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Monday, September 26, 2011
हर साल कंही बाढ के कहर की तो कंही सूखे की खबरें दिल दहलाती है।क्या देश के ठेकेदार बाढ और सूखे जैसी आपदाओं का स्थाई निदान नही चाह्ते?
हर साल कंही बाढ के कहर की तो कंही सूखे की खबरें दिल दहलाती है।बाढ का तांडव तो अब लाईव नज़र आ जाता है।क्या ये सब हमारे देख के ठेकेदारों को नज़र नही आता?हर साल डिसास्टर मैनेजमैंट के नाम पर पता नही कितनी रकम डकार जाते हैं,एक्स्पर्ट?खाने में बचाने में नही।दोनो ही प्राकृतिक आपदाओं का कारण है पानी।क्या इस देश में आज़ादी के बाद से नदी जल के मैनेजमेंट पर सोचने के लिये किसी के पास समय नही है?क्या देश के ठेकेदार बाढ और सूखे जैसी आपदाओं का स्थाई निदान नही चाह्ते?
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आपदा प्रबंधन,
बाढ,
सूखा
Tuesday, February 15, 2011
गांववालो,शहरवालों और देशवालों अब डरने की कोई ज़रुरत नही,बाढ से बचने का तरीका मिल गया है!
एक खुशखबरी है गांववालों के लिये,शहरवालों के लिए और कहो तो सारे देशवालों के लिए।सालों-साल बाढ का प्रकोप झेल चुके गांव और शहर इस बार बाढ के कहर से बच जायेंगे!क्या कहा?कौन बचायेगा?कमाल है यार,ज़रा जनरल नालेज ठीक करो और टीवी पर नये-नये आविष्कार-चमत्कार देखा करो?अब रोज़ टीवी नही देखोग,खुद को अपडेट नही रखोअगे तो इस तरह के बेकवर्ड क़्वेश्च्न तो पूछोगे ही।चलो अब जब पूछ ही लिया है तो बता देते हैं कि अब बाढ नियंत्रण का काम सरकार की बजाये सेनेटरी नेपकीन बनाने वाली एक कंपनी देखेगी।कमाल का सेनेटरी नेपकीन बनाया है उसने।अभी ट्रायल में तो उसका एक ही नेपकीन एक अच्छे-खासे तालाब का पानी सोख ले रहा है।अब जब अगली बरसात मे बाढ आयेगी तो इसी कंपनी के नेपकीन फ़ेंक-फ़ेंक कर बाढ का सारा पानी सोख लिया जायेगा।मानना पड़ेगा सेनेटरी बनाने वाली कंपनी के उस चमत्कारी उत्पादन को और उसे दिखाने वाले टीवी चैनलों को।क्यों है ना बड़ी खबर?क्या कहा नही देखा?तो देख लिजिये हर चैनल पर,हर प्रोग्राम के बीच दिखाई दे रहा है तालाब को सोख डालने वाले चमत्कारी सेनेटरी नेपकीन का विज्ञापन।तो गांववालों,शहरवालों और देशवालों अब डरना कैंसिल?
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