Tuesday, November 11, 2008

आईजी तक को निशाना बना रहे हैं नक्‍सली, क्‍या शांतिपूर्ण मतदान कराओगे?

चुनाव आयोग और प्रशासन छत्‍तीसगढ़ में शांतिपूर्ण मतदान कराने का दावा कर रहा है। इसके लिए साढ़े 3 सौ कंपनियां अलग से तैनात की जा रही है। सरकारी तैयारियों के दौर को ठेंगा दिखाते हुए नक्‍सलियों ने छत्‍तीसगढ़ के 2 सिरों में 2 बड़ी वारदात करके अपने इरादों को बता दिए हैं। बस्‍तर में उन्‍होंने 2 भाजपा नेताओं की हत्‍या की और सरगुजा में आईजी को अपनी गोलियों का निशाना बना दिया। आईजी बीएस मरावी की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उन्‍हें अंबिकापुर से ईलाज के लिए आज राजधानी रायपुर लाया गया।

राज्‍य बनने के बाद आईजी स्‍तर के अधिकारी की नक्‍सलियों के हमले में घायल होने की ये पहली घटना है। मरावी झारखंड में आईजी और एसपी बार्डर मीट‍ में शामिल होने गढ़वा गए थे। वहां से लौटते समय रामचंद्रपुर और सनावल के बीच डोलंगी गांव में नक्‍सलियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। करीब घंटे भर गोलीबारी होती रही। इस बीच आईजी बीएस मरावी के सिर में और पीठ में गोलियां लगी। घायल आईजी को अंबिकापुर में भर्ती कराया गया। वहां ऑपरेशन के बाद उन्‍हें बेहतर ईलाज के लिए रायपुर भेज दिया गया।

इससे पहले नक्‍सलियों ने छत्‍तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्‍से बस्‍तर में भाजपा नेता रमेश राठौर और उनके साथी की गला रेतकर हत्‍या कर दी थी। रमेश राठौर की ऑल्‍टो कार को भी आग के हवाले कर दिया गया। रमेश चुनाव प्रचार पर निकले थे। कांकेर में भी कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के 2-2 चुनावी दफ्तर नक्‍सलियों ने फूंक दिए। उनका वनांचल में मतदान के बहिष्‍कार का फरमान जारी हो चुका है। वे सभी से मतदान से दूर रहने की अपील कर रहे हैं। अपील के पोस्‍टर चिपकाए जा रहे हैं और गोलियों और बम के धमाके भी किए जा रहे हैं।

बस्‍तर क्षेत्र के तो आधे से ज्‍यादा पोलिंग बूथ संवेदनशील समझे जाते हैं। बस्‍तर की तरह छत्‍तीसगढ़ का उत्‍तरी वनांचल सरगुजा भी नक्‍सल प्रभावित है। हालाकि यहां स्थिति उतनी खराब नहीं है जितनी बस्‍तर में है लेकिन सरगुजा में ही आईजी पर हमला कर नक्‍सलियों ने यहां भी अपनी ताकत का प्रदर्शन कर दिया है।

चुनाव आयोग ने मतदान शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए वर्तमान पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के अलावा साढ़े 3 सौ कंपनियां अतिरिक्‍त तैनात करने का फैसला लिया है। इसके अलावा एरियल सर्वे करने के लिए 6 हैलिकॉप्‍टर भी मंगाए गए हैं। अतिरिक्‍त बल कितना कारगर होता है, ये तो समय बताएगा लेकिन नक्‍सलियों ने तो अपनी ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

सरकार और नक्‍सलियों की लड़ाई के बीच मतदान शांतिपूर्ण हो जाए तो बहुत अच्‍छा है वरना बहुत सी जान बेमतलब दांव पर लगी रहेगी जैसे अंबिकापुर के आईजी बीएस मरावी की जिन्‍दगी दांव पर लग गई है। हालाकि सरकार ये दावा कर रही है कि उनकी हालत खतरे से बाहर है लेकिन अंबिकापुर के चिकित्‍सीय सूत्र कहते हैं कि मामला उतना आसान नहीं है। सर की चोट साधारण नहीं मानी जा सकती और इसीलिए उन्‍हें रायपुर भेजा गया है।

12 comments:

रौशन said...

स्थिति गंभीर है और ऐसे में निष्पक्ष मतदान की सोचना तो शुतुरमुर्गी ख्याल होगा
इस समस्या के समाधान के बिना छत्तीसगढ़ के विकास का रास्ता नही खुल पायेगा.

Udan Tashtari said...

आई जी मारावी पर हुआ प्राणघातक हमला अति दुखद है.

स्थितियाँ नियंत्रण से बाहर हैं. देखिये, चुनावों का क्या होता है.

Suresh Chiplunkar said...

बहुत ही विषम परिस्थितियाँ हैं, लेकिन चुनाव आयोग भी क्या करे, नेताओं द्वारा इतने वर्षों में गन्दगी फ़ैलाई गई है, उसमें ही उसे काम करना होगा… बस अधिकारियों या जवानों की जान खामखा न जाये यही दुआ है, एकाध दो भ्रष्ट नेता मारे जायें तो कोई बात नहीं :) :)

संगीता पुरी said...

आगे आगे देखिए , होता है क्‍या ?

दीपक said...

आपकी चिंता जायज है !! नक्सल प्रभावित क्षेत्रो मे चुनाव संपन्न करना एक बडी चुनौती जान पडती है !!ईश्वर आई जी को स्वास्थ्य प्रदान करे यही कामना है !!

ताऊ रामपुरिया said...

" मरावी झारखंड में आईजी और एसपी बार्डर मीट‍ में शामिल होने गढ़वा गए थे। वहां से लौटते समय रामचंद्रपुर और सनावल के बीच डोलंगी गांव में नक्‍सलियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। करीब घंटे भर गोलीबारी होती रही। इस बीच आईजी बीएस मरावी के सिर में और पीठ में गोलियां लगी।"

कितने मजबूर हैं हम ? आख़िर कब तक ऐसा चलेगा ? आपने हमेशा की तरह बहुत सटीक और सामयीक जानकारी दी ! धन्यवाद !

COMMON MAN said...

देश का माई-बाप कोई नहीं है, राष्ट्रीय सम्पत्ति में से अपना-अपना हिस्सा लीजिये, घोटाला कीजिये और ऐश कीजिये.

आदर्श राठौर said...

नक्सली पथभ्रष्ट हो चुके हैं
उन्हें अपने उद्देश्य का ध्यान नहीं है। बस देश में बेवजह हिंसा बहा मासूमों का खून बहा रहे हैं।

राज भाटिय़ा said...

यह सब किया धरा भी तो इन नेताओ का है, भगवान जाने क्या होगा इस मेरे स्वर्ग का, जहा आज हर कुर्सी पर रावण विराज्मान हे.
धन्यवाद इस लेख के लिये

Gyan Dutt Pandey said...

चुनाव सफल करना तो वास्तव में बड़ी चुनौती है। सेना का प्रयोग भी एक सीमा तक फलदाई होता है।

योगेन्द्र मौदगिल said...

सटीक चिंतन .........

Jimmy said...

bouth he aacha post kiyaa aapne


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