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Tuesday, June 9, 2009

ये तो चमत्कार हो गया प्रभू!

आधी रात को नींद मे ऐसा लगा की कोई आवाज़ दे रहा है।मन का भ्रम जानकर मैने करवट बदली तो आवाज कुछ तेज हो गई और कुछ पल बीते नही कि ऐसा लगा कोई मुझे हिला रहा है।थोड़ा सा ड़र भी लगा मगर मेरी हिम्म्त देखिये मै बिना आंखे खोले चुप-चाप पड़ा रहा।फ़िर ऐसा लगा कि किसी ने जोर की लात मारी हो,और मैं चौक गया शादीशुदा तो हूं नही कि सुबह ज़ल्दी उठना है बच्चों को स्कूल छोड़ना है और दुनिया भर के लफ़्ड़े। अकेला सोता हूं फ़िर ये सब क्या हो रहा है।कंही भूत-प्रेत का चक्कर तो नही?अब तो मुझे पसीना आने लगा।पतली गली से सटकने का मै आंखे मूंदे प्लान बना ही रहा था कि फ़िर एक लात पड़ी और गरज़दार आवाज भी सुनाई दी,अबे उठ सच मे अलाल है तू।मै चमककर उठा और देखता क्या हूं कमरा हज़ार वाट की लाईट से भी ज्यादा चमक रहा था,और साम्ने देखा तो रूह कांप उठी।



सामने बर्फ़ सी सफ़ेद दाढी वाले कोयले से भी काले महाराज खड़े थे।पीले सोने के जेवरो से साऊथ के किसी मोटे रईस की तरह टाप टू बाटम ब्लैक एण्ड येलो।मै सहम गया फ़िर अचानक़ मुझे ख्याल आया अरे साला ये यमराज तो नही?कंही अपना आरएसी का टिकट कन्फ़र्म तो नही हो गया?कंही कोई क्म्प्लेन पर फ़ाईनल हियरिंग तो नही हो गई?अभी तो लाईफ़ शुरू भी नही और दी एण्ड?घबरा कर सीधे करिया(छत्तीसगढीमे काले को करिया कहते हैं) बाबा की ओर भागा।बाबा फ़ट से गायब्।मैने चैन की सांस ली और सोचा शायद डरावना सपना देख रहा हूंगा।पर ये क्या पीछे से आवाज आई लोग सही कहते थे तू मरखने सांड़ से कम नही हैं।सुबह फ़ोन लगाओ त्प गाली बकता है नींद से उठाओ तो चिड़चिड़ाता है मगर तू तो उससे भी ज्यादा खतरनाक निकला सीधे वार करने पर उतर आया।मेरे तो पैर के नीचे की टाईल्स,कांक्रिट उसके नीचे के फ़्लोर की टाईल्स और जाने क्या-क्या सब किसक गये।



मै बोला महाराज आप कन्फ़्यूस हो रहे है मै तो आपसे माफ़ी मांगने के लिये आ रहा था।करिया बाबा फ़िर गरजा,तू ढीठ है ये तो पता ही था मगर इतना ज्यादा होगा ये पता नही था। अब तक़ मै सम्भल चुका था स्कूल से भाग कर पकडाते समय गुरूजी लोगों के सामने चिरौरी करने मे कभी अपनी मास्टरी रही है।सो अपने अन्दर बचपन से सो रहे, ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार को जगाया और महाराज से अपनी आवाज मे बोतल भर कर रूह अफ़्ज़ा ऊंडेल कर कहा नही सर ऐसी कोई बात नही है आपको क्न्फ़्यूज़न हो गय……क्या कहा कन्फ़्यूज़न और मुझे?साले ब्रूस ली और जेट ली से ज्यादा खतनाक स्पीड़ से अटैक कर रहा था और मुझे बता रहा है क्न्फ़्यूज़न्।मैने हथियार डालने की बजाये दुनिया की सबसे सटीक वी टू वी यानी वाईस टू वाईस मिसाईल चापलुसी 1000 निकाली और कहा कि सर आपकी अंग्रेजी तो बहुत बढिया है और प्रोनंसियेशन तो मानना पडेगा।



करिया बाबा के चेहरे पर हैरानी के भाव उभर आये।उन्होने तत्काल कलाई मे बंधे घड़ीनुमा यंत्र मे कुछ खिट-पिट की और कहा कि तुम्हारे रिकार्ड मे ये तो है ही नही।अब मुझे गारंटी हो चली थी कि करिया और कोई नही यमराज ही है।साला पूरा रिकार्ड कम्प्यूट्राईज़ड करके आया है।मैने सोचा गये बेटा अनिल सारी इच्छाये मन मे लिये निकलना पड़ेगा।तभी अंदर छीपा पत्रकारिता का कीड़ा कुलबुलाया और मन मे बहुत से सवाल अंगड़ाई लेने लगे।एक तो डर भी लग रहा था कि ले दे कर कन्फ़्यूज़ कर पाया हूं करिया बाबा को अगर सवालो से सेम आईटम होना कन्फ़र्म हो गया तो गये काम से।इसके बावज़ूद रिस्क लेने की आदत ने मेरी जीभ मे खुजाल मचा दी।मैने किसी डाक्टर,अफ़सर निरीह बाबू-पटवारी से सवाल पूछने की बीरू स्टाईल को ड्राप करते हुये किसी अडियल मंत्री-संत्री को फ़ेंकी जानी वाली अंडर आर्म स्लो बाल की तरह सवाल फ़ेंका महाराज आपने वो बही खाते वाला स्टाईल छोड कर कम्प्यूट्….……एक मिनट कहकर बाबा ने फ़ि कलाई मे बंधे यंत्र मे ऊंगली की।मैने सोचा गये बेटा काम से अब उधर से कन्फ़र्म होता ही अपना रिटर्न टिकट्।मै सोच ही रहा था कि करिया बाबा बोले,अबे ये तो तेरा स्टाईल नही है?



मारे डर के मेरा बुरा हाल था।मैने अपने को और थोडा साफ़्ट करने की कोशिश की ठीक वैसे ही जैसे कभी अपने मालिक के सामने खडूस संपादक को बनते देखता था।वो आईडिया ऐसे आड़े वक़्त मे काम आयेगा सोचा भी न था।मैने कहा सर ये तो आपका बडप्प्न है वर्ना हम जैसो का कंहा कोई स्टाईल?स्टाईल तो आप जै………… मेरी बात आधे मे काट कर ही उन्होने कहा बेटा जितना चाहे ट्राई मार,मै गलत हो ही नही सकता।कन्फ़र्म करके आया हूं।मैने सोचा अब जाना तो है ही क्यों न अपनी ओरिजिनल स्टाईल मे ट्राई किया जाये।मैने ढेर सारे असाईंमेण्ट लेकर निकले फ़ोटोग्राफ़र की तरह करेले से भी कड़ुई आवाज़ मे पूछा ठीक है ठीक है जाना किसमे है उसी करिया भैंसे पर या कोई नया प्लेन ले लिया है।



प्लेन,भैंसा?ये क्या बडबडा रहा है बे।मैने कहा आपने कहा ना मैं कन्फ़र्म करके आया हूं।तो बाबा ने पूछा।तो क्या जब कन्फ़र्म हो ही गया है तो बिना ले जाये तो छोड़ोगे नही?हैरान-परेशान बाबा ने पूछा कंहा?मैने सवाल किया कंही ले जाना नही तो यंहा काहे को आया बे कालिया,आधी रात को नींद हराम करने।कालिया सुनते ही करिया बाबा के चेहरे धधकने लगा पर दूसरे ही क्ष्ण वे शांत हो गये।उन्होने फ़िर से यंत्र मे ऊंगली की और कहा कि तुम मुझे क्या समझ रहे हो।मैने चीढ कर कहा कि इतना खूबसुरत करिया इन्द्र तो हो नही सकता?उन्होने कहा कि बिल्कुल ठीक।मैने कहा क्या ठीक।उन्होने फ़िर कहा ठीक सम्झे मै इन्द्र नही हूं,तो,तुम बताओ।यमराज के सिवाय और कौन हो सकते हो?अबके करिया बाबा जोर से हंसे। ऐसा लगा कि मानसून पूर्व के अंधड़ो मे बिजली कड़क रही है।



करिया बाबा ने कहा कि जभी चिड्चिडा रहा है। अबे सुन बड़ा तीसमारखां समझता था अपने आप को।कैसे यूपीए की तरह हवा निकल गई।सुन मै यमराज नही भ्रष्ट्रराष्ट्र हूं।भ्रष्टराष्ट्र?ये कौन सा नये टाईप का देवता आ गया?मेरे मे मन मे उमड रहे शंका-कुशंकाओ के बादलो को कैसे करिया बाबा ने साफ़ किया और वे मेरे पास क्यों आये थे ये बताऊंगा अगली कड़ी मे।

19 comments:

डॉ .अनुराग said...

इतनी रात गए दरवाजा खुला खोलकर सोयेगे तो ऐसे ऐसे देवता ही आयेगे...वैसे भी शायद chourassi hazaar के kareeb देवता है ,किस किस को sambhalenge

Shiv Kumar Mishra said...

बहुत मज़ा आया पढ़कर.

भ्रष्टराष्ट्र!!! बड़ा धाँसू नाम लग रहा है. ये धृतराष्ट्र के कुछ लगते हैं क्या?
खैर, अगली कड़ी में पता लगने की संभावना है.

Science Bloggers Association said...

दरवाजे को बंद करके सोने में ही भलाई है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

बहुत खूब.. अगली कड़ी का इंतजार है..

अनिल कान्त : said...

kya baat hai beedu
ekdum chakachak post nikala hai
mazaa aa gaya ...bole to jhakaas !!
:):)

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

भूमिका कुछ लम्बी हो गई। लेकिन अगली कड़ी में भ्रष्ट्रराष्ट्र जी का परिचय जानने की उत्कंठा जरूर उत्पन्न हो गई है।

cartoonist anurag said...

bada hi khatarnaak devta ke darshan kar liye aapne

बी एस पाबला said...

ये बात तो उस कालिया भ्रष्टराष्ट्र ने ठीक कही कि ये स्टाईल तो नहीं है आपकी।

ऐसी हास्य-व्यंग्यात्मक शैली! क्यों कन्फ़्यूजवा रहे हैं भई!!

दीपक said...

"लोग सही कहते थे तू मरखने सांड़ से कम नही हैं।सुबह फ़ोन लगाओ त्प गाली बकता है नींद से उठाओ तो चिड़चिड़ाता है मगर तू तो उससे भी ज्यादा खतरनाक निकला सीधे वार करने पर उतर आया "


और हमे चिडचिडे लोग पसंद है !

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

आगे देखें करिया किस रंग के निकलते हैं!

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

जिज्ञासा जगा दी आगे का इंतज़ार

राज भाटिय़ा said...

अनिल जी भई आप को किस ने कह दिया की शादी शुदा (ताऊ को छोड कर ) आदमी की वीवी उसे लातो घुंसो से जगाती है:)
लेकिन इस सब के बाबजुद भी आप की यह कहानी ओर करिया बाबा अच्छे नही,अजी बहुत अच्छे लगे इंतजार रहेगा अगली कडी का.
धन्यवाद

गौतम राजरिशी said...

:-)
अगली कड़ी का इंतजार

P.N. Subramanian said...

भैय्या हमें तो भूमिका बड़ी अच्छी लगी. अब अगली वाली भी वैसे ही होनी चाहिए

venus kesari said...

आपकी पोस्ट पढ़ कर लगा भगवान् ने दर्शन दे कर कहा हो बेटा मुह बाओ अभी अमृत टपका रहे है और जब हमने मुह बा दिया तो भगवान् ने कहा बेटा मुह फाड रहो और अगली पोस्ट का इंतज़ार करो :(

वीनस केसरी

Mired Mirage said...

रंग की बात नहीं होनी चाहिए। फिर हम कहते हैं कि आस्ट्रेलिया में रग भेद है। :)
कारिया बाबा को बेरंगा बनाइए।
घुघूती बासूती

Arvind Mishra said...

आगे देखते हैं की आर ये सी कन्फर्म तोनही हो गया

woyaadein said...

मुझे तो लगता है यह भ्रष्टराष्ट्र कोई आसुरी शक्ति है जो आपके सच्चाई का आईना दिखाने वाले आलेखों को पढ़कर ही आया है......सोचता होगा इस भ्रष्टाचार के युग में किसकी इतनी हिम्मत जो सीधी-सच्ची बात लिख रहा है.......सावधान हो जाइए .....इसके चेले-चपाटी बहुत हैं, कहीं वे भी ना आ धमकें......

साभार
हमसफ़र यादों का.......

ताऊ रामपुरिया said...

करिया बाबा की जय. अगली कडी का बेसब्री से इंतजार है..जल्दी लिखिये..

रामराम.