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Friday, March 11, 2011

वर्ल्ड कप के लिये पेश है एक नया गीत!

अपने देश मे क्रिकेट का बुखार फ़ैला हुआ है।जो देखो क्रिकेट की बात करता है,चाहे क्रिकेट खेला हो या नही खेला हो।फ़िर टीवी वालों के पास भी निट्ठलों की फ़ौज़ है,जो मैच खतम होने के पहले कुछ और बद मे कोई और राग आलापती है।अलग-अलग टीवी वालों के प्रचारकों मे आपस में मतैक्य ना हो तो समझ में आता है एक ही टीवी वालो की फ़ौज़ भी आपस मे कभी एक नज़र नही आता।यानी हर किसी की अपनी ढपली है और हर किसी का अपना राग है।ऐसे में मुझे भी एक पुराने क्रिकेट प्रेमी मित्र विश्वजीत का वर्ल्ड कप पर भेजा हुआ एक गीत आपसे शेयर करने का मन हुआ है,सो पेश कर रहा हूं। थोड़ा संशोधित है।

एक लड़की थी दीवानी सी,
सचिन पे वो मरती थी,
चोरी-चोरी,चुपके-चुपके,
भज्जी को खत लिखा करती थी,
आंख चुराके,थोड़ा शरमा के,
गंभीर से बाते करती थी,
ज़ुल्फ़ बिखरा के,थोड़ा मुस्कुरा के,
वीरू के गलियों से गुज़रती थी,
कहना था कुछ रैना से उसको,
पर धोनी से वो डरती थी,
जब मिलती थी युवी से ,
बस एक ही बात पूछा करती थी,
गधों कब लाओगे तुम लोग वर्ल्ड कप॥