Sunday, April 24, 2011

सर्वव्यापी भ्रष्टाचार है,छाया हुआ अत्याचर है,तहलका मचा रहा बलात्कार है,जिधर देखो उधर व्याभीचार है!

तो कब से रिपोर्ट करेगा बे,भ्रष्टराष्ट्र ने अपने स्टाईल मे मुझसे पूछा।मैने कहा रायपुर की रिपोर्ट तो डेली दे दूंगा।कर दी ना बे घटिया लोकल रिपोर्टरो जैसी बात। अबे मैं तेरे से सारे देश की रिपोर्ट देने के लिये कह रहा हूं और तू साले रायपुर मे ही अटका हुआ है।मगर महाराज सारे देश मे तो मेरे कान्टेक्ट है नही फ़िर इतना टूर कैसे कर पाऊंगा।टूर! करिया बोला काहे का टूर बे!सब यही से रिपोर्ट करना।मैने कहा यानी टेबल स्टोरी।नही मुझे ओरिजिनल स्टोरी होना।मगर मै सारे देश्……… तेरा प्राब्लम ये है ना सारे देश पर नज़र कैसे रखेगा?एक्ज़ेक्टली महाराज, मैने कहा। इस पर भ्रष्टराष्ट्र हंसा तू पूछ रहा था ना बे ये आपका नाम धृतराष्ट्र से मिलता है।तो चल उसी के स्टाईल मे काम कर लेंगे।मै तुझे संजय जैसी पावर दे देता हूं।संजय कौन?संजय गांधी।अबे धृतराष्ट्र वाला संजय समझा।तो क्या मुझे वार की रिपोर्टिंग करनी होगी।वार भी तो भ्रष्टाचार का भाई ही है बे।मै बोला जो आज्ञा महाराज।



भ्रष्टराष्ट्र ने कहा चल आंखे बंद कर और देख।मैने कहा महाराज खसक गये हो क्या आंखे बद कर कोई कैसे देख सकता है।अबे उल्लू मै जो कह रहा हूं कर्।मैने आंखे बंद की तो असली चमत्कार देखा।मुझे बंद आखों से दिखाई देने लगा था।क्यों बे दिखा कुछ।मैने कहा महाराज यू आर ग्रेट्।मुझे सब दिखाई दे रहा है।बता तो साले क्या दिखाई दे रहा है।महाराज चारो ओरमर रहा है गरीब,हर आपकी जय-जयकार है,सर्वव्यापी भ्रष्टाचार है,छाया हुआ अत्याचार है,तहलका मचा रहा बलात्कार है,जिधर देखो उधर व्याभीचार है, ओर हाहाकार है।जय हो महाराज जय हो। अबे चुप।साले ये शोले के अमिताभ स्टाईल की तारीफ़ मै अच्छी तरह समझता हूं।वो जो तुझे दिखाई दिया ना सब अपने आदमी है।उनको ऊंगली नही करने का।उनको प्रमोट करने का और उनपर नज़र रख कर सब की कमाई की रिपोर्ट अपुन को देने का क्या।समझा बिड़ू।



मै चमक गया अचानक भ्रष्टराष्ट्र को क्या हो गया,ठेठ मुम्बईया स्टाईल मे आ गया।मैने कहा महाराज ये मुम्बईया स्टाईल अचानक्…महाराज ने मेरी बात काट कर पूछा वसूली सबसे तगड़ी कंहा होती है? मैने कहा मुम्बई मे गुरू।महाराज बोले अबे श्याणे सुन।जितना लिफ़्ट दिया हूं न उतना ही चढने का। नई तो लालू बना दूंगा।गलती हो गई महाराज मैने कहा।तो मै क्या कह रहा था।मुम्बई महाराज मुम्बई।हां अपुन को भी इन साला हरामी लोगो से वसूली करने का है।साला लोग काम अपुन का नाम लेकर करता है और माल दूसरे देवता लोगो को चढाता है।दूसरे देवता लोगो का पब्लिसिटी होती है और अपुन फ़्री मे बदनाम होता है।जो देखो साला भ्रष्टचार को गाली दे रहा है और कर साला हर कोई रहा है।

मैने धीरे से आपत्ति जताई,ये तो गलत बात है महाराज आप हर किसी को नही लपेट सकते।देश मे ईमानदार लोगो की कमी नही है।क्या बोला बे।किस्की नौकरी कर रहा है पता है ना।इसिलिये साले तू कहीं टिक नही पाता।तू क्या किसी नेशनल न्यूज़ चैनल का ट्कला एडिटर है बे जो हर बात पे मुंह मारेगा।कंहा है बे ईमानदार बता तो?देखो महाराज मैने भी कभी भ्रष्टाचार नही किया और आपकी भाषा मे शिष्टाचार नही लिया।तो,तू ईमानदार हो गया।ईमानदार हूं या नही ये अलग बात है महाराज मै भ्रष्ट नही हूं। अच्छा,तो ये बता पिछले साल अपने भांजे को छुट्टी से वापस भेजते समय टिकट कैसे लिया था।क्या मतलब?मै थोड़ा कंझाया।महाराज बोले बता ना टिकट कैसे लिया था।साले मंत्री के लैटर पैड पर वी आई पी कोटे से टिकट लिया था ना।मै नही जानता,मैने तो एजेंट को रूपये दिये थे।कितने?क्या मतलब?अबे टिकट से ज्यादा क्यों दिये थे।मेरी मर्ज़ी।मर्ज़ी नही बे,अगर नही देता तो टिकत मिलता ही नही। और जो ज्यादा का रूपया था न जिसे तुम लोग दफ़्तर का खर्च बोलते हो वो भी भ्रष्टाचार है,मंत्री का लैटर पैड लगाना भी वही है।समझा।चला ईमानदार बनने।

महाराज का प्रवचन शुरु था।मेरी बोलती बंद थी।महाराज ने कहा जिनको तू ईमानदार बता रहा है न वो ईमानदार नही है।मै बोला तो आप ही बता दो ईमानदार कौन है।सुनना चाहता है ना तो सुन्।जिन लोगो मे बेईमानी करने की हिम्मत नही होती वे खुद क्प बताते है ईमानदार,जैसे तू।मनुष्य तो स्वाभाविक चोर है। अब ये बात अलग है कुछ लोग बहादुरी से मेरा अनुसरण करते है और तमाम प्रकार के सुखों का उप्भोग करते हुये मृत्युलोक मे भी स्वर्ग का आनंद लेते है और मृत्युपरांत भी स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। और लोग होते हैं जो उतनी हिम्मत नही करते और मन ही मन सुख प्राप्ति की अभिलाषा रखते हुये खुद को तो ईर्ष्या की आग मे भस्म करते ही है पूरे परिवार को अतृप्त रख कर नर्क के भागीदार हो जाते हैं।

अब तक़ मेरा दिमाग आऊट हो गया था।मैने कहा महाराज ये अंट-शंट बकना बंद करो।कौन मानेगा इस बात को कि बेईमान स्वर्ग जाता है और ईमानदार नर्क़। अबे किसी के मानने नही मानने से क्या फ़र्क़ पड़ता है।साले ईमानदारी से जीकर, सरकारी स्कूल मे बच्चो को पढाकर,बुढे मां-बाप को लाईन लगाकर सरकरी अस्पताल से दवा दिलाकर,जवान बहन को अधेड़ होने तक़ दहेज़ के अभाव मे विवाह के सपने दिखा कर कौन सा स्वर्ग मिलता है बे।सरकारी स्कूल मे पढ्ते बच्चे अपने दोस्तो से कहते है क्या करे यार हमारा बाप ईमानदार है।बूढी हो चली बहन अपने विवाह की अंतिम ईच्छा के भरोसे जी रहे मां-बाप से दबी आवाज मे बताती है कि भैया के अण्डर मे काम करने वाले बड़े बाबू ने अपनी बहन की शादी मे मोटर साईकिल,फ़्रिज और टीवी दिया है,बीबी मायके वालो को कोसती फ़िरती है और कोई नही मिला दुनिया मे इस ईमानदार के सिवा। आज तक़ एक सोने का हार लाक्र नही दिये है।पड़ोस की सारी औरते आये दिन कुछ न कुछ लाकर दिखाती है देखो उन्होने ये लाया वो लाया।क्या पूरे परिवार की इच्छाओ को बस समाज के चंद लोगो से मिलने वाली झूठी तारीफ़ के बदले इस तरह कुचलने वाले को स्वर्ग मिल सकता है?मेरे सिर पर जैसे कोई हथौड़ा मार रहा था। मैने कहा बस करो महाराज।महाराज बोले बस साले तुझे सुनना पड़ेगा।बड़ा ईमानदार बनता है ना। ………………… और भ्रष्टराष्ट्र ने क्या-क्या कहा बताऊंगा एक छोटे से ब्रेक के बाद। आप भी बताईयेगा कैसा लग रहा है महाराज का प्रवचन। आपकी राय मेरा हौसला बढाती है

8 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अच्छा चल रहा है...

Kajal Kumar said...

प्रवचन अच्छा है नि:संदेह

प्रवीण पाण्डेय said...

तभी व्यथित विचार है।

महेन्द्र मिश्र said...

महाराजों के प्रवचन हमेशा जोरदार होते हैं ...हा हा हा

Atul Shrivastava said...

मजेदार हो रहा है आपका भ्रष्‍टाचार से संवाद।
आगे की चर्चा का इंतजार रहेगा।

Patali-The-Village said...

बहुत अच्छा चलरहा है प्रबचन| धन्यवाद|

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब जी

सतीश सक्सेना said...

कह तो सही रहा है यह साला भ्रष्टराष्ट्र.... !
हैं तो हम सब ऐसे ही ! सफाई वाले से लेकर राजनेता तक ! बस हमें छोड़ सब स्साले चोर हैं !

आपका अंदाज़ और वर्णन मनमोहक है भाई जी ! हार्दिक शुभकामनायें !