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Tuesday, September 1, 2015

बिहार में चुनावी महासेल,छूट है छूट,लूट सके तो लूट.

बिहार में तो गज़ब हो गया है,वोट के नाम पर महासेल लगी है.हर कोई चिल्ला रहा है छूट है,लूट सके तो लूट.चुनाव क्या आया,हर पार्टी अपना प्रोडक्ट बेचने के लिये दुनिया भर की स्कीम लांच कर रही है.कोई ये दे रहा है तो कोई वो दे रहा है.कोई कह रहा है उसकी स्कीम फ्राड है मेरी स्कीं असली है तो दूसरा चिल्ला रहा है कि इसकी स्कीम से आज तक भला क्यों नही हुआ.सब सपने बेच रहे हैं.सपने भी हज़ारों लाखो के नही हज़ारों लाखो करोडो के.जनता बेचारी ठगी  से खडी है.इसकी दुकान में जाऊं या उसकी दुकाम में जाऊं.फिर उसे लगता है आज तक तो उसका भला हुआ नही है.गरीबी हटाओ की स्कीम को भी जनता भूली नही है.गरीब तो हटे नही बल्कि बढ गये.विकास के नाम पर सिर्फ कुछ लोगो का विकास भी लोगों ने देख लिया.वो अब भी हैरान है कि इतनी सारी स्कीमों के बावज़ूद जनता का हाल बुरा क्यो है?हर साल चुनाव के समय ही स्कीम क्यों लांच होती है?हर स्कीम का चुनाव के बाद हश्र बुरा ही क्यों होता है?आखिर इस महासेल का मतलब ही क्या है?हर बार,बार बार चुनावी महासेल के बाद भी फायदे में तो चुनावी कंपनिया ही रहती है ग्राहक क्यों नही?आखिर कब तक पार्टियां चुनावी स्कीम चलाती रहेंगी,कभी उन्हे भी चिटफण्ड कंपनियों की तरह ट्रीट किया जायेगा?कभी कोई फर्ज़ी स्कीम चलाने वाला धरा जायेगा?या फिर चुनाव आयेगे,सेल लगेगी,छूट की घोषणा होगी और वोट लूट लिये जायेंगे?

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