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Tuesday, November 11, 2008

एक रुपये किलो क्यों,मुफ़्त मे बांटो चावल,बाप का माल तो है?

छत्तीसगढ मे चुनाव से एन पहले भाजपा ने अपना घोषनापत्र जारी कर कहा कि उनकी सरकार आई तो गरीबो को एक रुपये किलो चावल देंगे।इससे पहले कांग्रेस ने कहा दो रुपये किलो चावल देंगे।भाजपा सरकार अभी एक रुपये किलो चावल दे रही है,उसके जवाब मे कांग्रेस ने दाम घटा कर दो और भाजपा ने और घटा कर एक रुपया किलो कर दिया। अरे एक रुपये क्यों,मुफ़्त मे बांटो चावल,बाप का माल तो है?

सत्ता मे आने के लिये राजनैतिक पार्टियां जो ना करे वो कम है?रियायती दामो पर गरीबो के नाम कुछ भी और किसी को भी बांट सकते है नेता। अरे जो सत्ता के लिये समाज को, देश को बांट सकते हैं वो क्या नही कर सकते?अब भाजपा सरकार को ही लिजिये।तीन रुपये किलो चावल बांट रही थी,मगर जैसे ही कांग्रेस ने कहा कि उनकि पार्टी सत्ता मे आई तो वे दो रुपये किलो चावल देंगे,भाजपा ने दाम घटा कर एक रुपया किलो कर दिया। ऐसे बांट रहे है जैसे चावल इनके बाप के खेत मे उगता हो?जरा चावल उगाये और फ़िर बांटे किसी को कोइ ऐतराज नही है।मगर पहले खेती करे और चावल उगाये।

यही हाल बिजली का है छोटे किसानो,गरीबोंको मुफ़्त बिजली देंगे,जैसे पावर जनरेशन प्लांट इनके बाप का हो।मुफ़्त मे बिजली के नाम पर एक बत्ती कनेक्शन बांटने का दुष्परिणाम आज तक भुगत रहे हैं।एक बत्ती वाले के घर मे टीवी भी है और फ़्रिज भी।बत्तियां तो पूछो मत।इतनी बत्ती जलती है एक बत्ती वाले के घर की सरकार और बिजली विभाग की बत्ती गुल हो गयी।उनकोमुफ़्त मे बांटो और कीमत वसूलो दुसरो से। चावल फ़्री मे बांटो और टैक्स वसूलो दुसरो से।

पता नही शर्म आती भी है या नही इन नेताओ को?ज्यादा दिन नही हुये है,जब इस छोटे से राज्य मे गरीबो के लिये भेजा गया करोडो रुपये का चावल ट्रांस्पोर्टर ले उडे।करोडो रुपये के घपले की ठीक से जांच भी नही हुई और मामला ठंडे बस्ते मे चला गया।मजाल है चुनाव लड रही कांग्रेस ने इस मामले मे कुछ कहा हो। आखिर उनको भी तो यही करना है। अभी खिलाफ़ बोलेंगे तो उनके खिलाफ़ भी आवाज उठेगी।इसलिये मिलबांट कर खाओ और मिलबांट कर बांटो। है ,तो जनता के गाढे पसीने की कमाई का ।फ़िर क्या है एक रुपये क्यों मुफ़्ट बांटो, बाप का तो माल है।

14 comments:

राज भाटिय़ा said...

सब चोर है ओर साथ मै मोसेरे भाई भी, अरे भाई पहले खुद खरीदो चावल को फ़िर बेचो, समझ मै नही आता इन सब कै लिये कोई कानुन भी है या नही.
धन्यवाद एक सच्चे लेख के लिये

ताऊ रामपुरिया said...

आपने बहुत सटीक लिखा ! इन का कोई क्या कर लेगा ? जो जचे वो करेंगे ! और जांच में क्या होगा ? उसमे भी जांच के नाम पर खाएँगे ! इनके भाई भतीजे जांच के नाम पर ऐश करेंगे ! और क्या ?

जितेन्द़ भगत said...

जनता के लि‍ए धन-धान सही समय पर और सही जगह पर पहुँच जाए, तो नेताओं को क्‍या मि‍लेगा:)

seema gupta said...

" fir se ek accha or sachha lekh, sach kah hai, jub election aateyn hain to free mey bhee bant daineg vote jo laina ha fir, jruret mey to gdhe ko bhee baap bnateyn hain ye log.."

Regards

COMMON MAN said...

हराम का माल ऐसे ही लुटाया जाता है. मुफ्त बांटने में भी कोई बुराई नहीं, लेकिन इसका सदुपयोग हो, तभी तो.

Gyan Dutt Pandey said...

सारे पैर वालों को सरकार मुफ्त में बैसाखी बांटने जा रही है! :)

Suresh Chandra Gupta said...

@"पता नही शर्म आती भी है या नही इन नेताओ को?" नेताओं का शर्म से कुछ लेना देना नहीं होता, इस लिए ऐसा कह कर शर्म को शर्मिंदा ही करते हैं हम लोग. अदालत ही इन्हें ऐसा करने से रोक सकती है.

अभिषेक ओझा said...

मुफ्त तक पहुचने के बाद भी ये कहाँ रुकने वाले हैं... कल कोई मुफ्त घोषणा करेगा तो अगले दिन कोई ये भी कह देगा की हर किलो पर एक किलो नमक भी देंगे दोनों मुफ्त !

makrand said...

bahut khub sir
regards

रौशन said...

जैसे बाजार लगा हो अगले से कम रेट बोलने की धुन सवार हो
कांग्रेस क्यों और कैसे बोले अजीत जोगी ने क्या क्या किया था कुछ बाहर आया?
अब एहसान है भाई

सागर नाहर said...

बिल्कुल सहमत... हमारे यहां आंध्र प्रदेश में भी यही हाल है। जिसकी जब जो इच्छा होती है घोषणा कर देता है। कभी दो रुपये किलो चावल तो कभी बिजली मुफ्त..

विष्णु बैरागी said...

आपकी पोस्‍ट पढकर एक सूक्ति याद हो आई - नेता अपने समर्थकों के कन्‍धों पर चढकर कुर्सी पर पहुंचता है और विरोध्रयों से मिल कर राज करता है ।

NIRBHAY said...

hum tumhare ko sab Chanval, Bijli, road free denge, aaram se ghar me baith kar khate raho, TV me film dekho, cricket dekho, aur ether hum currencies khaenge. Pade raho apne gaon me hi, fir se inko Aadimanus banane ki tayyariyan chal rahi hai.
Note:- 1000 Unit bijli paida karne ke liye generation plant lagane ko fix capital cost 6,00,00,000/- six crores lagta hai.
Running cost bhi mahangai se kafi badh gaya hai.

ELECTION COMMISSION MUST LOOK IN THE MATTER. THERE SHOULD BE A CLEAR CUT LAW THAT THE INFRASTRUCURAL POLICY AND THE ELECTION AGENDA OF PARTIES MUST NOT INFRINGDE EACH OTHER.

FIR YEH SAMJHO KI INDIA KI INFRASTRUCTURE POLICY AND US ME PAISA LAGANA & uss PAR MILANE WALA INTEREST JO KI HIGHEST RAHTA HAI KI HAALAT lehman bros SE BOORI HOGI. "Mool, Sood, dono gol " kis se mangne jaoge.

Ganimat hai kisi party ne yeh nahi declare kiya ki kisi ke khet se bhi kat kar Dhan le jaa sakte ho..

garibon ko aur garib banana in haramkhoron ka kam hai. madhaym varg hamesha ki tarah pista rahe rs.26 kilo chanval lekar aur elecric connection lekar. jahan ek taraf yeh rs.1/- & rs. 0/- me gaon me available hai

प्रदीप मानोरिया said...

ब्लॉगजगत से लम्बेस्माया तक गायब रहने के लिए माफी चाहता हूँ अब वापिस उसी कलम के साथ मौजूद हूँ . आपने बहुत सटीक लिखा है सब बदमाशों की फौज है जनता के पैसे से जनता के वोट खरीदने वाले चोर हैं सब