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Sunday, November 2, 2008

युसूफ़ भाई हमको बुरा नही लग रहा,हम तो मालेगांव धमाकों पर सिर्फ़ सवाल उठा रहे हैं

मालेगावं धमाके पर कुछ सवाल मैने पिछ्ली पोस्ट में उठाये थे।एक युसूफ़ साब ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बहुत बुरा लग रहा है ना?और भी बहुत कुछ कहा उन्होंने।मैं उन को ज़िक्र करने लायक नही समझता,मगर उन युसूफ़ साब को ये ज़रुर बताना चाहता हूं कि मैंने मालेगांव धमाकों को जायज नही ठहराया।सवाल खडे करने से कोइ किसी कौम का दुश्मन नही हो जाता,और मुस्लिमो की जो पैरवी कर रहे हैं,वे उनके हितैषी नही बल्कि असली दुश्मन हैं।दरसल मुसलमानों को इस बात पर गौर करना चाहिये कि जो कथित धर्मनिरपेक्ष नेता उनकी सलामती का झूठा रोना रो रहे हैं,वे जाने-अंजाने हिंदूओं के अंदर आक्रोश भडका रहें।उनकी पैरवी ही मुस्लिम विरोध की आग को हवा दे रहे हैं,जैसे युसूफ़ साब आप कर रहे हैं।

असल मे अब समय आ गया है जब हमे इस बारे मे इमानदारी से सोचना चाहिये।क्रिया और प्रतिक्रिया कोइ नये शब्द नही है,और ये सिद्धांत भी। अब अगर किसी धमाके के बाद उसमे शामिल लोगो की तरफ़दारी की बात सामने आती है तो उसका विरोध होना भी स्वाभाविक प्रक्रिया है।कायदे से इसमे जांच पूरी होने से पहले सभी राजनैतिक और सामाजिक लोगों को बयान देने पर रोक लगा देनी चाहिये। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वक़ालत करने वालो को भी खामोश रहने की हिदायत मिलनी चाहिये।बेसिर-पैर की स्टोरियों पर भी रोक लगनी चाहिये।ये इसलिये ज़रुरी है,क्योंकी इन्ही सबके कारण प्रतिक्रियाएं जो सामने आती है,वे ही बवाल का कारण बनती है।इस तरह का प्रयोग महाराष्ट्र मे हुआ,वहां राज के बोलने पर पाबंदी लगी और सुलगता महाराष्ट्र शांत हो गया। हालांकी देश के सबसे बडे शुभचिंतक बनने वाले मीडिया ने राज की प्रेस कांफ़्रेंस मे बवाल मचाने वाले सवालों की बरसात ज़रुर की,मगर उनकी इच्छा पूरी नही हुई।वैसे नेताओं की बकवास पर रोक लगाने से पहले मीडिया की बकवास को संतुलन के नियम सिखाना बेहद ज़रुरी है।

वैसे भी मुसलमानों के खिलाफ़ सारे देश मे उतना माहौल नही है,जितना मीडिया बताता है।करीब-करीब यही स्थिति फ़र्जी धर्मनिरपेक्ष नेताओं की है।वे भी ज़रा सी बात पर आसमान सर पर उठा लेते हैं,और प्रतिक्रिया स्वरुप फ़र्ज़ी हिंदूवादियों और सालो से ये ढकोसला देख रहे करोडो हिंदूओं को इस बारे मे सोचने पर मज़बूर कर देता है।धीरे-धीरे ये ज़हर सारे देश मे फ़ैल रहा है।समय आ गया है जब इस पर रोक लगाना ज़रुरी है।

वोट बैंक की खातिर जिस कांग्रेस ने मुसलमानो को डरा कर तरक्की की राह पर सबसे पिछे रखा,इस पिछडेपन को भुनाने वाले मुलायम-अमर,लालू-रामविलास ने उनकी तरक्क्की के लिये क्या किया?पहले कंग्रेस उन्हे डरा कर सुरक्षा की गारटी के बदले अपना वोट बैंक मानती थी,अब ये काम आरजेडी और एसपी कर रही है।जितना डर मुसलमानो को नही है उससे ज्यदा ये बताते हैं और गुस्से से भरे कुछ हिंदू उनकी मंशा के अनुरूप वारदात कर अलगाववाद की आग को हवा दे देते हैं।

मुसलमानों को ये सोचना चाहिये कि उनका सच्चा हितैषी कौन है?उनकी सुरक्षा की गारंटी मांग कर उन्हे असुरक्षित खाई मे धकेलने वाले नेता या उनके डर और आशंका को बेचने वाले मीडिया वाले?इस मामले मे भी प्रधानमंत्री को पहल करना चाहिये,न्यायपालिका को भी। अनावश्यक बयानबाज़ी ,बकवास पर रोक लगनी क्यों ज़रुरी नही है?क्या ये मसला महाराष्ट्र के मसले से छोटा है?क्या सारे धर्मनिरपेक्ष लोगों को अलगाव की आंधी चलती नज़र नही आ रही है?और भी बहुत से सवाल है,मगर डर है युसूफ़ जैसे होशियार लोग इसे मुस्लिम विरोध मान लें।

16 comments:

डॉ .अनुराग said...

कितनी अजीब बात है न ओद्योगिक क्रान्ति की ओर बढ़ते ,टेक्नोलोजी में आत्म-निर्भर होते ,आई टी सेक्टर में नाम कमाते इस देश में अचानक बम, धमाके ....बिहारी मराठी असमी ...जैसे विवाद सर उठाने लगे है...जो इस देश को आहिस्ता आहिस्ता ख़त्म कर रहे है ......

Suresh Chiplunkar said...

सटीक शब्दों में नपी-तुली लेखनी से निकला लेख… पुसदकर भाई लगे रहो…

Ratan Singh said...

बहुत सटीक और नपी तुली चर्चा की है | मुसलमानों को हिन्दुओं से कोई खतरा नही है यदि खतरा है तो पाकिस्तान की आई एस आई और हमारे कुछ छद्म धर्म निरपेक्ष नेताओं से |

PD said...

आपका पोस्ट पढ़कर मुझे कल की एक घटना याद आ गयी.. मेरा एक घनिष्ठ मित्र जो मुसलमान है, कल मेरे घर आया था.. किसी बात पर मैंने यूँ ही चुहलबाजी में कहा की आज तेरा मर्डर कर ही देता हूँ.. उसका कहना था की अरे भाई मारना ही है तो अपने घर पर नहीं, मेरे घर में मारना.. यहाँ मारोगे तो तो ये कह कर दंगा हो जायेगा की ३ हिन्दुओं ने मिलकर मुसलमान को मार दिया..

मैंने तो यही पाया है की हमारे आपसी रिश्ते पर कहीं भी अंतर नहीं आया है.. अब चाहे बम कोई भी फोडे.. उलटा मजाक करने के लिए एक बात और मिल गयी है..

Dineshrai Dwivedi दिनेशराय द्विवेदी said...

छोड़ो हिन्दू-मुसलमाँ, हिन्दी-मराठी, जरा इंन्सान की बात करें।

Arvind Mishra said...

उन जनाब ने आपको अपना जैसा ही समझ कर अपनी भावनाएं आप पर मढ़ दीं और आप स्पष्टीकरण दिए जा रहे हैं -लोगों को समझना होगा कि आतंकवाद के जड़ में विकृत धार्मिक सोच ही है और इस्लाम से तो इसका नाभि नाल सम्बन्ध है !

ताऊ रामपुरिया said...

क्या हम वापस आजादी के पहले के क्षेत्रीयतावाद की तरफ़ बढ़ रहे हैं ?

Gyan Dutt Pandey said...

एक आम मुसलमान को आतंकवादी कौन कह रहा है?
लेकिन जब सियासी गैरबराबरी बरतते हुये उनके वोट बैंक के लिये तुष्टीकरण किया जाता है, और आतंकवाद को सॉफ्ट-पैडल किया जाता है, तब परेशानी पैदा होती है।

Udan Tashtari said...

एकदम बेहतरीन और सधी हुई बात कही है आपने.

Anwar Qureshi said...

आप के मुझे पढ़ा सराहा ..मुझे बहुत ख़ुशी हुई ...आप के शब्दों से मुझे हौसला मिलता है ..आप का सादर आभार ..

युग-विमर्श said...

बंधुवर, मैं आपसे सहमत हूँ कि जांच पूरी होने तक बयान-बाज़ी पर रोक लगनी चाहिए. मीडिया को भी अपनी व्याख्याएं और विश्लेषण करने तथा संभावनाएं तलाश करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए. कोई भी घटित सत्य किसी न किसी कोण से हमारे देश में व्यक्ति सापेक्ष और कुछ मामलों में धर्म-सापेक्ष होता है. या तो हमारे भीतर इतना सामर्थ्य और साहस हो कि हम किसी घटना की स्वयं छानबीन करें और पक्ष या विपक्ष में ठोस प्रमाण जुटाएं जिससे प्रशासन को भी तस्वीर के अन्य पहलुओं पर विचार करने का अवसर प्राप्त हो. या फिर मौन रहें और जांच के निष्कर्ष की प्रतीक्षा करें.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

अनिल भाई, जिनकी दुनिया ही मुसलमान और गैर-मुसलमान में बंटी है उनके लिए एक पूरी पोस्ट?

seema gupta said...

" bhut shee sach kha hai, subko iss sach ka samna krna chayeye, bhagwan ne to bus inssan ko bnaya tha fir ye hindu muslman.... jane khan se bnty chle gye.... khun to subka lal hee hai naa.... jiska bhee bhaa vo inssan hee tha..."

Regards

मिहिरभोज said...

पूरी सांस भरके आंख बंद कर पूरी ताकत से भारत माता की जय बोलियें..... देखो हिंदु मुसलमान से भारत मां के सच्चे सपूत बन जाते है...फिर कोई युसुफ भाई ये नहीं बोले गा कि ...अब बुरा क्यों लगा

Yusuf said...

mere comment ko aone ya to padha nahi ya to padhna hi nahi chahte bas javab likh diya
maine bhi yahi kaha tha ki bina jaanch ke jab lagataar shorgul hote rahte hain to hame kya un hinduon ko atankvad ka samarthak kah diya jata hai jo jara bhi jaanch ki baat karte hain. yad kariye na kaise teesta seetalvaad ko swapn das gupta ne atankvadi kaha tha bhare talk show men. kya kiya tha teesta ne?
apne baat ko context se kaat kar alag rakh diya baki bate jikr na karne layak kah diya aur jo man me aya likha.
apne sahi kaha hai ki desh me musalmano ke khilaaf mahol utna nahi hai par jab har islam aur atankvaad ko milane wale tark diye jate hain to kise bura nahi lagta.
atal bihari ne goa me jo kaha tha wo bhi hame na bura lage?
pragyaon ko chhod dijiye wo mamla to abhi na jane kya mod le par kya aur dharmon se atanki nahi huye par atal bihari ki baat yaad kijiye.
bura lagta hai anil sahab jab aap par ungliyan uthti hain.
bura lagta hai jab kuchh chhote se sarfire logon ke chalte police check karte huye naam bhar padh kar talashi leti hai aur bagal se bina helmet ke koi aur nam wala jane diya jata hai
bura lagta hai saheban jab chalti hui bahas apke pahunchne par band ho jati hai
hamne ye nahi kaha tha ki ap male gaon ko jayaj thahra rahe hain jaisa ki apne bina samjhe likh dala hamne sirf ye kaha tha ki bura lagta hai jab kuchh sirfiron se puri kaum ko joda jata hai.
anil sahab maine dost kaum dek kar nahi banaye, ghar kaum dekh kar nahi banaya par bura lagta hai jab koi kahta hai ki wahan us mohalle me apke log rahte hain, bura lagta hai jab hamse koi sirf aur sirf sher aur gazal ki bat karta hai desh ki nahi. mujhe to bura nahi laga jab shivsena ne pragya aur uske sathiyon ko kanuni sahayata dene ki baat ki bhale hi shivsena ka record kitna hi kharab ho par kanoni sahayta ka hak to sabhi ko hai. par mushirul saab jaise watan parast aur roodhiyon ke khilaaf khade rahne wale insaan par kitni ungliyon uthi aap ko yaad hai
ham hindustani hain anil sab ibadat jidhar bhi muh karke karen par khate yahi ka hainaur dafan bhi yahi honge koi pakistani ya arabi hame jannat ki rah dikhane nahi jayega.
ham to nahi hain jaheen par aap to hain hamari baat ko itne galat lahje me pesh kar rahe hain kyon anil sab
khuda ke liye bhale is comment ko mat chhapiyega par lahza mat bigadiyega.

रौशन said...

अब लगता है खेल के नियम बदल रहे हैं हिंदू हिंदू कह कर मुसलमानों को और मुसलमान मुसलमान कह कर हिन्दुओं को डराया जाएगा
जम के ध्रुवीकरण होगा और फ़िर सत्ता की मलाई मिल कर खाई जायेगी