Sunday, January 17, 2010

मैने उससे कहा कि तुम ब्लाग लिखना शुरू करो और उसने कर दिया!स्वागत करिये बिंदास नये ब्लागर मगर पुराने पत्रकार राजकुमार सोनी का!

राजकुमार सोनी यंहा का जाना-माना पत्रकार्।उस दिन मैं प्रेस क्लब मे प्रवेश कर रहा था और वो बाहर निकल रहा था,मैने उसे रोका और कहा चलो तुमसे बहुत दिनों से बात नही हुई है।वो साथ मे चला और फ़िर बातों-बातों मे मैने उससे कहा कि तुम अब ब्लाग लिखना शुरू करो बस।दो दिन नही बिते की उसने मुझे रोककर बताया भैया लिखना शुरू कर दिया हूं।मुझे इस बात की तो खुशी हुई ही कि एक ब्लागर और बढा साथ ही एक अच्छे पत्रकार को ब्लागर बनाने से छत्तीसगढ की बहुत से अनछुये विषय सारी दुनिया के सामने लाने के अपने प्रयास को आगे बढाने वाला एक साथी और मिलने से इस अभियान को थोड़ी और मज़बूती मिली। राजकुमार सोनी ज़िंदादिल,बिंदास और हमेशा हंसने-हंसाने मे विश्वास करने वाला।खुलकर बोलने और खुलकर लिखने वाला राजकुमार काफ़ी दिनो बाद मुझसे मिला था।इधर-उधर की बातों के बाद अचानक मैने ज़िक्र छेड़ा नीरज दीवान का।नीरज पत्रकारिता मे मुझसे जूनियर और ब्लाग जगत मे सीनियर।की-बोर्ड का सिपाही उसके ब्लाग का नाम है।और सच मे वो सच्चा सिपाही है।ज़िंदादिली का दूसरा नाम।आजकल दिल्ली मे इंडिया टीवी को सेवाएं दे रहा है।मैने नीरज के ब्लाग की तारीफ़ की और राजकुमार से उसे पढने के लिये कहा।फ़िर मैने सीधे फ़ोन कर नीरज से बात की और राजकुमार से बात कराई।पुरानी यादों को ताज़ा करने के बाद राजकुमार को मैने ब्लाग लिखने पर राज़ी किया।


राजकुमार मेरे साथ जनसत्ता मे काम करने वाला तीसरा पत्रकार है जो ब्लाग जगत मे आ रहा है।दो जूनियरों को तो आप सभी अच्छे से जानते हैं।पहला अवारा बंजारा यानी संजीत त्रिपाठी।ब्लागिंग मे मेरा गुरू।मेरा ब्लाग उसने बनाया और उसके कारण ही मैं इस दुनिया को जान पाया।दूसरा की-बोर्ड का सिपाही यानी नीरज दीवान वो भी मेरा जूनियर मगर ब्लागिंग मे मेरा सीनियर। और अब तीसरा जूनियर राजकुमार सोनी।बस अब एक और बच गया संजीव गुप्ता,जो आजकल पीटीआई को सेवायें दे रहा है।वैसे जनसत्ता मे हम सब के संपादक रहे अंबरीश कुमार भी ब्लाग जगत मे आ गये हैं।उनका ब्लाग है "विरोध" ।एक और जूनियर और एक और राजकुमार का अगर मैं यंहा ज़िक्र ना करूं तो ये उसके साथ नाईंसाफ़ी होगी।राजतंत्र और खेलगढ वाला राजकुमार ग्वालानी अब ब्लगजगत मे जाना पहचाना नाम है।


खैर बात हो रही है राजकुमार सोनी की और उसके ब्लाग "बिगुल" की।राजकुमार से मेरी पहली मुलाकात सालों पहले भिलाई मे।तब मैं दैनिक भास्कर मे था और मुझे भिलाई-दुर्ग संस्करण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।तब राजकुमार एक दुबला-पतला मरियल सा सूखा हुआ युवक था।उसके सालों बाद छत्तीसगढ राज्य बनने पर वो राजधानी से शुरू हुये जनसत्ता अख़बार मे आ गया।उन दिनों मैंने भास्कर को टाटा कर दिया था।तब अंबरीश जी ने मुझे बुलवाया और मुझे चीफ़ रिपोर्टर की ज़िम्मेदारी सौंपी।जब मैने काम करना शुरू किया तो मुझे त्रिदेव के दर्शन हुये।राजकुमार सोनी,संजीत त्रिपाठी और नीरज दीवान,फ़िर संजीव गुप्ता,अनुभूति और एक अन्य युवती की तिकडी के।उनमे से से लड़कियों को छोड सब को जानता ही था।खूब मज़े से नौकरी की।राजकुमार स्वभाव से मेरे से भी ज्यादा लड़ाकू था।और समाचारों के लिये उसे लड़ते-झगड़ते देख मैं उसे समझाता था।उसके चक्कर मेरा समाचार संपादक अनिल सिन्हा से झगड़ा हो गया।उसे भी नौकरी छोडनी पड़ी और उसने कुछ दिन दैनिक भास्कर मे काम किया और एक माह भी नही हुआ था कि एक दिन उसका फ़ोन आया और उसने वापस जनसत्ता लौटने की इच्छा ज़ाहिर की।मैने उसकी वापसी मे मदद की।उसके जैसा जनवादी नौजवान शायद भास्कर की व्यावसायिक पत्रकारिता कोसह नही पाया।पूंजीपति व्यवस्था के खिलाफ़ खुलकर बोला करते थे संजीत नीरज और राजकुमार।लेकिन व्यवस्था से लड़ना और लगातार लड़ना धीरे-धीरे तोड़ने लगता है।शायद ऐसा ही कुछ हम सब के साथ भी हुआ।बात-बात मे आग उगलने वाला राजकुमार व्यावसायिक पत्रकारिता के इस दौर मे सुसुप्त ज्वालामुखी की तरह भीतर ही भीतर धधक रहा है।उसके भीतर उबल रहे लावे को शायद अब आप उसके ब्लाग बिगुल मे पायेंगे।उसे आपका समर्थन,सहयोग और आशिर्वाद मिला तो ब्लाग जगत को एक और शानदार ब्लागर को फ़लते-फ़ूलते देखने मिलेगा।उसका ब्लोग एड्रेस है।www.sonirajkumar.blogspot.com। और हां उसका ब्लाग बनाया है आरंभ वाले संजीव तिवारी ने।दुर्ग के इस ब्लागर की ब्लाग बनाने मे महारथ है और वो इस मामले हर किसी की निस्वार्थ मदद कर ब्लाग जगत को समृद्ध करने का पुण्य काम किये चला जा रहा है।उनकी जितनी तारीफ़ की जाये कम है।


18 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बहुत बढ़िया. अच्छा है कि ब्लागिंग में और गुणी लोग आएं.

अजय कुमार झा said...

आप लोगों की छत्तीसगढ टीम में खिलाडी बढते जा रहे हैं खुशी की बात है , अनिल भाई , आखिर कप्तान आप हैं नए साल में इस टीम में और बढोत्तरी हो यही शुभकामना है । अभी जाते हैं सोनी जी के ब्लोग पर भी
अजय कुमार झा

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सोनी जी का बिगुल देख आया हूँ। अच्छा ब्लाग है। वैसे फॉलो कर लिया है ब्लागर में पढ़ने को मिल जाएगा। लेकिन इसे ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत में जरूर लगवा दें। संजीव ये काम कर देंगे।
इस ब्लाग से छत्तीसगढ़ के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलेगा।

ललित शर्मा said...

स्वागत है राजकुमार भाई का

जी.के. अवधिया said...

एक और नया साथी पाकर बहुत ही खुशी हुई अनिल जी़! आपने बहुत ही नेक काम किया है!!

ali said...

स्वागत है

Suresh Chiplunkar said...

अभी जाकर टिपियाते हैं जी…
इतनी बड़ी-बड़ी हस्तियों के नाम इस पोस्ट में आपने लिख दिये हैं कि सोनी जी का ब्लॉग देखना ही पड़ेगा…। चेहरे-मोहरे से भी आपके भाई जैसे लग रहे हैं…।
संजीव तिवारी जी को मेरी तरफ़ से भी हार्दिक बधाईयां दे दीजिये… हिन्दी ब्लाग को बढ़ाने में जो लोग भी सहयोग करते हैं उन्हें नमन करना ही चाहिये…

डॉ महेश सिन्हा said...

स्वागत राजकुमार का

विरोध said...

soni ki bhasha blag me theek lag rahi hai jald hi kuchh aur rochak post padhne ko milegi .aap logoa ko padhte huye bahut khushi hoti hai .ek baar aur badhaai .un ladkiyon ko bhi aage badhaye jinhone aap ke sath jansatta me ek team ki tarah kaam kiya tha .
ambrish kumar

Arvind Mishra said...

स्वागतम !

Dipak 'Mashal' said...

Ye bhi khoob rahi... Rajkumar ji ka is sachche dilwalon aur bebaki ki dunia me swagat hai...
Jai Hind...

खुशदीप सहगल said...

अनिल भाई,
आपने बिगुल बजा दिया है तो राजकुमार जी के अंदर की आग़ जल्दी देखने को मिल ही जाएगी...लेकिन जिस तरह आप नए ब्ल़ॉगर भाइयों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, वो अपने आप में दिल को छूने वाला है...और एक बात और
आप यारों के यार हैं...

जय हिंद...

Vivek Rastogi said...

अनिल भाई आपको बहुत बहुत बधाई और सभी ब्लॉगर भाईयों को जो आपके साथ हैं, अब तो बहुत कुछ पढ़ने को मिलेगा, पत्रकारों की कलम से जो कि अखबारों मॆं पढ़ने को नहीं मिलता है।

राज भाटिय़ा said...

अनिल जी आप ने बहुत अच्छा किया एक साथी ओर् बढ गया, स्वागत है राज कुमार जी का.

डॉ टी एस दराल said...

राज कुमार सोनी जी का स्वागत है।
पत्रकार हैं , तो अवश्य ही जल्दी ही स्थान बना लेंगे।
शुभकामनायें।

अभिनव said...

स्वागत है.

शरद कोकास said...

राजकुमार सोनी से मेरा परिचय उन दिनों हुआ जब वो कोरस नामक नाट्य संस्था का निर्मान कर रंग कर्म मे व्यस्त था । फिर पत्रकारिता के दौर मे वह मेरे पड़ोस मे आकर रहने लगा । रात मे जब वह घर लौटता था और दिन भर की गतिविधियों से भरा होता था ..मेरे टेबल लैम्प की रोशनी देखकर सडक से आवाज़ लगाता ..शरद भाई.. और फिर हम सडक पर खड़े -खड़े दो घंटा साहित्य चर्चा करते थे ..फिर रात दो बजे सभा विसर्जन के बाद अपने घर लौटते थे । ..खैर अब राजकुमार की बातें ब्लॉग पर पढ़ने को मिलेंगी इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है । संजीव को धन्यवाद और आपको भी । छत्तीसगढ़ की ब्लॉगर बिरादरी मे शामिल इस बहुआयामी ब्लॉगर का स्वागत है ।

महेन्द्र मिश्र said...

स्वागत है राजकुमार जी का ...