Sunday, February 21, 2010

लड़की,बिकनी और समुद्र का सीमेन्ट से क्या लेना-देना?

पेश है एक माईक्रोपोस्ट।मामला दिखने मे बहुत छोटा सा है लेकिन जिस्म ऊघाड़ू और घूरू प्रवृत्ती का उदाहरण है।क्या आपको पता है लड़की,बिकनी और समुद्र का सीमेन्ट से क्या लेना-देना?भई मुझे तो नही पता और अगर आपमें से किसी को पता हो मुझे भी बताईयेगा,मुझ अज्ञानी के भी ज्ञानचक्षु खुल जायेंगे।मैं बात कर रहा हूं टीवी पर दिखाये जाने वाले एक विज्ञापन की।विज्ञापन सीमेंट कम्पनी का है,जो हो सकता है आपकी नज़रों से भी होकर गुज़रा हो।इस विज्ञापन मे बलखाते समुद्र में से धीरे-धीरे एक लड़की बाहर निक्लती है।चेहरे से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरा जिस्म,एक चिथड़े मे थोड़ा ढंका और उससे ज्यादा खुला।उस लड़की की कातिल मुस्कुराह्ट के साथ विज्ञापन खत्म्।अब बताईये सीमेंट से लड़की,बिकनी और समुद्र का क्या लेना-देना है?सीमेंट कम्पनी को सीमेंट बेचना है तो मकान दिखाता,दुकान दिखाता,सड़क दिखाते,शहर दिखाते,लेकिन लड़की वो भी बिकनी मे समझ मे नही आया उसे दिखा कर सेल कैसे प्रमोट हो सकती है?सबसे कमाल की बात तो ये है कि इस देश मे विज्ञापनों के लिये एक रेग्यलेटरी बोर्ड़ भी बना है।पता नही उसे क्या ठीक लगता है क्या ठीक नही,पर मुझे तो ये ठीक नही लगा,आपको क्या लगता है बताईयेगा ज़रूर्।

51 comments:

PD said...

अभी कुछ दिन पहले इसी पर दोस्तों के साथ कुछ बातें हो रही थी.. एक दोस्त बोलता है, "पता नहीं क्या दिखाना चाहता है." दूसरा कहता है, "मुझे तो उस सीमेंट का नाम तक याद नहीं है." तीसरा कहता है, "मुझे तो उस लड़की का चेहरा भी याद नहीं."
तीसरे की बात सुन कर सभी हँसने लगे, और वह अपना दिमाग खुजाने लगा की उसकी किस बात पर लोग हंस रहे हैं.. :)

Vivek Rastogi said...

अनिल भाई, क्या लेना-देना है अगर आपको पता लग्गे तो हमें भी जरुर बताईयेगा, हम भी इंतजार कर रहे हैं कि आखिर ये गुलाबी मांस का उपयोग क्यों होता है ।

जी.के. अवधिया said...

"सीमेंट कम्पनी को सीमेंट बेचना है तो मकान दिखाता,दुकान दिखाता,सड़क दिखाते,शहर दिखाते,लेकिन लड़की वो भी बिकनी मे समझ मे नही आया उसे दिखा कर सेल कैसे प्रमोट हो सकती है?"

आप भी कैसी बातें करते हैं अनिल जी? मकान, दुकान, सड़क में क्या रक्खा है जो कोई देखेगा? देखने वाली चीज को ही तो देखा जाता है ना!

अब जिस लड़की को देखा है उसे किसने दिखाया यह भी तो लोगों को याद रहता है। जिसने दिखाया वह सीमेंट कंपनी है तो हो गई ना सेल प्रमोट!

Suresh Chiplunkar said...

भाऊसाहेब, लड़की-बिकिनी और सीमेंट का वही रिश्ता है जो लड़की-बिकिनी और शेविंग क्रीम का है… :) :)

बी एस पाबला said...

चलिए बताईए कि
सीमेंट कौन खरीदेगा? -आदमी
आदमी, सीमेंट खरीद कर क्या बनाएगा? - मकान
मकान कहाँ बनाए जाने की तमन्ना होती है? - समंदर किनारे
मकान में आदमी के साथ कौन रहेगा? -लड़की
लड़की, बाजू वाले संमदर में क्या पहन कर नहाने जाएगी? - बिकिनी
अब, समंदर से नहा कर निकलते हुए क्या कुछ दिखेगा? - बिकिनी पहन कर इठलाती आती लड़की!

वही तो दिखाया जा रहा!! :-)

बी एस पाबला

Mithilesh dubey said...

अरे वाह अनिल भईया क्या बात है , मै भी सोच ही रहा था कि इसका क्या मतलब है , भाई विश्वास कहाँ है, देखते है कोई बता पाता है कि नहीं ,। अब देखता हूँ उन महिलाओं को जो महिला वादी होने के राग अलापती है , ये जो कुछ भी ये महिलाओं का मात्र बाजारिकरण हो रहा है , ये प्रगतिवादी महिलायें इसे अपना अधिकार और अपनी आजादी समझती हैं , लेकिन माजरा कुछ और ही है । ये वह समय है जब महिलायें खूद आगे आयें और अपनी सूरक्षा खूद करें , नहीं तो अगर सबकुछ ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में सत्री की स्थिति और भी बदतर हो जयेगी ।

चंदन कुमार झा said...

अद्भुत विज्ञापन !!!

अनूप शुक्ल said...

विज्ञापन तो मैंने नहीं देखा लेकिन आपके विवरण से उसकी व्याख्या प्रस्तुत है: समुद्र के लड़की निकलती है,सागर के सीने में उथल-पुथल मच जाती है वह खलबला जाता है लड़की उसका साथ छोड़कर जा रही है तब तक सीमेन्ट आता और उससे उसको भरोसा होता है कि उसका साथ सीमेन्ट के जोड़ सरीखा टिकाऊ है। :)

ताऊ रामपुरिया said...

बात यह है कि आजकल सीधे सीधे कोई बात मानता नही है तो इस तरीके से दिखानी पडती है, जिससे उस पर ध्यान जा सके.:)

रामराम.

ali said...

अनिल भाई
आप भी कमाल करते हैं क्या विज्ञापन दिमाग का इस्तेमाल करने के लिए बनाये जाते हैं ? भाई इनका पहला उद्देश्य ही ये होता है कि अपना दिमाग कोने में धरो , प्रोडक्ट पर पैसा खर्च करो ! होली आ रही है आपको कहना चाहिये था अरे ये तो बड़ा जोरदार विज्ञापन है और इसके अर्थ खोजने चाहिए थे जैसे :
(१)...युवतियों से घर बनते हैं और ...सीमेंट युवतियों की पहली पसंद
(२)...सीमेंट साथ है तो समुद्र की प्रचंड लहरें कोमलांगियों का क्या बिगड़ लेंगीं
(३)...सीमेंट के साथ अप्सरायें फ्री
(4)...सीमेंट जीवन में सुख की संभावनायें प्रबल करे
(५)...लड़की जितना सुन्दर घर ...सीमेंट से
(६)...विवाहोत्सुक ...सीमेंट वापरें
(७)...सीमेंट समुद्र मंथन से निकला था भूल गये क्या
(८)...घर की आन / बान / शान और जान ...सीमेंट
उम्मीद करता हूँ कि होली के दिन ठंडाई का सेवन करते ही और ज्यादा अर्थ लिख पाउँगा ! फिलहाल आप पर भरोसा करके टिप्पणी को यहीं बंद कर रहा हूँ !
( बाज़ारवाद की जय हो ,विज्ञापन अमर रहें )

काजल कुमार Kajal Kumar said...

मेरा ख्याल है कि सीमेंट वाले लाला ने सोचा होगा कि समुद्र के पानी में से गर सीमेंट की बोरी निकलती दिखाएगा तो वह जम जाएगी...सो उसने बोरी की जगह लड़की निकाल दी होगी :)

Pradeep said...

aare...Anil Bhaiya...aap bhi na ..media wale....thoda kam rumani hote hai. Iis vigyapan ko 'thoda alag' aur 'vishwas' se dekhna parta hai.. agr aapne suna ho to is vigyapan ke aakhri me kya bolta hai- "kuchh bat hai.. Kuchh vishwas hai...********* cement"
To bhaiya ye vishwas hai...sabse pahle smundra ka..uska vishwass hai is ladki ke nahane se uske jo tamam pradushan hai sab dur hogaye aur pani bhi jyada namkeen ho gaya hai.... Ladki ka vishwas to uski aankho me hi dikhta hai ki cement ke liye "chhithdo" me samundra snan kar liya to steel ke liye bina.........khai chhodo bahiya apan sharif log hai us ladki par kendrit na hokar is vigyapan se jude dusare vishwaso ki baat kare jaise vigyapan dene wali cement company ko vishwas hai ki ek adhnanga jism dikhakar apna naam to kam se kam dekhne walo ke kano me unddhel hi lenge... Aapke Advertiement Regulatory board ka shayad ye vishwas ho ke cement jaisi rookhi cheej ka ye roop parosne ke baad unki jholee (?) me vajan bad jaye.. besirper ke vigyapan realese karne me.
Ab chho bhi Anil Bhaiya samsya aur bhi bahut sari sari hai par ek baat kahu pasand to ek emegapost jarur mar dena.. vo ye ki ek vishwas mera bhi hai iis vigyapan se vo ye ki pahle se sabse jyada madira bikri wale mere shahar me is vigyapan se aur sale bad gayi hogi.... kam se kam ek peg bhai log extra to shayad pakki....
Pranam

Kulwant Happy said...

आज के विज्ञापनों में क्या क्या सम्बंध हैं मत पूछिएगा। इंदौर में एक होर्डिंग लगा है, जिसमें एक लड़की साईकिल का टायर पहने हुए खड़ी है, जैसे वो टायर साईकिल के लिए नहीं बल्कि लड़कियों के निर्मित किया गया हो।

रही बात इस विज्ञापन की, तो वैसे कोई सम्बंध नहीं, शायद विज्ञापन बनाने वाला बहुत तेज था, वो गहराई में जाकर बात कहना चाहता था कि देखों आज के घरों की दीवारें कैसे सीमिंट से बनी हैं कि महिलाएं तोड़कर दीवारों को बाहर आ गई, कपड़ों से भी। अब आप इस सीमिंट से दीवारें बनाकर इनको फिर से अंदर डाल दो।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

इसका सीधा सम्बन्ध है. लड़की समुद्र से निकल रही है. इसका अर्थ है कि वह समुद्र में रहती है. समुद्र में रहती है इसलिये बिकिनी पहनती है. अब समुद्र में जो मकान बना होगा वह इतना मजबूत होगा कि पानी में डूबे रहने पर भी खराब नहीं होता. अब खराब इसलिये नहीं होता कि उसमें जो सीमेंट लगा है वह उम्दा क्वालिटी का है. हुआ न सीधा सम्बन्ध.

RAJNISH PARIHAR said...

बाज़ारवाद की जय हो.....

M VERMA said...

विज्ञापनो में जो कुछ दिखाया जाता है सिर्फ़ दिखाये जाने के लिये, आपसी सम्बन्धों के लिये नहीं.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अनिल भाई!
अब ये बात बहुत पुरानी हो चुकी। कहते जमाना गुजर गया। लोग फिर नहीं मानते तो नहीं मानते।

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa said...

कोफ्त होती है विज्ञापन से ज्यादा अपने विचारों को देख जो हमें क्या लेना टाइप के होते हैं।
दस में से शायद किसी एक को याद हो कि यह (अपशब्द रोकना पड़ रहा है) सिमेंट किस नाम और कम्पनी का है।

Arvind Mishra said...

बिलकुल बौड़म ही हो क्या अनिल भाई
इत्ती सी बात नहीं समझते

महफूज़ अली said...

भैया....यही ...तो मैं भी कहता हूँ..... इस ऐड को देखने के बाद मैंने भी यही सोचा था.... पर शायद ...यही बाजारवाद है....

महफूज़ अली said...

भैया....यही ...तो मैं भी कहता हूँ..... इस ऐड को देखने के बाद मैंने भी यही सोचा था.... पर शायद ...यही बाजारवाद है....

Ajay Tripathi said...

लड़की वो भी बिकनी मे समझ मे नही आया उसे दिखा कर सेल कैसे प्रमोट हो सकती है अनिल भय्या आप तो महिलायों खास कर लडकियों के शुभ चिन्तक और प्रेमी रहे है और आपको तो इसके सोंदर्य पर चर्चा करनी चाहिए आप कहा इस लफड़े में पड़े है आज की महिलायों को आप सिखाने जायेगे और वो दकियानूस कहेगे शायद आप ..........................तो छत्तीसगढ़ और प्रदेश के सीमेंट निर्माता संघ की कोटरी को अच्छे से जानते है जिसने जनता की चुनी सरकार को खरीद कर जनता के साथ द्रोपदी जेसा चीरहरन करते हुए रेट पर रेट बढ़ाये पड़े है और हम मूकदर्शक

लवली कुमारी said...

बाजार वाद के सह -उत्पाद हैं सब.

दिगम्बर नासवा said...

लेना देना तो पता नही ... पर आपने देखा .. ऐसे ही सबने उसे रुक कर ध्यान से देखा .. बस विगयापन सफल ...

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

कुछ भी हो अपने मकसद मे तो काम्याव हो गया यह सीमेंट

Udan Tashtari said...

नजर खींचने के तरीके के लिए कुछ भी कर सकते हैं विज्ञापन में...

डॉ महेश सिन्हा said...

सीमेंट से क्या क्या बनाया जा सकता है बताया जा रहा है

Mired Mirage said...

क्योंकि विज्ञापन सिमेंट का है इसलिए हमारी भी रुचि है। हम पति पत्नी अभी तक इसमें क्या खास है ढूँढ रहे हैं और आश्चर्य कर रहे हैं कि सिमेंट कम्पनियाँ कब से ऐसे विज्ञापन देने लगीं।
घुघूती बासूती

Mired Mirage said...

क्योंकि विज्ञापन सिमेंट का है इसलिए हमारी भी रुचि है। हम पति पत्नी अभी तक इसमें क्या खास है ढूँढ रहे हैं और आश्चर्य कर रहे हैं कि सिमेंट कम्पनियाँ कब से ऐसे विज्ञापन देने लगीं।
घुघूती बासूती

महेन्द्र मिश्र said...

यही समझिये जो रिश्ता चड्डी बनियान का पहिनने वाले से होता है ..हा हा हा रोचक पोस्ट ..

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

भैया जी इस विज्ञापन पर हमने भी एक पोस्ट लिखनी चाही थी किन्तु ब्लॉग की जागरूक महिलाओं के दर के कारण नहीं लिखी. वैसे भी हमारी महिलाओं से सम्बंधित पोस्ट पर महिलाओं ने अपना रोष ही जतायाहै.
इस पोस्ट पर देखिये स्त्री विमर्श और सशक्तिकरण का झंडा लेकर घूमने वाली किसी भी एक महिला का कमेन्ट नहीं आया है.
वैसे आप लड़की, बिकनी और सीमेंट का सम्बन्ध तो जोडिये........नहीं जोड़ पाए तो कैसे लेखक????
तीनो शब्दों में तीन वर्ण हैं.
तीनों के साथ सुरक्षा है.
तीनों को जयादा खुला छोडो तो खराबी आती है.
तीनों पर लगातार ध्यान देने की जरूरत होती है.

और सम्बन्ध हम निकाल कर पोस्ट करेंगे. (अब तो हम भी पोस्ट लिखेंगे इस विषय पर)
लिखने की हिम्मत देने का आभार
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

शरद कोकास said...

जिस विज्ञापन की ब्लॉग पर चर्चा हो उसे तो हिट होना ही है । आज का बाज़ारवाद चाहता भी यही है कि मुफ्त में उसे प्रसिद्धि मिल जाये ।

प्रवीण शाह said...

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आदरणीय अनिल जी,

आपके इस सवाल में ही मुझे तो वर्गवाद की बू आ रही है...भाई सभी के काम की चीज सीमेंट के एड में लड़की दिखा दी तो हंगामा खड़ा कर रहे हैं आप...पर आटोएक्सपो में हर कार और बाईक पर भी बिकनी जैसा कुछ पहने मॉडल लिपटी होती थी...तब तो कुछ नहीं बोले आप...

वैसे वह मॉडल अच्छी हैं सीमेंट भी अच्छा ही होगा...

आभार व ;)

राज भाटिय़ा said...

अरे हमार टिपण्णी किधर गया ??

venus kesari said...

aaj match dekhte samay ham bhee yahee baat kah rahe the :)

Pankaj Upadhyay said...

ha ha maine bhi yahi soncha tha.. kamal ka ad hai bhai..aur wo bhi aaj ke yug main jahan ad kranti aayi hui hai...

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

इन्ही सब के चलते हमने तो कब का टेलिवीजन देखना छोड रखा है....

दीपक 'मशाल' said...

ye to sach me sochne wali baat hai bhaia..
Jai Hind...

Pankaj Upadhyay said...

humari tippani bhi nahi hai.. kauno narazgi sahib? :)

RAJENDRA said...

cheer leaders kaa cricket se kya lena dena yeh bhee abhi tak meri samajh main nahin ayaa - koi dost madad karega?

Dr Satyajit Sahu said...

कल क्रिकेट मैच में जब यह विज्ञापन आ रहा था तो हम लोग भी यही सोच रहे थे
आपने बारीक़ बात नोटिस की है

Shiv Kumar Mishra said...

इस विज्ञापन से कवि का तात्पर्य यह है कि;

"समुद्र से निकलकर कन्या अपने पाँव बालू पर रखेगी. उसे बालू पर अपने पाँव रखने में हिचकिचाहट है. यही कारण है कि वह धीरे-धीरे पानी से निकल रही है. सीमेंट कंपनी उस कन्या से कहना चाहती है कि आप बालू से बिलकुल न डरें. हम आपको सीमेंट देंगे और आप उस सीमेंट को बालू में मिलाकर बीच को फर्श में कन्वर्ट कर लीजियेगा. हमें विश्वास है कि हमारा सीमेंट ख़ास है. आप जरा भी न डरें. फर्श ऐसी धाँसू बनेगी कि कोई 'जानी' यह कहने नहीं आएगा कि; आपके पाँव बहुत सुन्दर हैं, इन्हें बालू पर मत रखिये. मैले हो जायेंगे."

वैसे विज्ञापन जगत में छायावादी विज्ञापनों की कमी नहीं है. अगर कोई छायावादी पंडित मेरे इंटरप्रिटेशन को खारिज करता है तो सूचित करें. दूसरा तात्पर्य समझाया जाएगा.

संजय बेंगाणी said...

सिमेंट के बहुत सारे विज्ञापन आते है मगर आपके दिमाग से यह नहीं निकल पाया, एक पोस्ट भी ठेल दी. यही सम्बन्ध है :)

संजय बेंगाणी said...

हमारे घर में भी इसे लेकर सवाल खड़े होते है, कहते है क्या बकवास है. मैं कहता हूँ आप को बकवास लगी यही खास बात है.... वैसे मॉडल सुन्दर लेनी थी :)

aarkay said...

aaj subah hi mere bete ne yeh prashan poochh kar niruttar kar diya .

surya goyal said...

अनिल जी बधाई से पहले एक शिकवा की आपने मेरा दिल तोड़ दिया. वो इसलिए की मैं भी बहुत दिनों से इस पर कुछ लिखने की सोच रहा था लेकिन आज घूमते-घूमते जब मैं आपके ब्लॉग तक पहुंचा तो यहाँ लिखा मिला की लड़की, बिकनी और समुन्द्र का सीमेंट से क्या लेना देना. तो मै समझ गया की मेरा लेख पिट गया. लेकिन फिर भी मुझे ख़ुशी है की यह लेख मेरी गुफ्तगू का हिस्सा नहीं बन पाया तो कोई बात नहीं लेकिन जनता ऐसे विज्ञापनों को समझने लगी है. मेरी देरी का भी यही कारण था की मैं सिर्फ इसी विज्ञापन पर ही नहीं लिखना चाहता था. मैं मार्केट से कुछ और भी एकत्रित कर रहा था. जिस पर मैं बहुत जल्दी ही गुफ्तगू करने वाला हूँ. आपका भी मेरी गुफ्तगूमें स्वागत है.
www.gooftgu.blogspot.com

shubham said...

kya bat hai bhaiya.......

Mrs. Asha Joglekar said...

लेना देना ना भी हो तो कंपनी का प्रमोशन तो हो ही गया ।

अंकुर गुप्ता said...

इस विज्ञापन पर तो मेरा कभी ध्यान ही नही गया था. एक दिन मेरे नानाजी ने मुझे ध्यान दिलाया कि ये क्या अजीब विज्ञापन है. फ़िर मैने थोड़ा ध्यान दिया. और आज आपकी इस प्रविष्टि पर आई टिप्पणियों से हस हस कर लोटपोट हो गया.

Arvind k said...

यह छायावादी विज्ञापन है ..सब के समझ में थोड़ी न आएगा सिवाय "progressive" नारीवादियो के !! अब देखिये उनको समझ में आ गया वे लोग खामोश है !! एक आप लोग है जबरदस्ती interpretation पे interpretation किये जा रहे है ..भारतीय नारीवादियो के तरह गहराई में जा कर पहले समझना सीखिए ,खामोश होकर मनन करना सीखिए तब आप लोग जाकर ऐसे विज्ञापनों में छुपा गूढ़ अर्थ ढून्ढ पायेंगे नहीं तो बस वोही दर्शन का सिद्धांत मुझे याद आ रहा है कि जिसमे एक हाथी को भाई लोग कई एंगल से छूते है फिर व्यर्थ का आकलन करते है :-)).

Moral of my comment:Have the vision of Indian brand of feminism or Indian feminists to unfold the mysterious elements in this advt.

Arvind K.Pandey

http://indowaves.instablogs.com/

Arvind k said...

यह छायावादी विज्ञापन है ..सब के समझ में थोड़ी न आएगा सिवाय "progressive" नारीवादियो के !! अब देखिये उनको समझ में आ गया वे लोग खामोश है !! एक आप लोग है जबरदस्ती interpretation पे interpretation किये जा रहे है ..भारतीय नारीवादियो के तरह गहराई में जा कर पहले समझना सीखिए ,खामोश होकर मनन करना सीखिए तब आप लोग जाकर ऐसे विज्ञापनों में छुपा गूढ़ अर्थ ढून्ढ पायेंगे नहीं तो बस वोही दर्शन का सिद्धांत मुझे याद आ रहा है कि जिसमे एक हाथी को भाई लोग कई एंगल से छूते है फिर व्यर्थ का आकलन करते है :-)).

Moral of my comment:Have the vision of Indian brand of feminism or Indian feminists to unfold the mysterious elements in this advt.

Arvind K.Pandey

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