यंहा राजधानी रायपुर मे एक सार्वजनिक गणेशोत्सव मे गणेश जी की प्रतिमा को गज़नी फ़िल्म के आमिर खान का रूप दे दिया गया था।इस बात को लेकर विरोध शुरू हुआ ही था कि पुलिस जागी और आनन-फ़ानन मे मुहल्ले वालों समेत कुछ हिंदूवादी नेताओं को बुलाया और सबसे सहमति लेकर मूर्ति का मान-सम्मान से विसर्जन करा दिया। हालांकि समिति वालों ने गणेश जी को पितांबर पहना कर और उसे केश आदि लगाकर लीपापोती करने की कोशिश जरूर की मगर पुलिस ने इसे संवेदनशील मामला मानते हुये सुधरे रूप को भी आपत्तिजनक माना।
रायपुर का हिंदू जाग न जाये और बेवजह बवाल न मच जाये इसलिये पुलिस तत्काल हरकत मे आई।हालांकि इस बार भी उसकी कारवाई काफ़ी देर से शुरू हुई मगर इस बात का संतोष किया जा सकता है कि कोई फ़साद खडा होने के पहले ही मामला निपट गया।पुलिस ने पता लगाया तो गणेशोत्सव समिति मे कक्षा नवमी और दसवी के छात्र भर बस हैं।छात्रों को नासमझ मानते हुये पुलिस ने उन्हे समझाईश देकर छोड़ दिया मगर मूर्ति बनाने वाले कलाकार विनय को पुलिस ने नही छोड़ा।उसे प्रतिबंधात्मक धारा के तहत गिरफ़्तार कर लिया ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
बहरहाल पुलिस की इस कार्र्रवाई को समय पर उठाया कदम माना जा रहा है।इस मामले मे देरी का मतलब बेवजह का फ़साद फ़ड़फ़ड़ाता और शहर समेत आसपास की शांति भंग कर देता।इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस के पास कुछ और इलाको से मूर्ति के आकार मे परिवर्तन कर उससे उपहास किये जाने की शिकायत आने लगी है।जो भी हो अब लगता नही है कि लोग भगवान की प्रतिमा का मज़ाक बनायेंगे,बाकि तो इस देश का भगवान ही मालिक है।
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Monday, August 31, 2009
Saturday, August 29, 2009
भगवान गणेश को गज़नी बना डाला तो भी लोग खामोश है फ़िर भी कुछ लोग हिंदुओं को कट्टरवादी कहने से नही चुकते
यंहा राजधानी रायपुर मे सार्वजनिक गणेशोत्सव मे भगवान श्रीगणेश की जो प्रतिमा स्थापित की गई है वो आमिर खान के गज़नी स्टाईल की है।सिक्स एब्स वाले जीन्स मे गणेश जी का दर्शन करने के बाद भी कोई बहुत ज्यादा बवाल नही हुआ मगर बवाल होने की आशंका मे गणेशोत्सव समिति के लोगो ने गणेश जी को जीन्स के ऊपर ही पितांबर पहना कर मामला निपटाने की कोशिश की है मगर लम्बोदर को सिक्स एब्स वाले पीठ से चिपके पेट मे देखो तो ऐसा लगता है जितना मज़ाक हिंदू देवी-देवताओ का इस देश मे उडाया जाता है उतना और कंही किसी धर्म का नही उडाया जाता होगा।हैरानी की बात तो ये है कि इसके बावज़ूद स्थापित किया जा रहा है कि इस देश मे हिंदू कट्टरवाद हावी हो रहा है।
लोकमान्य तिलक जी ने सपने मे नही सोचा होगा कि आज़ादी के मतवालों को इकट्ठा करने के उद्देश्य
से शुरू किये गये सार्वजनिक गणेशोत्सवो मे गणेश जी की ये दुर्गति होगी।कंही गणेश जी गज़नी बने है तो कंही गिटार बज़ा रहे हैं।इससे पहले उन्हे क्रिकेटर बना कर बल्ला तक़ पकडा दिया गया था।कंही उन्हे साईं बाबा के रूप मे दिखाया जा रहा है तो कंही कुछ बना दिया गया है।कहने का मतलब ये है गणेश जी गणेश न होकर मज़ाक बन गये हैं।इतना सब होने के बाद भी,वो भी खुले आम,सार्वजनिक तौर पर,मगर शांति बनी हुई है।यदी किसी अन्य धर्म का कोई शब्द भी आपत्तिजनक लगता है तो उस पर बवाल मच जाता है।फ़िल्मो के प्रदर्शन तक़ रुकवा दिये जाते है।गाने के बोल तक़ बदले गये हैं।मेरा उद्देश्य उन लोगो को धर्मांध बताना नही है बल्कि ये बताना है कि हिंदू धर्म के लोग कितने सहिष्णु है और इस्लिये उन पर सांप्रदायिकता का या कट्टरवाद का इल्ज़ाम कतई नही लगाया जाना चाहिये।
से शुरू किये गये सार्वजनिक गणेशोत्सवो मे गणेश जी की ये दुर्गति होगी।कंही गणेश जी गज़नी बने है तो कंही गिटार बज़ा रहे हैं।इससे पहले उन्हे क्रिकेटर बना कर बल्ला तक़ पकडा दिया गया था।कंही उन्हे साईं बाबा के रूप मे दिखाया जा रहा है तो कंही कुछ बना दिया गया है।कहने का मतलब ये है गणेश जी गणेश न होकर मज़ाक बन गये हैं।इतना सब होने के बाद भी,वो भी खुले आम,सार्वजनिक तौर पर,मगर शांति बनी हुई है।यदी किसी अन्य धर्म का कोई शब्द भी आपत्तिजनक लगता है तो उस पर बवाल मच जाता है।फ़िल्मो के प्रदर्शन तक़ रुकवा दिये जाते है।गाने के बोल तक़ बदले गये हैं।मेरा उद्देश्य उन लोगो को धर्मांध बताना नही है बल्कि ये बताना है कि हिंदू धर्म के लोग कितने सहिष्णु है और इस्लिये उन पर सांप्रदायिकता का या कट्टरवाद का इल्ज़ाम कतई नही लगाया जाना चाहिये।न केवल गणेशोत्सव मे बल्कि टी वी पर नन्हे-नन्हे कलाकार जिस तरीके से द्रौपदी के चीरहरण के द्रष्य का माखौल उडाते है या जिस तरीके से बजरंगबली के चुटकुले बनाये जाते है वे कंही से धर्म का सम्मान नही करते।मगर ऐसा हो रहा है और शायद चलता रहेगा।इसके बावज़ूद कुछ लोगो का हिंदुओं पर कट्टरवादी होने के आरोप लगाने का सिलसिला एक राजनैतिक षड़यंत्र के अलावा कुछ और नज़र नही आता।
हो सकता है कि भगवान श्री गणेश जी को गज़नी बना कर उनका मज़ाक उडाने वाले लोगो ने उद्देश्यपूर्ण ढंग से ऐसा नही किया हो मगर ऐसा हुआ तो है।इसके बावज़ूद किसी ने उसका व इरोध नही किया और धीरे-धीरे इस बात का प्रसार शहर भर मे होता देख उन्होने गणेश जी की प्रतिमा को पितांबर पहना दिया।क्या सार्वजनिक गणेशोत्सवो मे प्रतिमाओ मे इस तरह की छेडछाड जायज है?क्या ये सिलसिला जारी रहना चाहिये?क्या इस तरह के अपमानजनक कार्य का विरोध करना कट्टरवाद कहलायेगा?क्या इसका विरोध करना सांप्रदायिकता की श्रेणी मे आयेगा ?अगर आता है तो आये।जिसे जो कहना है कहे।इसका विरोध होना ही चाहिये।किसी भी धर्म का मज़ाक उड़ाने की इज़ाजत किसी को नही दी जानी चाहिये।धर्म सभी समान है और उनका सम्मान ही होना चाहिये।
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