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Tuesday, January 18, 2011

ट्रक के इंजन और आईल से सास_बहु का क्या लेना-देना?

विज्ञापन के नाम पर अपने देश में कुछ भी दिखाया जा रहा है।विज्ञापनो के लगातार गिरते स्तर से चिंतित सरकार ने उसमें आ रही विकृति पर रोक लगाने के लिये एक रेग्यूलटरी बोर्ड भी बनाया है,जो लगता है कि गांधी जी के तीनो बंदरो को मिक्स कराके एक बनाकर तैयार किया गया है।ना वो बुरा देखता है,ना उसे बुरा सुनाई देता है और ना ही वो खुद कुछ बुरा कहता है।चल रहा है जैसा चाहे।कोई शिकायत आये तो उसे पेंडिंग करके चलने दे सिस्टम को जस का तस।हां तो मैं बात कर रहा था ट्रक के इंजन और आईल से सास-बहू के लेने-देने की।एक तेल कंपनी अपना प्रोडक्ट बेचने के लिये विज्ञापन पेल रही है।उस विज्ञापन से वो क्या कमा रही है और कैसे कमा रही है ये तो वही बता सकती है लेकिन उस विज्ञापन में सास-बहु को एक-दूसरे से उलझते दिखा कर पता नही वो क्या साबित करना चाह्ती है।आपत्तिजनक ढंग से उसने बहु को पूजा करती सास से उलझते दिखाया है।पूजा करती सास की पूजा मे व्यवधान डालते हुये बहु का रेडियो का साऊण्ड तेज करना पता नही किस घर की संस्कृति है।और सास के मना करने पर बहु को साऊण्ड और तेज करते दिखा कर तेल कंपनी पता नही कैसे तेल की बिक्री बढा रही है।पता नही क्या बेचना चाहते हैं लोग इस देश में?मुझे तो समझ में नही आया अगर आपके आया हो तो मुझ नासमझ को भी बताइयेगा ज़रूर।

10 comments:

Hindiblogjagat said...

"पहले ये बताओ अन्दर क्या डाला है"!
एक लुब्रिकेंट के विज्ञापन में ये कहा जाता है जिसे आजकल लोग भोंडे द्विअर्थी अंदाज़ में कहने लगे हैं.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बेचने के लिये कुछ भी चलेगा... कितना भी बेहूदा

Rahul Singh said...

कई विज्ञापन ऐसे हैं, जिन्‍हें देख कर पता नहीं लग पाता कि क्‍या बेचने का इरादा है और अगर अनुमान लगा भी लें तो यह समझना कठिन होता है कि इस तरह क्‍यों.

Arvind Mishra said...

बाजारुपन इसी को कहते हैं न !

P.N. Subramanian said...

टीवी आजकल स्वस्थ मनोरंजन का साधन नहीं रहा है. आपको ऐसे कई विज्ञापनों को देख टेंशन में आते देखा है (आप ने कहा है) क्यों अपना बिपि बाधा रहे हैं. मत देखें. इतना तो कर ही सकते हैं.

नीरज बसलियाल said...

Market has actually spoiled everything in far worse manner than we thought

Kajal Kumar said...

माफ़ करना अनिल जी मैं भी आपकी ही तरह मूढ़ हूं :)

प्रवीण पाण्डेय said...

पता नहीं, किसका सर किसके पैर में जोड़ देते हैं।

cmpershad said...

अरे भैया, ट्रक का इंजन यानी सास और आइल या बहू, तो जब तक आइल नहीं इंजन कैसे चले और खटपट की आवाज़ कैसे गूंजे :)

shubham news producer said...

wah bhaiya bahut achha.......

bhaiya aisa hi ek vigyapan ata hai

Underwear Baniyan Ka jisme Bandar (Chimpenji)Ek Mahila ke samne khub nach dikhata hai