Friday, April 23, 2010

शादी-शुदा नही होने का असली नुकसान आज समझ में आया.

शादी-शुदा नही होने का असली नुकसान आज समझ में आया.लम्बा-चौडा नुकसान झेलने के बाद ये पता चला कि इसका कोई विकल्प भी नही है.छोट-मोटा नही ज्वेलरी सेट का नुकसान हो गया मेरा.सच कह रहा हूं.आई शप्पथ.मतलब मां-कसम झूठ नही बोल रहा हूं.
हुआ यूं कि दोपहर को फ़ोन की घंटी बजी.नम्बर जाना-पहचाना नही था मगर उठाने पर उधर से जो आवाज़ आई उसे सुनकर दिल की घंटी बज गई.४५ डिग्री से पार कर चुके पसीने-पसीने चिपचिपे मौसम मे भी कंही कोने मे दबी-पडी रोमेंटिक भावनाओं ने अंगडाई भी ले ली और ना चाहकर भी हमने फ़ोन पर चेहरा नज़र नही आता है जानकर भी भरपूर मुस्कुराह्ट बिखेरते हुये हैलो कह दिया.
पर ये क्या?दूसरे ही पल सारे अरमानो ने परवान चढने के पहले ही दम तोड दिया.उधर से मिश्री सी आवाज़ वाली बोली सर मैं फ़लानी कंपनी से बोल रही हूं.मेरा स्वर भी कडवा यानी ओरिजनल हो गया.मैने भी कहा बोलिये.उसने बताया कि मेरा नम्बर लकी है और उस पर ज्वेलरी सेट व टूर का इनाम निकला है.अब तक मैं सब कुछ समझ गया था और इसलिये फ़िर से हंस कर पूछा तो .उसने कहा सर शाम को आप-दोनो को फ़लानी होटल मे आना होगा इनाम लेने.मैने फ़िर पूछा दोनो कौन?उसने कहा सर आप और मैडम?मैडम,मैने कहा मैडम तो नही है.वो अकबका गई.उसने कहा सर इनाम के लिये शर्त है पति-पत्नी को साथ मे आना होगा.मैने कहा वही तो बता रहा हूं,मेरी तो शादी ही नही हुई है,मैं बीबी कंहा से लाऊं.वो बोली फ़िर सर.मैने कहा मैं क्या बताऊं,तू बता?अब वो खिलाखिलाकर हंसी और उसने मिश्री की पूरी बोरी अपने मूंह मे घोल कर सारी सर.और मैं पहली बार सोचने पर मज़बूर हो गया कि शादी-शुदा नही होने से नुकसान भी हो सकता है?हा हा हा.वैसे ये कहानी-किस्सा नही है सच है.

41 comments:

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

एक फ़र्जी ज्वेलरी सेट के लिये आज आपको अपनी आज़ादी इतनी बुरी लगने लगी . हम लोगो से पूछिये आज तक पछता रहे है . वैसे शादी एक लड्डू है जो खाये पछताये ना खाये पछताये

Anil Pusadkar said...

हा हा हा.धीरू भाई मैं भी जानता था कि वो फ़र्जी मामला है,मैने तो बस सेल प्रोमोशन स्कीम के तहत हो रही धांधली को हल्के-फ़ुल्के ढंग से बताने की कोशिश की है.वैसे मेरे सभी दोस्तों की पत्नियां यानी भाभी लोग मुझ पर शादी करने के लिये दबाव डालती है और उस समय सारे दोस्त उनके सुर मे सुर मिलाते है लेकिन जब वे नही होती तो सब मेरी आज़ादी से जलते हैं.हा हा हा.

M VERMA said...

आप गये या नहीं यह तो बताया ही नहीं.
गये तो मिश्री की बोरी फिर मुँह में घुली या नहीं
(महज़ कौतूहल है अन्यथा न लें)

डॉ महेश सिन्हा said...

एक से बढ़कर एक फर्जीवाड़े :)

श्याम कोरी 'उदय' said...

अनिल भाई
ये सब "फ़र्जी डाट काम" है .... एक बात और लड्डू दोनों ही मीठे होते हैं शादी करने के बाद वाले भी, और नहीं करने के पहले वाले भी .... मेरा तात्पर्य लड्डू से है !!!!

Kulwant Happy said...

मेरे एक मित्र को ऐसा ही फोन आया था, वो शादीशुदा था, लेकिन अफसोस की बात, जिस तारीख को उसे बुलाया गया, पत्नि मायके गई हुई थी, अब वो टेंशन में कैसे जाने दूँ इतना बढ़िया मौका, लेकिन पत्नि कहाँ से लाऊँ वो तो मायके में गई है। ऐसे में वो मुझे बोला, अगर दफ्तर में से किसी महिला को ले जाऊं, मैंने कहा, ले जा भाई अगर तेरे फायदे के लिए कोई पत्नि बनने को तैयार हो तो। मौका तो उसके हाथ से भी निकल गया।

sangeeta swarup said...

आप तो बहुत बच गए...ये सब फर्जी काम होते हैं...और यदि शादीशुदा होते तो पत्नी बिना जाए मानती नहीं ...:):)

अनिल कान्त : said...

Bhaari Nuksan hua
:)

प्रवीण पाण्डेय said...

कई बार फोन आया पर हम कभी नहीं गये । समय व्यर्थ न करें, कोई क्यों बिना कारण उपहार देगा ।

ajit gupta said...

ऐसे फोन इंश्‍योरेंस कम्‍पनी वालों के होते है जो हेल्‍थ पॉलिसी देते हैं। मुझे तो एक कार्यक्रम के निमित्त बुला लिया था और जब वहाँ पहूंचे तो हमें कहा गया कि आप उस कुर्सी पर बैठे और फिर एक व्‍यक्ति आया और हमें पॉलिसी के बारे में पूछने लगा। हमने भी उसकी दुर्गति की और चले आए। मन तो हो रहा था कि पुलिस में दे दूं फिर सोचा कि जाने दो। इस बारे में कई लोगों से बात भी हुई सभी एक न एक बार ज्‍वेलरी सेट के लालच या और किसी कारण से वहाँ जा चुके थे। उसका धंधा आज भी बाकायदा जारी है।

P.N. Subramanian said...

भुगत के देखना है तो फिर देर मत कीजिये. उसके बाद पत्नी पीड़ित संघ की अध्यक्षता कहीं नहीं गयी है. प्रतिष्ठा बनी रहेगी.

राज भाटिय़ा said...

आप ने फ़िर मोका खो दिया, अरे इस ज्वेलरी सेट बाली को ही बोलते कि चलो सेट तुम रख लेना टुर पर मै चला जाऊंगा... ओर हम से मिलने आ जाते

ललित शर्मा said...

हा हा हा
अनिल भैया-बच गए एक बड़े धोखे से ये मानो।
अगर भाभी जी होती तो ज्वेलरी सेट के लिए जाना ही पड़ता। फ़िर बचना संभव नहीं था और एक के साथ एक फ़्री लाना पड़ता।

ताऊ रामपुरिया said...

भतीजे ऐसे फ़ोन तो करीब करीब सभी के पास आते हैं. पर मैं आपकी इस बात से सहमत नही हुं की आपके दोस्त आपकी आजादी से जलते हैं. जैसा कि ऊपर धीरूसिंह जी ने कहा "शादी एक लड्डू है जो खाये पछताये ना खाये पछताये"

एक बार ये लड्डू हमारे कहने से खाकर देखो...फ़िर रोह दो चार "मेड-इन-जर्मन" खाये बिना नींद ही आयेगी.

तो कब कर रहे हो शादी? दो चार लठ्ठों का आर्डर राज भाटिया जी को करवा देता हूं आपको भेजने के लिये.

चिंता मत करना राज भाटियाजी लठ्ठ जर्मनी से मुफ़्त भिजवाते हैं. हमारे यहां भी उन्होने फ़्री आफ़ चार्ज ही खुद की जेब से किराया देकर भिजवाये थे.

रामराम.

Udan Tashtari said...

एक ज्वेलरी सेट के पीछे-अरे, सवाल ही नहीं उठता..आप तो हैवी प्रोफिट में ही हैं..बने रहिये. कहाँ चक्कर में पड़ने की सोच रहे हैं.

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

हार से रह गए पर उस हार से बचने के लिए.............अब क्या कहें हम तो हार पहन कर हारे हैं.....कई हार और कई.......और भी

Anil Pusadkar said...

आभारी हूं आप सभी का,जिन्होने मुझे इतना प्यार दिया।इतना प्यार मिला है मुझको कि अब किसी और प्यार का ख्याल भी नही आता।आप सब मेरा परिवार है और मैं आपके परिवार का सदस्य हूं।बस इतना ही कहना चाहुंगा कि,

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों,
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा हैं दोस्तों।

अजित वडनेरकर said...

मजेदार है। आप इतनी बार शादी का उल्लेख कर चुके हैं कि अब फेरे पढ़वा ही लीजिए (चाहे कलमा:)

अनूप शुक्ल said...

वाह! इसी बहाने यह बात एक बार फ़िर समझ में तो आई! अब तो घर बसा लो!

दीपक 'मशाल' said...

Bhaia badee der me no. laga aapka.. :)
mere sath to ye haadsa 4 saal pahle ho chuka hai. tab bhi aisi koi scheme chali thi Delhi me, koi dinner set gift de rahe the.. ha ha ha. maine bol diya madam aap sath chalen to adha-adha kar lenge, doosri taraf se 1 sec. me tonnnnnnnnnnn ki awaz aana shuru ho gayee thee.

जी.के. अवधिया said...

अनिल जी, आप भाग्यशाली हैं जो आपका सिर्फ एक ज्वेलरीसेट का ही नुकसान हुआ। शादीशुदा होते तो क्या क्या नुकसान होते यह आप नहीं जानते। एक नजर यहाँ भी डाल लें - "जूता जब पुराना होता है तभी तो पालिश की जरूरत पड़ती है"

अंकुर गुप्ता said...

हमें भी ऐसे कई फोन आए। लेकिन वही शादी का अड़ंगा लग गया। :-)
वैसे सुना है कि ये सब फर्जीवाड़ा है।

ताऊ रामपुरिया said...

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों,
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा हैं दोस्तों।


भतीजे, एक शेर लिख कर क्युं बहला रहा है? बहु लेकर आ फ़िर हमारी खुशी देख. जरा बात मान ले और सबका आशीर्वाद ले ही ले, कब से इंतजार कर रहे हैं.

रामराम.

Vivek Rastogi said...

हा हा वाकई अनिल भाई बहुत बड़ा नुकसान हो गया ऐसा ही किस्सा कल हमारे साथ घटित हुआ, जल्दी ही लिखते हैं। :)

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa said...

वैसे अब क्या इरादा है :-)

नीरज मुसाफिर जाट said...

अनिल जी,
अभी तक तो अपन भी आपके जैसे ही हैं, बस उम्र में बहुत बहुत छोटे हैं। हमारे पास तो कभी आते ही नहीं हैं ये मिश्री वाले फोन।

'अदा' said...

आज आपकी आवाज़ से लगा कि ये प्रतिज्ञां अब टूटेगी ...:)
हाँ नहीं तो..!!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

नीरज को तथास्तु कहिये ...और आप एक बार ट्राइ कर देख लीजिये.. वैसे कोफ्त तब बहुत होती है जब फोन कम्पनी की प्रोमोशन काल ऐसे नम्बर से आती है जो आपको किसी भाई-बन्धु, यार दोस्त का लगता है..

पी.सी.गोदियाल said...

हा-हा-हा-हा-हा

वन्दना said...

aisi calls bahut aati hain shukra hai bach gaye ...........biwi na hone se.........hahahaha......

PD said...

तो शादी कब कर रहे हैं? :)

shubham news producer said...

hahahahahh

bhaiya ye jewelry ke chakkar mein mat padiye
shadi ke bad to nuksan hi nukshn hai

अन्तर सोहिल said...

और किसी की नहीं तो कम से कम ताऊजी की ही सुन लो जी और जल्द से जल्द
ताकि अगला फोन आने पर ज्वेलरी सेट का नुकसान ना हो :-)

प्रणाम

सुलभ § सतरंगी said...

मिश्री की डली मुँह में घुली!!
:) :)
आपकी आज़ादी कायम रहे.

Kumar Jaljala said...

टाइम पर मैरिज नहीं होने का एक घाटा ऐ भी हय कि आदमी कुंढिथ हो जाता है। आप सादी कर रो।

शेफाली पाण्डे said...

abhi bhi der nahi huee hai....anil jee

E-Guru Rajeev (ई-गुरु राजीव) said...

मिश्री वाले फोन आये तो फिर बताते हैं. हम तो किसी भी लड़की को पकड़ लें !!

अजय कुमार झा said...

बडे दिल वाले हैं आप जो इत्ता नुकसान उठा के भी पोस्ट ठेल गए , वैसे अब पछता रहे हैं न .....कहिए तो अगली बार होने वाले किसी नुकसान से बचाने के उपाय किए जाएं आपके लिए .....हा हा हा

cg4bhadas.com said...

सर आप एक धोके के बाद दूसरा धोके के लिए तैयार रहे..... वो आपको गिफ्ट देने नहीं ... जिसका ऊल्लेख आप ने किया है , बल्कि मार्केटिंग की प्रक्रिया है बस और कुछ नहीं ...
रविकांत

बी एस पाबला said...

फ़ोन पर चेहरा नज़र नही आता है जानकर भी भरपूर मुस्कुराह्ट बिखेरते हुये हैलो कह दिया

और फिर
स्वर भी कडवा यानी ओरिजनल हो गया

हा हा
मैं तो दोनों मामलों में आपके चेहरे की भाव-भंगिमा की कल्पना कर ठहाके लगा रहा हूँ

शरद कोकास said...

अनिल भाऊ.. वो पहले की अपनी नाटक मंडली के सब लोग कहाँ चले गये ? अब ऐसे वक़्त तो काम आना ही चाहिये.. । वैसे ऐसे फोन हमे भी आते रहते है ..श्रीमती जी का आग्रह है एक बार जाकर देखा ही जाये होता क्या है वहाँ ।