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Monday, August 17, 2015

बस्तर में नकस्लियों ने स्वतंत्रता दिवस नही काला दिवस मनाया

बस्तर में नकस्लियों ने स्वतंत्रता दिवस नही काला दिवस मनाया।उनका खौफ़ इतना कि स्कूलों में घुस कए वे तिरंगा फ़हराते रहे पर मजाल कि कोई विरोध करता।एक नही स्कूलों में नक्सलियों ने काला झण्डा फ़हराया और क्रांतिगीत गाये।हैरानी की बात तो ये कि ये शर्मनाक घटना ब्लाक मुख्यालय से महज कुछ दूर स्थित स्कूल मे भी हुई।सरकार चाहे लाख दावा करे कि बस्तर में नक्सलियो का कोई प्रभाव नही पर वस्तुस्थिति स्पष्ट हो गई है।वंहा इस बात से कोई इंकार नही कर सकता कि सुदूर इलाकों में उन्होने समानांंतर व्यवस्था कायम करने में सफ़लता हासिल कर ली है।ये किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य के लिये शर्म की बात है कि उनके राज्य में सरकारी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रध्वज न फ़हराया जाये बल्कि काला झण्डा फ़हरा जाये,सच में ये न केवल बस्तर बल्कि छत्तीसगढ,बल्कि भारत के लिये भी शर्मनाक घटना है।ये नक्स्लियों की चेतावनी नही बल्कि खतरनाक इरादों के सकेत है और अगर सरकारें अब भी नही जागी तो फ़िर सिवाय हाथ मलने के कोई कुछ नही कर पायेगा।

Sunday, August 16, 2015

देशभक़्ति बंद,आपभक़्ति शुरु

एक माईक्रोपोस्ट।चलो पेटभक़्ति शुरु।अब आप भक़्ति,परिवार भक़्ति का जोश उफ़ान मारेगा और उसी उफ़ान में देशभक़्ति पता नही कंहा डूब जायेगी,उसे उबरने में भी अब समय लगेगा।26 को फ़िर उठेगा देशभक़्ति का ज्वार।तब तक के लिये आपभक़्ति ज़िंदाबाद।जय हिंद,जय भारत,जय छत्तीसगढ।

Monday, August 15, 2011

भारतीय क्रिकेट टीम और मनमोहन सिंह में क्या समानता है? भारतीय क्रिकेट टीम और मनमोहन सिंह में क्या समानता है?

स्वतंत्रता दिवस की बधाई के साथ एक सवाल और साथ मे उसका जवाब भी।बताईये भारतीय क्रिकेट टीम और मनमोहन सिंह में क्या समानता है?                                                                                                              दोनो के कोच विदेशी हैं!

,हमें भी अपने देश के लिये कुछ करना चाहिये।बस ये कुछ क्या है?शायद यही समझ नही पाये और इसलिये कुछ भी नही कर पाये।

स्वतंत्रता दिवस पर एक ईमानदार कन्फ़ेशन।जैसी भी हो,हमे अपनी आज़ादी प्यारी है।स्कूल में निबंध लिखने से लेकर कालेज में परेड देखने और अब खुद झण्डा फ़हराने तक़ का समय यही सोचते-सोचते गुज़र गया कि आज़ादी का जश्न मनाना ही काफ़ी नही है,हमें भी अपने देश के लिये कुछ करना चाहिये।बस ये कुछ क्या है?शायद यही समझ नही पाये और इसलिये कुछ भी नही कर पाये।एक बार फ़िर झण्डा फ़हराने का समय आ गया है।कल फ़िर झण्डे को सलाम करूंगा और सोचुंगा कि देश के लिये कुछ लिये करना चाहिये।शायद जब तक़ कुछ करुं अगला स्वतंत्रता दिवस आ जायेगा।देश की बदहाली के लिये कुछ ढढने वाले कुछ लोगों की तरह कुछ-कुछ मैं भी ज़िम्मेदार हूं,शायद।