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Friday, December 18, 2015

जंहा उंगली पकड कर चलना सिखाया गया वंही अतिथी बनना अजीब सा लग रहा है.

सुबह होली क्रास स्कूल की टीचर्स मेरे घर पहुंची औपचारिक निमंत्रण देने.सालाना जलसे में मुझे विशेष अतिथी के रुप में आमंत्रित किया गया है.22 को जलसा है.जिस जलसे में हम स्कूल के दिनो अतिथियों का भाषण सुना करते थे उसी स्कूल में उसी जलसे में खुद अतिथी बनकर जाना बडा अजीब सा लग रहा है साथ में रहेंगे स्कूल के ही साथी डा संदीप दवे(Dr. Sandeep Dave.हालांकि शहर के अन्य कई स्कूलों में अतिथी के रुप में जा चुका हूं पर जंहा जमकर कुटाई हुई,जंहा ठोक पीट कर इस रा मटेरियल को शेप दिया गया,जंहा उंगली पकड कर चलना सिखाया गया वंही अतिथी बनना अजीब सा लग रहा है.वैसे इससे पहले इसी साल होली क्रास स्कूल की एक अन्य कापा शाखा में स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य अतिथी बनने का अवसर मिला था.अपने स्कूल में अतिथी बनना एक सपने जैसा लग रहा है.इसी स्कूल ने मुझे सब कुछ दिया और आज मैं जो कुछ भी हूं होली क्रास स्कूल की बदौलत ही हूं.शुक्रिया स्कूल में पढाने वाले और कूटने वाले सभी गुरजनो का,सभी स्टाफ का दुलारी बाई का प्यून मैन्युअल का और साथ में पढे सभी दोस्तो का.

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