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Thursday, January 5, 2012

दिग्गी राजा अगर अन्ना का नानाजी देशमुख के साथ तस्वीर में नज़र आना उनका आरएसएस से जुडे होने का सबूत हो सकता है तो फिर उनकी तस्वीर क्यों नही?

इस सादगी पे कौन ना मर जाये ऎ खुदा!दिग्गी राजा का हिंदू सम्मेलन में खुद की तस्वीर पे ये कहना है कि वे पार्टी हाईकमान से पूछ कर वंहा गये थे.तो क्या पार्टी हाईकमान अब उनके इस दावे का खण्डन कर सकता है?तो क्या हाईकमान से पूछ कर किया गया गलत काम सही हो सकता है? तो क्या वे हर काम हाईकमान से पूछ कर करते है?क्या अन्ना पर व्यक्तिगत आरोपो की बौछार वे हाईकमान के ईशारे पर ही कर रहे हैं?अब अगर उनकी उस तस्वीर को कोई उन्के भाई के भाजपा प्रवेश और सांसद बनकर हाईकमान पर दबाव डालने का तरीका तो नही था?फिर अगर अन्ना का नानाजी देशमुख के साथ तस्वीर में नज़र आना उनका आरएसएस से जुडे होने का सबूत हो सकता है तो फिर उनकी तस्वीर क्यों नही?वैसे किसी पर भी एक उंगली उठाने पर बाकी की ऊंगलियां को खुद को ही निशाना बनाती है.जो दूसरो के लिये गड्ढा खोदता है वो उसी मे गिरता है,ऎसा मैने सुना था.वैसे दस साल पहले भाजपा ने उन्हे सत्ता से क्या बाहर किया है,लगता है वे आपे से बाहर हो गये हैं.होता है,इतना लम्बा राजनितिक वनवास अच्छे अच्छे को हिला कर रख द्ता है.

Sunday, December 25, 2011

क्या आरएसएस-भाजपा से संबद्ध होना पाप है?तो फ़िर ये बात तो दिग्विजय सिंह के सगे भाई लक्ष्मण सिंह पर लागू क्यों नही होती?वे तो सांसद भी रहे हैं इसी अछूत पार्टी से!

अन्ना नानाजी देश्मुख के साथी हैं!अन्ना आरएसएस के एजेण्ट है!अन्ना क्या हैं,ये सब को पता है लेकिन आज से पचास साल पहले एक बार अन्ना ने नानाजी के साथ बैठक की थी ,ये सब अचानक याद नही आता है कांग्रेसियों को!जब अन्ना अनशन पर बैठते है बस तभी याददाश्त के पन्ने पलटने लग जाते है सबके सब।अब क्या इस देश में आरएसएस का कार्यकर्ता होना क्या राष्टद्रोह है?क्या संघ इस देश में प्रतिबंधित है?आखिर उसे इतना अछूत क्यों बताया जा रहा है?क्या एक कार्यकर्ता के कारण इतने सालो तक़ उसी आरोप की रोटी सेकी जायेगी?तो क्या कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कभी कुछ किया ही नही?क्या एक महिला को तंदूर में भूनने वाले की पार्टी के लोग फ़िर पाक साफ़ कैसे हो सकते है?क्या आरएसएस-भाजपा से संबद्ध होना पाप है?तो फ़िर ये बात तो दिग्विजय सिंह के सगे भाई लक्ष्मण सिंह पर लागू क्यों नही होती?वे तो सांसद भी रहे हैं इसी अछूत पार्टी से?क्या आरएसएस के मुख्यालय नागपुर जाना भी उससे संबंध होने का कारण हो सकता है?मैं तो साल में चार-पांच बार जाता हूं,तो क्या मै भी आरएसएस का एजेंट हूं?इस तरह की मूर्खता पता नही क्यों ये कांग्रेस के चापलूस कर रहे हैं।उन्हे अन्ना पर आरोप लगाना भी नही आ रहा है,कोई कह रहा है कि वे भारत-पाक युद्ध के भगोडे हैं!फ़िर मांगेंगे माफ़ी जैसे एक बडबोले पहले मांग चुके है!फ़िर आखिर उन्हे अन्ना के अनशन से इतना गुस्सा क्यों आता है?जब वे कहते हैं कि उनके कहने से कोई फ़र्क़ नही पड़ता तो करने दे अन्ना को अनशन,ये ये इतना बौखला क्यों जाते हैं?

Monday, December 12, 2011

.अन्ना तो बेचारे सीधे-सादे बुज़ुर्ग है जिनके साथ तो सिक्यूरिटी भी नही रहती उन्हे क्या देखना.देखना है तो अपनी-अपनी सिक्यूरिटी भर बस वापस करके दिखा दो

एक बुज़ुर्ग को धमका रहे है कथित दमदार नेता.दबंगई का इतना ही शौक है तो ज़रा उन नेताओं को भी धमका कर देखे तो युपी में खुले आम राहुल को उल्टा-सीधा कह रहे हैं.अन्ना तो बेचारे सीधे-सादे बुज़ुर्ग है जिनके साथ तो सिक्यूरिटी भी नही रहती उन्हे क्या देखना.देखना है तो अपनी-अपनी सिक्यूरिटी भर बस वापस करके दिखा दो,फिर देखो जनता कैसे देखते है,सब को.वाह रे दबंग नेता चमचई के चक्कर में इतना दीवाने हो गये हैं कि अन्ना की उम्र तक़ का लिहाज़ नही रख रहे हैं.करो चमचई जनता सब देख रही है और चुनाव में बता भी देगी,देखा कैसे जाता है.

Thursday, August 18, 2011

आखिर अन्ना को पाखण्डी और भ्रष्ट बताने वाले लोगों को उनमे गांधीवादी नज़र आ ही गया,और शायद जनता की ताकत भी।शर्म भी नही आती थूक कर चाटते हुये

एक सवाल,वही अन्ना,वही टीम,वही जनता,वही रामलीला मैदान,वही पुलिस,वही कमिश्नर,वही भीड़,वही ला एण्ड आर्डर फ़िर ऐसा क्या हो गया कि तीन की बजाये 15 दिन और वो भी बिना शर्त अनुमति दे दी।आखिर अन्ना को पाखण्डी और भ्रष्ट बताने वाले लोगों को उनमे गांधीवादी नज़र आ ही गया,और शायद जनता की ताकत भी।शर्म भी नही आती थूक कर चाटते हुये।

Wednesday, August 17, 2011

आखिर अनशन के खिलाडी को चुनाव के मैच की चुनौती क्यों?

जिसे देखो वो कह रहा है कि दम है तो चुनाव लड कर देख ले अन्ना!अब मंदिर में रहने वाला अन्ना या फिर कोई और भी भला  1 लाख 76 हज़ार करोड जैसे छोटे-मोटे हाथ मारने वालों के सरताज़ों से चुनाव  कैसे लड सकता है!और फिर यही सवाल क्या देश के सबसे बडे नेता और राज्यसभा की वर्षों से शान बने लोगों से नही पूछा  जा सकता कि ज़रा लोकसभा का चुनाव भी जीत कर दिखा दो भैया!आखिर अनशन के खिलाडी को चुनाव के मैच की चुनौती क्यों?

Sunday, August 14, 2011

लोकपाल से एलर्जी है,कोई बात नही!कम से कम चुनाव लड़ने के लिये सरकारी स्कूल में पढना और सरकारी अस्पताल में इलाज़ करना ज़रूरी कर दो!

एक छोटी सी पोस्ट बड़ा सा सवाल लिये हुये।लोकपाल बिल का पता नही क्या होगा?पर मेरा मानना है कि चुनाव लड़ने और सरकार में बैठने के लिये सरकारी अस्पताल और सरकारी स्कूलों,कालेजों में उनका और उनके परिजनो का पढना और इलाज करना अनिवार्य कर देना चाहिये।कुछ नही तो कम से कम अस्पताल और स्कूल,कालेज की हालत थोड़ी तो सुधरेगी।