ! गाँव का ही एक बुजुर्ग समय सिंह इस बात को लेकर परेशान हुआ और उसने सरकार और सरकारी तंत्र के मुँह पर तमाचा जड़ते हुए बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया।

स्कूल के नन्हें-मुन्हें छात्रों से पूछो उनका शिक्षक कौन है ? तो वे सिर्फ समय सिंह को ही अपना शिक्षक मानते हैं। स्कूल में पदस्थ शिक्षक के बारे में उनकी राय बेहद खराब है। वे उसे अपना शिक्षक मानते ही नहीं हैं। देश का भविष्य समझे जाने वाले बच्चों की फिक्र आखिर उनके गाँव का बुजुर्ग ही कर रहा है।
अब भले ही सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह राज्य में स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मध्यान्ह भोजन, सर्वशिक्षा अभियान और पढ़बो-पढ़ाबो जैसी कई महत्वाकाँक्षी योजनाएँ चलने का दावा कर रहे हैं। लेकिन ग्राम पासीद में तो ये योजनाएँ नज़र नहीं आती। एक स्कूल ही काफी है सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए। यहाँ मक्सद सरकार को नंगा करने या भ्रष्टाचार की पोल खोलना नहीं है बल्कि समय से लड़ रहे समय सिंह को सलाम करना है।

10 comments:

अनुराग said...

vakai me salaam hai samaylaal ji ko.....aise log "unsung hero "hai ji.....

राज भाटिय़ा said...

हम आज भी पुरी दुनिया से १०० साल पीछे हे, कोई माने या ना माने कुछ महिलाओ ने बाल कटा कर, ओर छोटे कपडे पहन लिये ,ओर नवयुवक अंग्रेजो की दी हुई भाषा बोल कर अपने आप को अधुनिक समझने लगे, तो क्या हम आधुनिक हो गये??
बहुत ही अच्छी अच्छी तस्वीर दिखाई हे आप ने हम सब को, सभ्य होना ओर सभ्य दिखना दोनो मे अन्तर हे, हम अपने आप को सभ्य दिखाते हे,जिस देश की जडे( बच्चे) ही कमजोर होगी अनपढ होगी , उस देश का भविष्या.....
धन्यवाद

Gyandutt Pandey said...

ओह, आवश्यकता है ढ़ेरों समय लालों की!

ताऊ रामपुरिया said...

अनिल जी वाकई समय सिंह जी तो प्रणाम लायक है ही !
और इतने समय से ये बच्चों को पढाते आ रहे होंगे तो
वहा के मास्टर से ज्यादा अनुभवी तो ये निश्चित ही होंगे !
लेकिन पासीद जिस भी जिले में आता होगा वहाँ के शिक्षा
अधिकारी क्या झक मारते रहते है की एक मास्टर है और
वो भी ना जाए ! अगर शिक्षा से भी दोगलापन किया तो
आने वाली पीढी किसी को भी माफ़ करने वाली नही है !
आपका इस तरह सामाजिक सरोकारों से सम्बंधित लेखन
देख कर ये लगता है की कोई तो है , जो इनको आज नही तो
कल ठीक कर पायेगा ! बहुत धन्यवाद !

दीपक तिवारी said...

समयलाल जी को तिवारीसाहब का सलाम !
अगर इमानदारी से पूछे तो ये समय लाल जी
नही हो तो सरकारी मास्टरों के भरोशे ये
शिक्षण मन्दिर चलना मुश्किल हो जायेगा !
बहुत जरुरत है इन मुद्दों को उठाने की !

श्रीकांत पाराशर said...

Anilji, kya samachar late hain. aapke madhyam se jankariyukt upayogi samachar milte hain. sahi kaha sabne, aise samaylalji sab jagah hon to desh ki soorat hi badal jaye.

सचिन मिश्रा said...

Samaylal ji ko mera bhi salam.

दिनेशराय द्विवेदी said...

समय लाल जी ने अपना नाम सार्थक किया। उन्हें सलाम। सरकार और तंत्र कभी न सीखेगा। उसे तो बदलना दरकार है।

अशोक पाण्डेय said...

समय सिंह जी को हमारा भी सलाम।

सतीश सक्सेना said...

वाह !