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Friday, August 29, 2008

शर्म भी नहीं आती फेल सर्च ऑपरेशन को विश्व का सबसे बड़ा बताते हुए


बस्तर के जंगलों में गुम हेलिकॉप्टर की तलाश आखिर बंद कर दी गई है। पुलिस इस असफलता को स्वीकारने की बजाय बड़ी बेशर्मी से इसे दुनिया का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन साबित करने पर तुली हुई है। और तो और अपनी असफलता को ढांकने के लिए दुनिया के सारे असफल सर्च ऑपरेशनों की दुहाई भी दे रही है। अब अफसोस नहीं होता है पुलिस की लाचारी पर बल्कि शर्म भी शर्माने लगी है।

हैदाराबाद से रायपुर आ रहे रेनबैक्सी की कंपनी रेन एयर के हेलिकॉप्टर बेल 430 के लिए हवाई सर्च अब बंद कर दी गई है। पुलिस के अनुसार 200 घंटे की उड़ान के बाद सर्च में लगी सारी एजेंसियों ने साफ कर दिया कि अब ऊँचाई से हेलिकॉप्टर का नज़र आना असंभव है। 3 अगस्त से जारी सर्च अभियान को पुलिस अब दुनिया का सबसे बड़ा सर्च अभियान साबित करने पर उतर आई है। डीजीपी विश्वरंजन के मुताबिक अब तक का रिकॉर्ड 15 दिनों तक इण्डोनेशिया में चला सर्च अभियान था। वहाँ अक्टूबर 2005 में गुम हेलिकॉप्टर की तलाश की गई थी।

पुलिस ये भी दावा कर रही है कि इस सर्च अभियान में 12 हज़ार से ज्यादा जवान लगाए गए थे और हज़ारों किलोमीटर जंगल को छाना गया, सेना के 2 एमआई 8 हेलिकॉप्टर ने भी हवाई सर्च किया। लगभग 18 हज़ार कि.मी. से भी ज्यादा फैला है दक्षिण बस्तर का जंगल। हालाकि पुलिस ये दावा करती है कि उसके जवानों ने जंगल में घुसकर हेलिकॉप्टर की तलाश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन हेलिकॉप्टर के साथ लापता कर्मचारियों के परिजनों का कहना कुछ और है। उन्होंने साफ कहा है बस्तर के जंगलों में पुलिस तलाशी नहीं कर पा रही है। उनका यहां तक कहना है कि बस्तर की पुलिस जंगलों में घुसने से डरती है और कुछ इलाकों में तो वो गई ही नहीं।

पुलिस की बेशर्मी का नमूना ये भी है कि वो अब कह रही है कि हेलिकॉप्टर की तलाश की ज़िम्मेदारी एयरपोर्ट एथॉरिटी की होती है। तमाम नियम कानून और धाराओं के साथ वो ये साबित करने में जुटी है कि किसी एयरक्रॉफ्ट के दुर्घटनाग्रस्त होने पर उसकी तलाश की ज़िम्मेदारी एयरपोर्ट एथॉरिटी की होती है, पुलिस समेत अन्य एजेंसियों के सहयोग से। अब इसे क्या कहा जाए ? हेलिकॉप्टर तो तलाश नहीं पाए दुनिया भर के कानून कायदों की खाक छान कर ये धांसू आइडिया ढूंढ लाए कि हेलिकॉप्टर ढूंढना उनका नहीं एयरपोर्ट एथॉरिटी का काम है।

इतना ही नहीं पुलिस के एयरकंडिशन्ड किलाबंद मुख्यालय में बैठे अफसर दुनिया के तमाम बड़े फेल सर्च ऑपरेशन की लिस्ट बता रहे हैं। उन्हें सिर्फ फेल ऑपरेशन के बारे में ही जानकारी इकट्ठा करनी थी इसलिए फेल ऑपरेशनों की लिस्ट ही है उनके पास। सफल ऑपरेशन के बारे में पता करने का फायदा ही नहीं मिला इसलिए उधर टाईम खोटा नहीं किया। ठंडे कमरों में रहने वाले साहब का कहना है इण्डोनेशिया का हेलिकॉप्टर पापुआ में लापता हुआ था 15 दिन बाद जकार्ता के अफसरों ने जंगलों में उसकी तलाश बंद कर दी थी। चीन में भी सेना का हेलिकॉप्टर गुम गया था। जिसकी खोजबीन 7 दिनों में बंद कर दी गई थी। छत्तीसगढ़ सरकार का हेलिकॉप्टर मैना जुलाई 2007 में गुम हुआ था। इसकी तलाश मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर 4 दिन चली थी। पांचवें दिन हेलिकॉप्टर का मलबा और मारे गए लोगों के शव मिल गए थे काठमांडू नेपाल के पास भी गुम हुए हेलिकॉप्टर की तलाश 3 दिन बाद रोक दी गई थी। इसके अलावा न्यूज़ीलैण्ड, आस्ट्रेलिया और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हुए हादसों में गुम हेलिकॉप्टर की तलाश 1 सप्ताह से ज्यादा नहीं चल पाई थी।

इसका मतलब यही है कि जब दुनिया के जाने-माने देशों की सर्वसुविधायुक्त एजेंसियाँ गुम हेलिकॉप्टरों को तलाश नहीं पाती, तो हम किस खेत की मूली हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो हेलिकॉप्टर की तलाश बंद करने के लिए सारे बहाने और तर्क ढूंढने में पुलिस ने जितनी मेहनत की उतनी अगर ईमानदारी से हेलिकॉप्टर की तलाश में लगाई होती तो आज वे गर्व से कह सकते कि दुनिया का सबसे लंबा सफल सर्च ऑपरेशन उन्होंने पूरा किया। लेकिन लगता है गर्व से हमारा कोई नाता ही नहीं है। जब शर्म से नहीं है तो गर्व से क्या होगा ? हमको ये बताने में जरा शर्म महसूस नहीं होती कि दुनिया का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन फेल हो गया।
हाँ ! अभी भी ये कहा जा रहा है कि हेलिकॉप्टर की तलाश अब सीधे जंगलों में घुसकर की जाएगी। यानि अभी तक जो हो रहा था वो था हवा-हवाई।

15 comments:

COMMON MAN said...

sir, kam se kam airport authority wale niyam to khoj hi liye police ne, isliye police ko badhai

हरि said...

बात यहीं साफ हो जाती है जब जिम्मेदारों ने साफ कह दिया कि बस्तर के जंगलों में पुलिस तलाशी नहीं कर पा रही है। उनका यहां तक कहना है कि बस्तर की पुलिस जंगलों में घुसने से डरती है और कुछ इलाकों में तो वो गई ही नहीं।

seema gupta said...

अभी भी ये कहा जा रहा है कि हेलिकॉप्टर की तलाश अब सीधे जंगलों में घुसकर की जाएगी। यानि अभी तक जो हो रहा था वो था हवा-हवाई।
" really very shamefull situation, efforst done from last so many days all gone waste like this just in a while, now let us see what action will be taken further to find out the lost helicoptter... any way bokks mey to abhee bhee talash jaree hee rhege, this is only our system which require lot of consederation thoughtfullnes and a change ofcourse" thanks for sharing such interesting topics

Regards

दिनेशराय द्विवेदी said...

पुलिस की क्या कहें वह तो इतना भी नहीं खोज पाती जितना खुद फरियादी खोज लेता है। आज ऐसी ही एक असफल अन्वेषण रिपोर्ट देख कर आया हूँ। अब नकलें ले कर खुद ही अदालत को सब कुछ बताना पड़ेगा।

P. C. Rampuria said...

बेहद शर्मनाक और अफ़सोस जनक कृत्य है !

डा. अमर कुमार said...

.

भईय्या मेरे, भारत में जो भी होता है,
सब बड़ा बड़ा ही होता है...
इसीलिये तो महान कहलाता है..

Shiv Kumar Mishra said...

सबसे बड़ा आपरेशन बताकर गिनीज बुक से कुछ माल-वाल जुगाड़ने का प्लान है क्या? ये छत्तीसगढ़ पुलिस का एक ब्लॉग बनवा दीजिये. वो उसे दुनियाँ का सबसे बड़ा ब्लॉग साबित कर लेगी.

मुझे याद है. मध्य प्रदेश उस समय साबुत था. पुलिस में भर्ती के लिए लोगों का इम्तिहान हो रहा था. शायद १९८८ की बात है. दौड़ की प्रतियोगिता थी. पुलिस रिकार्ड के हिसाब से भर्ती होने का एक इच्छुक व्यक्ति १०० मीटर ९.६८ सेकंड्स में दौड़ लिया था. उनदिनों विश्व रिकॉर्ड ९.७२ सेकंड्स का था जो बेन जॉन्सन ने बनाया था. वो भी स्टेरायड खाकर. बेचारे से मैडल छीन लिया गया था.

महेंद्र मिश्रा said...

जब एक हैलीकाप्टर नही खोज सके तो छतीसगढ़ में नक्सलियो को खोज भी न पाते होंगे. इस निकम्भी व्यवस्था को क्या कहे. आपका लेख आंखे खोल देने वाला है . बहुत बढ़िया भाई जी . धन्यवाद्.

Gyandutt Pandey said...

आश्चर्य नहीं हुआ। आप पुलीस के सामान्य चरित्र का वर्णन कर रहे हैं। :)

Udan Tashtari said...

आश्चर्यजनक किन्तु सत्य!!

हद है भई!!

राज भाटिय़ा said...

भाईया यह अपने डा० अमर जी की बात मुझे तो अच्छी लगी, हम यु ही नही महान कहलाते, धन्य हे मेरे ....

NIRBHAY said...

kya saboot hai ki helicopter crash hua hai?

agar yeh Airport Authority bolegi to Govt. ka kya jawab hoga?

helicopter naxalites ke KABJE me hai ya hoga to Govt. ki kyajimmedari hai?

ek ungli uthaoge then teen ungli aap ke taraf rahegi, aur angutha aasman ki tarf rahta hai.
matlab bhagwan is par RAHAM kar.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बिल्कुल ठीक कहा आपने, यह पुलिस की बेशर्मी का नमूना नहीं तो और क्या है?

श्रीकांत पाराशर said...

Theek likha hai aapne. Hamare desh ke neta hon ya police ya phir janch agencies, koi bhi sahi soch ke sath sahi disha men kaam nahin karte. isliye saflta milegi kahanse? hamare prashasan aur police ki soch aisi hai ki jise gambhirta se lena chahiye use easy lete hain aur jise easy lena chahiye use serious lete hain, yah ek vidamana hi hai.

योगेन्द्र मौदगिल said...

Asafalta me TOP karna kya sab ke bas ka hai bhaisaab,
par chita nahi...
hum Hindustani hain na.....