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Thursday, September 30, 2010
जूते,लाठी,आज़ादी और हम!
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Wednesday, November 11, 2009
कर ली है नौकरी,तोड़ दी बंदूक,फ़िर छोड़ेंगे नौकरी,फ़िर खरीद लेंगे बंदूक।
बहुत समय से यूंही कलम तोड़ कर आज़ादी का जश्न मना रहा था मैं।पिछली नौकरी छोड़ने का कोई कारण भी नही था और वो नौकरी भी नौकरी जैसी नही थी।मालिकों का दोस्त होने के कारण मालिक जैसा ही ओहदा था लेकिन पता नही क्यों वो काम रास नही आया और एकाएक उसे नमस्ते कर दिया।तन्ख्वाह भी अच्छी खासी थी,मोटी भी कह सकते हैं और काम भी इच्छा हो तो करो वर्ना कोई पूछने वाला भी नही था।उस नौकरी पर जाते समय भी लोगों ने पूछा कितने दिन और तो मेरा जवाब होता था कितने साल कहो लेकिन एक साल भी पूरा नही हो पाया लोकल केबल नेटवर्क के न्यूज़ चैनल का स्टेट हैड था मैं।अब फ़िर से उस नौकरी के पहले वाली नौकरी पर जा रहा हूं।यानी उस लोकल केबल से पहले जिस लोकल केबल को छोड़ा था उसमे न्यूज़ चैनल हेड़।यानी कहा जा सकता है कि सुबह का भूला और ये भी कि लौट के बुद्धु घर को आये।इससे पहले जिस अख़बार को छोड़ा था उसके रिलांच के बाद उसमे कालम लिखने की मंज़ूरी पहले ही दे चुका हूं।अब प्रिंट और इलेक्ट्रानिक दोनो मे काम,नही तो एक मे भी नही यानी फ़ुल टाईम आराम।वैसे इस बार भी काम अपने मन-माफ़िक ही है।यानी काम भी कम और दाम मे भी दम।जिसे पता चल रहा है उसका पुराना घिसा-पीटा सवाल सामने आ रहा है नौकरी कब तक़ चलेगी और अपना भी वही जवाब है,कर ली है नौकरी तोड़ दी है बंदूक,फ़िर छोड़ेंगे नौकरी फ़िर खरीदेंगे बंदूक्।देखें कब तक़ सरस्वती पुत्र नौकरी कर पाता है लक्ष्मीपुत्र के यंहा।वैसे लिखने पढने पर कोई पाबंदी न होने की शर्त हर बार रहती है जो टूटती भी नही है लेकिन पता नही क्यों अपनी गाड़ी पटरी से उतर जाती है।कभी सहयोगी या सहकर्मियों के हितों की वज़ह से तो कभी दूसरों के दर्द की वज़ह से तो कभी बिना वज़ह खुद के अंहकार से तो कभी स्वतंत्र यानी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों से मुक्त रहने की वज़ह से आज़ाद तबियत का होने के कारण।इस बार भी मालिकों की ओर से पुराने सवाल के साथ पुरानी रिक्वेस्ट भी सामने आई कि अब इसे अंतिम पड़ाव मान ले।इन लोगों से भी बहुत पुराने संबंध है।जब उनसे कई सालों बाद बात हुई तो उन्होने कोई गिला-शिकवा भी नही किया और घर परिवार छोड़ कर गये सदस्य की तरह ही स्वागत किया।बड़े भाई ने समझाया भी कि ऐसा करके तुम खुद का नुकसान करते हो।बाहर तक़ छोड़ने आये छोटे भाई ने मेरी गाड़ी का नम्बर देख कर पूछा कि ये वेस्ट बेंगाल की गाड़ी क्यों?तो मेरा जवाब था ये डब्ल्यू बी का मतलब है विदाऊट ब्रेक्।वो हंसा और उसने कहा कि इसका मतलब विथ ब्रेक भी होता है बस आऊट को आऊट कर दो,समझे।मैने कहा समझा और इस बार समझने की कोशिश भी रहेगी।देखें विदाऊट ब्रेक कितने दिनों,महीनो या सालों तक़ विद ब्रेक रह पाती हैं।नई नौकरी कोई नई बात नही है लेकिन इस बार मेरे साथ एक नया परिवार भी है ब्लाग परिवार सो इस बार की खुशी आप सभी से बांट रहा हूं।ये थोड़ा लम्बी चली ऐसी दुआ करना।मुझे नौकरी की ज़रुरत नही है फ़िर भी मै भी नौकरी करके नौकरी छोड़ू की ईमेज भी तोड़ना चाहता हूं।आप लोगों का स्नेह,आशीर्वाद निश्चित ही मेरा मनोबल बढायेगा।
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