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Sunday, November 27, 2011
वादों की बरसात चुनाव तक़ फिर पांच अंधेरे साल!
मैं ये कर दुंगा,मैं वो कर दुंगा,मैंने जो आज तक़ किसी ने नही किया वो कर दिखाऊंगा,मैं उस्से भी ज्यादा करके दिखाऊंगा,सब करुंगा,किया क्यों नही इस बारे में किसी के पास कोई जवाब नही है.ना कोई जवाब देता है और न ही कोई पूछता है.सब अगले पांच साल तक़ सरकार में आने की भीख मांगते हुये दस सालों तक़ की योजना बता देते हैं.फिलहाल सिर्फ युपी को लेकर बयानों का घमासान मचा हुआ है.सभी उसकी तरक़्क़ी के रोज़ नये दावे कर रहे हैं.यानी सब ये तो कम से कम मान रहे हैं कि युपी का विकास नही हो पाया है.उस युपी का जिसने सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री दिये हैं,अखिर ऎसा क्यों?क्यों नही हो पाया विकास युपी का और सिर्फ युपी का ही नही बिहार,उडिसा और पूर्वोत्तर के भी राज्यों की तरक़्क़ी क्यों नही हुई?सिर्फ युपी को ही लेकर शोर क्यों?क्या विकास की सारी योजना,सारे दावे सिर्फ चुनाव तक के ही लिये है?क्या चुनाव के बाद नेताओं और राजनैतिक दलों के यही तेवर बने रहेंगे?या फिर वोट लेकर पांच साल तक़ के लिये जनता के साथ वादाखिलाफी की कोई नई स्कीम लांच हो जायेगी?अखिर कब तक़ चुनावों मे सपने बेचेंगे ये नेता लोग?आखिर कब तक़?
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