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Monday, June 22, 2009

उस्ताद ये साले शाइनी का कुछ करना पड़ेगा!मरवा दिया है साले ने!

कल सारे दोस्तों को एक सगाई के कार्यक्रम मे बुलावा था।सब ने ग्रुप के नियमो के अनुसार सबने एक दूसरे से फ़ोन पर सम्पर्क कर जाने का प्रोग्राम पूछा और सब इकट्ठा हो गये है।महफ़िल के बीच एक अलग महफ़िल हम लोगो की जम गई।महफ़िल जंवा होते-होते एक साथी अचानक़ उखड़ गया।बोला उस्ताद ये साले शाईनी के खिलाफ़ कुछ करो तो साले ने मरवा दिया है।सब हड़बड़ा गये बोले क्या हो गया यार?यार वार कुछ नही उसके खिलाफ़ कुछ करो,एकदम सालिड,निपटाई दो साले को।



अच्छा भला इंट्रस्ट्रिंग लोकल टापिक चल रहा था कि ये शाईनी आ टपका। शाईनी की एण्ट्री सब को खली।अच्छा भला पुराना सदाबहार टापिक चल रहा था।पुराने दिनो की असफ़ल प्रेम कहानियां फ़िर से जवां हो रही थी।पुरानी हिरोईनों के साथ-साथ उनके मुंहबोले भाईयों के खतरो का जिक्र भी चटखारे ले ले कर सुनाई जा रही थी।मैने कंझा कर कहा तेरे को शाईनी से क्या प्रोब्लम है बे।



वो बोला उस्ताद तुम तो हो कुंआरे,तुम क्या जानो हमारा दर्द।मै बोला अबे बतायेगा भी या?देखो उस्ताद ये शाईनी वाले लफ़ड़े के बाद से ना घर मे प्राब्लम शुरू हो गया है और ये प्राब्लम सबके घर मे शुरू होगा।सब बोले तेरे घर का लफ़ड़ा सबके घर मे क्यों जायेगा बे?सुन लो सालो हंसो मत्।जब ये आग तुम्हारे घर को झुलसायेगी तब पता चलेगा।अबे क्या लंद-फ़ंद बक रहा है?कुछ बतायेगा भी या लगी-फ़टी मे बड़-बड़ किये जायेगा।अबे सालों ये तो दूसरा ही पैग है।इत्ते मे कब लगी है बे,बताओ तो ज़रा।मैने मामला सुल्झाने के हिसाब से आऊट हो रहे सेठ को सम्हाले की कोशिश की और पूछा कि क्या हुआ ये तो बता?

वो बोला यार उस्ताद तू तो अपन को बचपन से जानता है।अपन लंगोट का पक्का है कि नही बता?मै बोला नही यार इस मामले मे तेरा रिकार्ड तो ठीक ही है,पर हुआ क्या?अरे होना क्या था,मेरी अकल मारी गई थी और कुछ नही।अबे बतायेगा या?बता तो रहा हूं।सुबह-सुबह तेरी भाभी काम को लेकर कामवाली बाई से कच-कच कर रही थी।फ़िर?फ़िर् क्या,मैने झंझट को टालने के लिहाज से कह दिया कि क्यों कट-कट कर रही हो ठीक तो काम करती है बेचारी।फ़िर?फ़िर क्या बे!आफ़त आ गई।तेरी भाभी उसको काम से निकालने पर उतारू हो गई।तो निकाल देना था ना बे उसको!अरे यही तो गल्ती हो गई।मैने मैडम से कह दिया किया आजकल अच्छी नौकरानियां मिलती कंहा है।देख तो रही हो आजकल का हाल?साले तो तुझे ये सब बकवास करने की ज़रूरत क्या थी।अबे आगे सुनोगे या………। बता साले बता।

वो बोला मेरा नौकरानी का फ़ेवर करना अपने ग्रूप के लिये प्राब्लम बन गया।अबे इस्मे ग्रुप कंहा से आ गया बे?अबे जब मेरा कामवाली बाई को फ़ेवर करना तेरी भाभी को जमा नही तो उसने उसी समय उसे काम से निकाल दिया।फ़िर?फ़िर क्या।वो साली भी अपने बाल बच्चों का रोना रोते हुये मेरे पास कमरे मे आई और जब मैने मदद करने से इंकार कर दिया तो रोते-रोते बाहर निकल गई।फ़िर?क्या फ़िर-फ़िर लगा रखी है बे!मै कोई तुम्हारी नानी हूं सालो जो कहानी सुनते समय की फ़िर-फ़िर लगा रखी है। अबे आगे क्या हुआ वो पूछ रहे हैं।आगे क्या होना था उसे मेरे कमरे से निकलते और रोते देख तेरी भाभी के दिमाग मे शक का बैक्टिरिया जर्मिनेट हो गया और उसके इंफ़ेक्शन ने सीधे उसके दिमाग मे डाऊट का बवंडर उठा दिया।फ़िर?अबे फ़िर वही फ़िर?सालो उसे मुझमे शाईनी नज़र आ गया।क्या?हां सालो वो अनुपमा भी नही है जो ये कहे मेरा पति मेरा देवता है।उसके बाप को तो जानते ही हो अमरीश पुरी का भी बाप नज़र आता है।मां ललिता पवार और मनोरमा का होमोजिनस मिक्सचर है।भाई तो साले गुलशन ग्रोवर,शक्ति कपूर से कम नही है।फ़िर?अबे ये फ़िर,फ़िर जान ले लेगी सबकी।सबकी क्यों बे?इस बार मैने कहा।

उसने कहा तू तो साले छुट्टा सांड है लेकिन बाकी सब तो मेरे समान कोल्हू के बैल हैं।सब बोले क्या बक रहा है बे?मै अकेला बकरा नही हूं बे तुम सब भी बकरे हो मनाओ साले कब तक़ खैर मनाओगे?क्या हुआ भाई?एक ने थोड़ा नार्मल होते हुये पूछा।वो बोला अब कैसे?साले खसक गई ना हवा।सुनो बे जब मेरी मैड़म ने नौकरानी को काम से निकाल्ने का फ़रमान जारी किया तो मैने उस बेचारी को बचाने के लिये लास्ट ट्राई किया,और उसे माफ़ करने के लिये कहा।फ़िर?फ़िर क्या बे मैडम भड़क गई और उसने मुझसे पूछा कि आपके कितने दोस्त अपने घर की नौकरानियों को फ़ेवर करते हैं?फ़िर?फ़िर क्या बे मेरे मुंह से निकल गया सभी करते हैं।सभी अपने नौकरों को प्यार से रखते हैं,तुम्हारी तरह नही?साले ये क्यों बका तुने?अचानक पुलिस का सबसे कड़क अफ़सर रिरिया कर बोला।मरवा दिया साले तू तो जान्ता है कि मेरी मैडम कितनी शक्की है।मरवा दिया साले अब तो छुप-छुप के पीना भी हराम हो जायेगा।साले बाल तक़ डाई करने नही मिलेगा।तुने हम लोगो के बारे मे कुछ और तो नही बताया।मैने तो कुछ नही बताया,मगर वो बड़बरा रही थी।कल सब भाभी लोगों से बात करुंगी सभी एक ही थाली के चट्टे-बट्टे लगते हैं।मरवा दिया साले।मैने मरवाया है?तो और किसने मरवाया है साले?अबे ये सब लफ़ड़ा उस साले शाईनी का है वरना इससे पहले कभी कोई लफ़ड़ा हुआ था क्या?इसिलिये कह रहा हूं कि कुछ क्रो बे शाईनी के खिलाफ़ है।साले ने मरवा दिया।

24 comments:

AlbelaKhatri.com said...

gazab ka kaam kiya bhaiji !
anand kara diya !
badhaai !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

इस शैली में आप की लेखनी खूब चलती है। पर उधर नौकरानियों ने यूनियन बना ली है उन को खतरा पैदा हो गया है नौकरी जाने का। अब कहती हैं जहाँ भी काम करेंगी दो एक साथ करेंगी। इधर नौकरानी खर्चा डबल हो गया है।

राज भाटिय़ा said...

वाह हमारी घरवाली ने तो नोकरनी निकाल के हमे ही उस की जगह बिठा दिया, आप की यह कहानी पढ कर, बोली ना रहेगा बांस ना बजेगी बासुरी...
राम राम क्या जमाना आ गया अभी तो नोकरानियां भी ३३% कोटा मांगे गी सुना है.
राम राम जी की

मुझे शिकायत है
पराया देश
छोटी छोटी बातें
नन्हे मुन्हे

Udan Tashtari said...

अब रास्ता भी क्या है. नपवाईये शाईनी को.

Arvind Mishra said...

आपकी आशंका सोलहो आने सच है -भाई मैं तो आपका यह खबर्दारिया लेख पढ़ आगाह हो लिया हूँ -औरों का नहीं प़ता !

डॉ. मनोज मिश्र said...

kya khoob likh hai ,vaah.

अजय कुमार झा said...

शाईनी के सईद एफ्फेक्ट्स .....इत्ते गहरे ...और इत्ते खतरनाक......अब तो नौकरानी को कभी भी नार्राज नहीं करूँगा....

महामंत्री - तस्लीम said...

आजकल आपका सुर कुछ बदला हुआ है। क्‍या बात है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

PD said...

sahi hai.. :)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

kyA khoob kahi, kya khooB rahI.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

शाइनी यूं चला हो या न चला हो लेकिन, T.V. चैनलों पे खून शाइन कर रहा है.

योगेन्द्र मौदगिल said...

नौकर रखो भाई सारे के सारे.... नौकरानी नहीं..
लेकिन
एक बात का ध्यान रहे
कि कभी ये रिकार्ड ना बज जाये कि...........

बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं
आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं

दिगम्बर नासवा said...

आपकी shaili लाजवाब है लिखने की............. सही लिखा है आपने कुछ न कुछ तो करना padhegaa.......... क्यूँ न don को इसके peeche लगा diyaa जाए............. वो भी तो pareshaan होगा hamaari तरह

mahashakti said...

शाईनी तो बड़ा शाईन मारता है।

रंजना said...

हा हा हा ....बेचारे पति....कभी भी पतित साबित कर दिए जाते हैं.....

महेन्द्र मिश्र said...

सुना है नौकरानियाँ भी नौकरी में आरक्षण की मांग करने वाली है और मालिको के खिलाफ मानवाधिकार आयोग में शिकायत भी करने वाली है . हा हा हा . मजेदार प्रसंग .

डॉ .अनुराग said...

मामला विचारधीन है ओर आप ऐसे खतरे मोल ले रहे है !!!!!!!

Mahesh Sinha said...

जाके पांव न फटी बिवाई वो क्या जाने पीर पराई :)

कार्टूनिस्ट अजय सक्सेना said...

बढ़िया लिखा है भैय्या ...आपका वो दोस्त तो निर्दोष था ..पर सच तो यह है की हर तीसरे घर में 'शाईनी '
मिलेंगे बस फर्क यह है की इस शाईनी की नौकरानी ने हल्ला मचा दिया ...बाकी शाईनी के घरो में नौकरानीया पापी पेट और इज्जत के खातिर मुह बंद कर चुपचाप पगार ले रही है ..इनमे ऐसी भी बहुत है जो स्पेशल ' बोनस ' पा कर अपनी लाइफ स्टाइल को बेहतर करने में लगी है ...

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

JAY HO NAUKARAANI KI.
shabd par dhyan den KRIPYA....
....RAANI....

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

steek kaha aapke shadishuda dost ne .shaale shayni ne to sabko vivdaspd bna diya

Suman said...

nice

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

क्यों डरा रहे हो गुरू?
अब लगता है जिन्दगी घर के भीतर पहले जैसी नहीं रहेगी हम मर्दों की।

शाइनी, ये तूने क्या किया? :)

RAJ SINH said...

भैय्या हम निडर हैं . कोई खतरा ही नहीं है . यहाँ तो खुद ही राजा खुद ही प्रजा . खुद ही मालिक खुद ही नौकर .

नौकरानियां अफोर्डेबल ही नहीं हैं . और मशीने आरोप नहीं लगातीं , हम लगाते हैं .