Monday, October 13, 2008

छत्‍तीसगढ़ में एक औरत का सती हो जाना क्‍या लोकल ख़बर है।

छत्‍तीसगढ़ में एक औरत पति की चिता के साथ जलकर सती हो गई। ये दिल दहलाने वाली घटना शायद छत्‍तीसगढ़ के लोगों का ही दिल दहला सकी। इस दर्दनाक हादसे की ख़बर शायद नेशनल न्‍यूज़ चैनल वालों के लिए लोकल ही रही। उनके लिए तो एक बच्‍चे का बोरवेल में गिर जाना राष्‍ट्रीय ख़बर हो सकती है, लेकिन तरक्‍की के इस दौर में दशकों पुरानी सतीप्रथा के लौटने की दस्तक कोई मायने नहीं रखती।

राजधानी रायपुर जिले के विकासखण्‍ड मुख्‍यालय कसडोल से मात्र 14 किलोमीटर दूर छेछर गांव के श्‍मशान घाट में मेले जैसा माहौल बन गया है। यहां शनिवार को गांव की ही 75 वर्षीय श्रीमती लालमति वर्मा अपने पति शिवनंदन वर्मा की चिता में कूदकर खुद को आग के हवाले कर दिया। परिजनों के श्‍मशान से लौटने के बाद श्रीमती लालवत‍ि वर्मा पूरा श्रृंगार कर रामायण और पूजा की सामग्री लेकर श्‍मशान पहुंची थी। उन्‍होंने अपने पति के चिता की परिक्रमा की और पूजा कर उसमें कूद गई। गांव वालों का अब कहना है कि श्रीमती वर्मा को उनके पुत्रों परिजनों और ग्रामीणों ने समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन सब की बातों को अनसुना कर वे पति की जलती चिता में कूद गई।

लालमति के सती होने की ख़बर आग की तरह फैली और आसपास के गांव के महिला और पुरूष छेछर गांव के श्‍मशान पहुंचकर पूजा और परिक्रमा कर दोनों की चिता पर नारियल चढ़ा रहे हैं। श्‍मशान घाट में मेले सा माहौल हो गया और शनिवार और इतवार को लोग वहां नारियल, फूल चढ़ाकर, अगरबत्‍ती जलाकर पूजा करते रहे। ये ख़बर जब राजधानी पहुंची तो जिला प्रशासन सन्‍न रह गया। तत्‍काल बलौदाबाज़ार अपर कलेक्‍टर और रायपुर के पुलिस अधीक्षक को घटना की जांच के आदेश कलेक्‍टर सोनमणी बोरा ने दिए।

दण्‍डाधिकारी जांच के आदेश होने के बाद अब लोग कह रहे हैं कि लालमति को सबने समझाया और मना किया था लेकिन सूत्रों का कहना है कि शाम को सती होने के लिए निकली लालमति के पीछे ग्रामीणों का हुजूम भी था। सबसे महत्‍वपूर्ण सवाल ये उठता है कि एक 75 साल की वृद्धा पूर्ण श्रृंगार कर श्‍मशान गई और आसानी से जलती हुई चिता में कूद गई और उसे रोका तक नहीं जा सका। ये महत्‍वपूर्ण सवाल इस पूरे प्रकरण पर पड़े पर्दे को हटाने के लिए काफी है।

अफसोस की बात ये है कि इसी गांव में 1962 में भी मालिक राम वर्मा की धर्मपत्‍नी असमद बाई सती हुई थी। जहां पर वो सती हुई थी वहां उनके रिश्‍तेदारों ने सती मंदिर बनवा दिया था जो आज भी मौजूद है और ग्रामीण यहां श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ करते हैं। 46 साल बाद लालमति ने इस घटना को दोहराकर छत्‍तीसगढ़ के पिछड़ेपन को फिर से साबित कर दिया। सब कुछ हो जाने के बाद पुलिस ने वहां कैम्‍प कर लिया है। भारी मात्रा में पुलिस बल गांव में तैनात है और प्रशासन इस सती प्रकरण पर लीपापोती करने पर तुल गया है।

छत्‍तीसगढ़ में एक औरत का सती होना शायद छत्‍तीसगढ़ के लिए ही महत्‍वपूर्ण ख़बर बनकर रह गई। कथित राष्‍ट्रीय न्‍यूज़ चैनल तो अमिताभ बच्‍चन की बीमारी और सचिन तेंडुलकर के रिकॉर्ड की ओर ही ताकते रहे। सबसे तेज़ सबसे अलग और सच्‍ची ख़बर दिखाने वालों की तेज़ी और सच्‍चाई सती मामले को जगह देने के मामले में साफ नज़र आ गई। यहां नेशनल न्‍यूज़ चैनल वालों के बचने के ब्रह्मास्‍त्र 'विजुअल' का जिक्र भी करना चाहूंगा। इस बहाने के सहारे जब उन्‍हें बचना होता है वे बचते हैं, लेकिन जब वे बोरवेल में गिरे बच्‍चे की स्थिति ग्राफिक्‍स से दिखा सकते हैं या दुनिया भर के लंद-फंद अपराधों का नाट्य रूपान्‍तरण कर सकते हैं तो फिर इतनी बड़ी घटना को सिर्फ विजुअल के नाम से नज़र अंदाज़ करने की बात गले नहीं उतरती।

या फिर ऐसा लगता है कि ख़बर उसके विषय के अनुरूप महत्‍वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी मार्केट वेल्‍यू या टीआरपी उसका महत्‍व तय करती है। उन लोगों से शिकायत करना बहुत ज्‍़यादा जायज भी नहीं लगता क्‍योंकि वे छत्‍तीसगढ़ के हैं नहीं और छत्‍तीसगढ़ से उन्‍हें बढि़या विज्ञापन या मोटी कमाई होती नहीं है। लेकिन छत्‍तीसगढ़ में विपक्ष के नेताओं से शिकायत होना लाज‍मी है। कांग्रेस के नेता आने वाले चुनाव में टिकिट हासिल करने में इस कदर उलझे हुए हैं कि उन्‍हें और कुछ सूझ ही नहीं रहा है। अफसोस तो इस बात का है कि उनकी युवा शाखा, युवक कांग्रेस पड़ोस के राज्‍य में अल्‍पसंख्‍यकों पर हो रहे अत्‍याचार के विरोध में मुंह पर पट्टी बांधकर धरना देते रही, लेकिन उन्‍हें अपने ही प्रदेश में हुआ दर्दनाक हादसा नज़र नहीं आया। सती होने की इस दर्दनाक घटना का छत्‍तीसगढ़ तक ही सीमित रह जाना ख़बरों के लोकल और नेशनल के वर्ग-भेद का शायद सबूत है, जो समाचार जगत के लिए अफसोस जनक के साथ-साथ बेहद शर्मनाक भी। आज प्रशासन होश में आया है उसने मृतक के परिवार के 7 लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।

22 comments:

विवेक सिंह said...

घोर शर्मनाक .

seema gupta said...

"I m shocked and shattered to read it, how she can do this, very painful news, moreover how it can be local news only, where ever it has happend does it make any difference for news channels or new papers to highlight it????????? the point is it has happened....oh my god really very painful...what more to say... cant express what i am feeling..."

regards

COMMON MAN said...

electronic media wahin bhagti hai jahan use trp wali khabren milti hain, aapne bilkul theek likha hai

दीपक said...

एक भी अच्छी खबर नही है छ्त्तीसगढ मे यही हाल रहा तो भविष्य का कुछ कहना मुश्कील है !!

Suresh Chiplunkar said...

अरे भाई, लगता है छत्तीसगढ़ में कोई बजरंगी नहीं है, वरना अभी तक नेशनल न्यूज़ में आ चुका होता…

रंजना [रंजू भाटिया] said...

कब जागेंगे यह लोग ...अच्छा नही लगा आज के वक्त में भी यह सब सुन कर

प्रहार - महेंद्र मिश्रा said...

पूजा अर्चना करना भाई अंधविश्वास है . क्या कहे उनके नजरिये को. अभी भी हमारे देश में लोगो को जागृत करना निहायत जरुरी है .

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बेहद दुखद घटना!
भारत में विशेषकर बढ़ी उम्र के लोगों में अवसाद एक सामान्य स्थिति है जिसकी वजह से ऐसे घटनाएं होने की संभावना बढ़ जाती है. इसे गरीबी की तरह एक राष्ट्रीय समस्या मानकर उसके उन्मूलन का प्रयास होना चाहिए.

Arvind Mishra said...

पहले तो आप को पुलिस सम्मान पर सीधी बधाई ! दूसरी इस कहबर पर शर्म शर्म सबंधित सभी को !

Gyandutt Pandey said...

दुखद। यह हो क्या रहा है छत्तीसगढ़ में? बहुत बड़े जन जागरण की आवश्यकता है।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत अफ़सोस जनक ख़बर ! बहुत दहला दिया इस ख़बर ने ! और राष्ट्री न्यूज चैनल बिमारियों की पल पल की ख़बर परोस रहे हैं ! और ये ख़बर जिसको हाई-लाईट करके दिखाया जाना चाहिए था जिससे की लोग इस बुराई के बारे में जाने और समाज की इस बुराई को दूर करने में सहयोग करे ! इतनी दर्दनाक ख़बर मुझे सिर्फ़ आपसे ही मिली है !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

ऐसी घटनाएँ सामाजिक दबाव के कारण होती हैं। कभी भी स्वैच्छिक नहीं होती। यहाँ दिए गए विवरण से ऐसा लगता है जैसे यह पूर्णतया स्वैच्छिक हो। यह सब पति-पत्नी के जीवन को खोजने के बाद ही संभव है। इस तरह की घटनाओं को इन का महिमा मंडन जीवित रखता है और पुनरावृत्ति कराता है।

डॉ .अनुराग said...

दुखद है इससे न केवल छत्तीसगढ़ अपितु देश की छवि को भी नुक्सान पहुँचता है ?कमाल है लोग किसी को अपने सामने आत्महत्या कैसे करने देते है ?

संगीता पुरी said...

बहुत दुखद और अफसोसजनक खबर..... मुझे भी इस ब्लाग से ही मालूम हुआ.....कहीं भी इसकी कोई खबर नहीं है। लेकिन इस खबर का दुष्परिणाम भी दिखाई पड़ सकता था ....यानि टी वी में देखने के बाद अगल बगल के गांवों से भी पूजा करने के लिए भीड़ उमड़ सकती थी।

सचिन मिश्रा said...

Dukhad hai ki ab bhi aisa ho raha hai.

Parul said...

TAKLEEFDEH AUR SIHRAANEY VAALI KHABAR...PATI KE BAAD ASURAKSHA KI BHAAVNAA...KUCH BHI HO BAHUT SHARMNAAK VAAQYA

PREETI BARTHWAL said...

आज के युग में ऐसी घटना होना सच में बेहद शर्मनाक है।

राज भाटिय़ा said...

इस की रोक थाम तो हो सकती है, अब इस सती हुयी स्त्री के घर वालो को जेल मे कर दिया जाये ओर १० साल तक खुब काम करवाया जाये, फ़िर देखो अगली बार कोन सती होने की हिम्मत करता है,ताऊ का लठ्ठ पकडो फ़िर देखॊ,हम किधर जा रहै है , हम मै से किसी को नही पता, कोई लिव इन के पीछे भाग रहा है, तो कोई नारी शाक्ति चिल्ला रहा है, तो कोई समेंलिंग पर अपनी धोस जमा रहा है, लानत है इन सब पर.
आप ने बहुत ही सुन्दर लेख लिखा है हमेशा की तरह से, लोगो की आंखे खुलनी चाहिये ऎसे लेख पढ कर.
धन्यवाद

NIRBHAY said...

Reputation of Chhattisgarh State is Tribal and backward area of India ke roop me mahima mandit ho chuki hai, jiske karan yehan ki news to tavajjo nahi diya jata.

Ratan Singh Shekhawat said...

दुखद और शर्मनाक घटना

दीपक said...

आपके इस संवेदनशील प्रयास दिल से नमन जो मर गया उसके लिये तो कुछ नही किया जा सकता मगर ऐसी जागरुकता इसकी पुनरावृत्ती को निश्चीत ही रोक सकती है!!

Ashok Pande said...

अवाक और सुन्न कर देने वाली ख़बर. रूपकुंवर राजस्थान की थी - दिल्ली से बहुत दूर नहीं था घटनास्थल. सोचिये उस ज़माने का मीडिया कितनी जल्दी वहां पहुंच गया था - तब न मोबाइल थे, न हर जगह लैंडलाइन, न इतने संपन्न चैनल.

छत्तीसगढ़ थोड़ा नज़दीक होता और सती हो गई स्त्री श्रीमती लालमति वर्मा रूपकुंवर की तरह युवा होतीं तो शायद कुछ होता टीआरपीलोलुप आधुनिक मीडिया के वास्ते.

यह सामाजिक परिप्रेक्ष्य के लिहाज़ से इतनी बड़ी और ख़बर है पर देखियेगा मोहाली में सचिन बल्ला उठाकर (अगर वह मरते-गिरते लारा का रेकॉर्ड तोड़ सका तो) अगले हफ़्ते जब अपनी विश्वविजय का जश्न मनाएगा, यही चैनल-अख़बारिये उसे सहस्त्राब्दी की महानतम घटना बता कर हमारी-आपकी अक्लों का मट्ठा बनाएंगे.

मीडिया भी तो समाज से ही उपजा है ना साहब.

मैं इतना सारा कहना चाहता हूं कि सब गड्डमड्ड हुआ जा रहा है.

बहरहाल आपने यह महत्वपूर्ण पोस्ट लगा कर अहसान किया. धन्यवाद.